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पास्का की ज्योति जो कभी नहीं बूझती


पाणाजी, मंगलवार, 18 अप्रैल 2017 (ऊकान): काथलिक कलीसिया की परम्परा में पास्का पर्व में प्रयुक्त मोमबत्ती का निर्माण, भारत की कलीसिया के लिए गोवा की एक औद्योगिक इकाई करती है।

गोवा में मोमबत्ती केंद्र के प्रबंध निदेशक फा. जोस फुरतेदो ने कहा, ″धन्य यूसुफ वज़ एंटरप्राइजेज में, गोवा महाधर्मप्रांत में मशीन से बनी पास्का मोमबत्ती का प्रयोग नहीं किया जाता है। वहाँ 2013 से ही हस्तनिर्मित मोमबत्ती का प्रयोग किया जा रहा है।″  

इस मोमबत्ती की विशेषता है कि इसके सभी भाग मोम से ही बने होते हैं जो कि पहले ऐसा नहीं था 2013 से पहले मोमबत्ती में पारदर्शी विनाइल स्टिकर अथवा पेपर का प्रयोग अक्षरों को अंकित करने के लिए किया जाता था।। अब, एक मोम शीट का उपयोग किया जाता है।

फा. फुरतादो ने कहा, ″इस वर्ष, हमने मोम से युक्त पिपलीक्स का उपयोग किया है। इसमें फीता, कपड़ा, या कागज जैसी किसी दूसरी वस्तु का प्रयोग नहीं किया गया है। पास्का मोमबत्ती पूरी तरह मोम से बना है।″ 

उन्होंने जानकारी दी कि विभिन्न पल्लियों से मात्र इस वर्ष केंद्र से करीब 250 पास्का मोमबत्ती की मांग की गयी थी।

मोम बत्ती का निर्माण एक गहन श्रम का कार्य है एक मोमबत्ती के निर्माण में करीब दिनभर का समय लग जाता है तथा चार ही मोम बत्तियों में सजावट किया जाना संभव है। मोमबत्तियों के आकार अलग-अलग हैं सबसे छोटी मोमबत्ती 15 एंच लम्बी है तथा दूसरी 20,22 और 24 इंच की होती हैं। 

गोवा में वेर्ना की मोमबत्ती बिक्री केंद्र ही एक मात्र मोमबत्ती दुकान है जो 50 साल पुराना है जिसकी देखभाल हैंडमेडस ऑफ ख्राईस्ट धर्मसमाज की धर्मबहनें करती हैं।