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कंधमाल पीड़ित महिलाओं ने केरल काथलिक महिलाओं को किया प्रेरित

कंधमाल की महिलायें

02/07/2018 16:14

कंधमाल, सोमवार 2 जुलाई 2018 (मैटर्सइंडिया) : केरल की काथलिक महिलाओं के एक समूह ने कंधमाल में पांच दिन बिताए। उनका कहना था कि ओडिशा की हिंसा में सताए गए ख्रीस्तीयों के विश्वास ने मसीह में उनकी धारणा को और भी गहरा कर दिया।

केरल काथलिक धर्माध्यक्षीय काउंसिल के महिला आयोग का प्रतिनिधित्व करने वाली 11 सदस्यीय टीम के सदस्य सिस्टर जोसिया पद्दीरादाथु ने कहा, "कंधमाल के ख्रीस्तीयों ने आधुनिक भारत में सबसे बुरे धार्मिक उत्पीड़न का सामना करके मसीह में गहराई से विश्वास किया है।" सिस्टर जोसिया मैटर्स इंडिया को बताया, "कंधमाल हिंसा से बचे हुए लोगों की बातों ने मुझे गहराई से छुआ और मुझे झकझोर दिया है।"

भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन की महिला परिषद का राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत 26 से 30 जून कंधमाल की यात्रा करना था।

परिषद की सचिव सिस्टर तालिशा नादुकुदियिल ने इस यात्रा की व्यवस्था किया था। उन्होंने बताया कि ओडिशा का कंधमाल जिला 2007 और 2008 में ईसाई विरोधी उत्पीड़न का केंद्र था। कम से कम 100 लोग, ज्यादातर ख्रीस्तीय मारे गए थे और 56,000 से अधिक लोगों को बेघर किया गया था। महीनों तक चले गए तबाही में सैकड़ों गिरजाघर और ख्रीस्तीयों के घर भी नष्ट हो गए थे।

सिस्टर नादुकुदियिल ने कहा कि केरल टीम के सदस्यों ने "गहरे विश्वास का अनुभव" और "कंधमाल लोगों के संघर्षों के साथ एकजुटता व्यक्त करने का अवसर" पाया है।

परिषद ने देश के अन्य हिस्सों से इसी तरह की यात्राओं का आयोजन पहली बार किया था।

सिस्टर नदुकुदियिल ने कहा, "हम चाहते हैं कि कंधमाल के लोग विशेष रूप से महिलाएँ और बच्चे कलीसिया द्वारा उनके ल ए चिंता और  देखभाल का अनुभव करें।"

पिछले अप्रैल, सीबीसीआई परिषद ने कंधमाल की महिलाओं को सिलाई मशीन वितरित किया था।.

सिस्टर नादुकुदियाल के अनुसार, हिंसा के दस साल बाद भी कंधमाल की स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। उन्होंने कहा,"कुछ क्षेत्रों में गिरजाघर और घरों का अभी तक पुनर्निर्माण नहीं किया गया है और बच्चों के स्कूली शिक्षा की बहुत कम गुंजाइश है। युवाओं को अंधकारमय भविष्य का सामना करना पड़ रहा है। महिलाओं को उनके विस्थापन के बाद कोई काम नहीं है। लोगों ने अपनी भूमि समेत अपनी सारी चीज़ें खो दी हैं। वे अब अपने अस्तित्व के लिए जंगलों पर निर्भर करते हैं। कुछ दैनिक मजदूर बन गए हैं। "

काथलिक धर्माध्यक्षीय परिषद के महिला आयोग के अध्यक्ष गुड़गांव के धर्माध्यक्ष जेकब बरनाबास के नेतृत्व में 22 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने 2017 में कंधमाल का दौरा किया और इस क्षेत्र के लोगों की मदद करने का फैसला किया था।

महिला परिषद कार्यक्रमों के तहत कंधमाल में स्वयंसेवकों को वहां के बच्चों को ट्यूशन देने के लिए सहायता देना शामिल हैं। छात्रों की देखभाल करने के लिए शिक्षकों को नियुक्त करने की भी योजना है।

केरल महिला परिषद ने विधवाओं को सिलाई-बुनाई सीखने के लिए 100,000 रुपये दान किए जिससे कि वे अपने बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरी कर सकें।

परिषद ने अंबेडकर नगर, रायकिया शहर में महिलाओं को सिलाई ट्रेनिंग दिलाने के लिए सामुदायिक हॉल बनाने का भी वादा किया।


(Margaret Sumita Minj)

02/07/2018 16:14