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वाटिकन सिटीः शिशु येसु के दर्शन को पहुँचे तीन राजा विश्व के लोगों, सभ्यताओं, संस्कृतियों एवं धर्मों का प्रतिनिधित्व करते हैं, बेनेडिक्ट 16 वें


वाटिकन सिटी, 18 जून सन् 2012 (सेदोक): श्रोताओ, रविवार, 06 जनवरी को, प्रभु प्रकाश महापर्व के दिन, रोम स्थित सन्त पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में एकत्र तीर्थयात्रियों के साथ देवदूत प्रार्थना के पाठ से पूर्व, सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने, भक्तों को इस प्रकार सम्बोधित कियाः

"अति प्रिय भाइयो एवं बहनो,

आज, हम प्रभु प्रकाश का महापर्व यानि लोगों के समक्ष प्रभु की प्रकाशना का महापर्व मनाते हैं जबकि पूर्वी रीति की असंख्य कलीसियाएँ, जूलियन पंचाग का अनुसरण करते हुए प्रभु येसु की जयन्ती मना रही हैं। यह छोटा सा अन्तर जो इन दो क्षणों को एक दूसरे के साथ रखता है, इस बात को प्रकाश में लाता है कि बेथलेहेम के गऊशाले में जन्मा वह बालक ही विश्व का प्रकाश है, वही सब लोगों की जीवन यात्रा की दिशा निर्देशित करता है। यह ऐसा संयोग है जो विश्वास की दृष्टि से भी हमसे चिन्तन का आग्रह करता हैः एक ओर, क्रिसमस या ख्रीस्तजयन्ती पर येसु के समक्ष हम मरियम, योसफ एवं चरवाहों के महान विश्वास का साक्षात्कार करते हैं तो वहीं दूसरी ओर, आज एपीफानी या प्रभु प्रकाश में हम, यहूदियों के राजा के दर्शन करने, पूर्व से आये तीन राजाओं के विश्वास को देखते हैं।"

सन्त पापा ने आगे कहाः "कुँवारी मरियम अपने पति योसफ के साथ तनावों से घिरे इसराएल तथा नबियों द्वारा पहले से घोषित उन सब बातों का प्रतिनिधित्व करती हैं जहाँ से मसीहा को अंकुरित होना था। जबकि, तीन राजा लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं, और हम कह सकते हैं कि वे उन सभ्यताओं, संस्कृतियों एवं धर्मों का प्रतिनिधित्व करते हैं जो, एक प्रकार से, ईश्वर तक की तीर्थयात्रा में संलग्न हैं तथा शांति, न्याय, सत्य एवं स्वतंत्रता से परिपूरित ईश्वर के राज्य की खोज में लगे हैं।"

उन्होंने आगे कहाः "सियोन की पुत्री" मरियम के व्यक्तित्व में पहले से ही एक अहं तत्व निहित है और यह है इसराएल का तत्व अर्थात् वे लोग जो ईश्वर को जानते हैं तथा उस ईश्वर में विश्वास करते हैं जिन्होंने अपने आप को प्राधिधर्माध्यक्षों एवं इतिहास के अन्तराल में प्रकट किया है। यह विश्वास समय की पूर्णता में, मरियम में अपनी परिपूर्णता तक पहुँचता है; मरियम में, जो "धन्य हैं क्योंकि उन्होंने यह विश्वास किया" कि शब्द ने देहधारण किया और उनके द्वारा ईश्वर विश्व में "प्रकट" हुए।" मरियम का विश्वास प्रथम फल बन जाता है और मरियम कलीसिया के तथा नई संधि की प्रजा के विश्वास का आदर्श बन जाती है। परन्तु, यह प्रजा सृष्टि के आरम्भ से अस्तित्व में है, जिसे आज हम पूर्व के उन राजाओं में देखते हैं जो तारे एवं पवित्र धर्मग्रन्थ का इशारा पाकर बेथलेहेम पहुँचते हैं।"

आगे सन्त पापा ने कहा, "सन्त लियो महान इस तथ्य की पुष्टि करते हैं: "एक समय अब्राहम से प्रतिज्ञा की गई थी कि उनके वंशज असंख्य होंगे जो मांस से नहीं अपितु विश्वास की उर्वरकता से उत्पन्न होंगे" ( प्रभु प्रकाश के उपलक्ष्य में प्रवचन 3, 1: 54,240)। मरियम के विश्वास को अब्राहम के विश्वास के सदृश देखा जा सकता हैः यह उसी प्रतिज्ञा का नया उदय है, यह ईश्वर की उसी अपरिवर्तनीय योजना का अंग है जो अब येसु ख्रीस्त में परिपूर्ण हुई है। येसु ख्रीस्त का प्रकाश इतना स्पष्ट और प्रबल है कि ब्रहमाण्ड और धर्मग्रन्थ दोनों की भाषा को विवेकी बना देता है ताकि वे सब जो पूर्व के राजाओं की तरह सत्य के प्रति उदार रहते हैं उस तक पहुँच सकें तथा विश्व के उद्धारकर्त्ता पर मनन चिन्तन कर सकें। सन्त लियो आगे कहते हैं: "इसीलिये प्राधिधर्माध्यक्षों के परिवार में विशाल जनसमुदायों सहित सब लोग प्रवेश करें तथा विश्व के सृष्टिकर्त्ता की आराधना करें, ईश्वर केवल यहूदिया के ईश्वर के रूप में ही न पहचाने जायें, अपितु, समस्त धरती पर पृथ्वी के ओर छोर तक निवास कर रहे लोगों के ईश्वर रूप में पहचानें जायें" (तत्रैव)।

अन्त में सन्त पापा ने कहाः "इसी परिप्रेक्ष्य में, हम धर्माध्यक्षीय अभिषेकों को देख सकते हैं जिन्हें आज प्रातः सन्त पेत्रुस महागिरजाघर में सम्पादित करने का सौभाग्य मुझे मिलाः चार अभिषिक्त महाधर्माध्यक्षों में से दो धर्माध्यक्ष परमधर्मपीठ की सेवा में कार्य करते रहेंगे और शेष दो अलग अलग राष्ट्रों में परमधर्मपीठीय राजदूतावासों में परमधर्मपीठीय प्रतिनिधि रूप में जायेंगे। हम इन नये धर्माध्यक्षों के लिये प्रार्थना करें, उनकी प्रेरिताई की सफलता के लिये प्रार्थना करें ताकि सम्पूर्ण विश्व में ख्रीस्त की ज्योति प्रज्वलित हो सके।"

इतना कहकर सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने सभी भक्तों पर शान्ति का आह्वान किया तथा सबको अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया।

तदोपरान्त, सन्त पापा ने विभिन्न भाषाओं में तीर्थयात्रियों को सम्बोधित कर शुभकामनाएँ अर्पित कीं। सर्वप्रथम सन्त पापा ने पूर्वी रीति की कलीसियाओं का अभिवादन किया जो सात जनवरी को प्रभु येसु की जयन्ती मनाते हैं, उन्होंने कहा, "जूलियन पंचाग का अनुसरण करनेवाली पूर्व की कलीसियाएँ कल प्रभु की जयन्ती मना रही हैं: सामान्य विश्वास के आनन्द में इन सब के प्रति मैं शांति की हार्दिक शुभकामनाएँ व्यक्त करता हूँ तथा प्रार्थना में, विशेष रूप से, इनके समीप रहने का आश्वासन देता हूँ।"

देवदूत प्रार्थना के लिये उपस्थित सभी अँग्रेज़ी भाषा भाषियों का अभिवादन करते हुए सन्त पापा ने कहा, "डबलिन से आई भजन मण्डली का मैं स्वागत करता हूँ जिन्होंने प्रभु प्रकाश महापर्व के उपलक्ष्य में अर्पित ख्रीस्तयाग के दौरान भक्तिभाव से गीतों को गाया। उस समारोह में मैंने चार नये महाधर्माध्यक्षों का अभिषेक किया। मेरी मंगलकामना है कि ये सभी महाधर्माध्यक्ष प्रेरितों के उत्तराधिकारी के प्रति निष्ठावान रहें तथा उन ख्रीस्त का साक्ष्य प्रस्तुत करें जिन्होंने आज ईश्वर के मुखमण्डल को राष्ट्रों के समक्ष प्रकट किया है। प्रभु ईश्वर आपको और आपके सभी प्रिय जनों को आशीष दें।"

अन्त में सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें ने सभी उपस्थित तीर्थयात्रियों के प्रति शुभ रविवार और शुभ सप्ताह की मंगलकामनाएँ अर्पित कीं।




कांदिविदी






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