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संत पापा फ्राँसिस \ मुलाक़ात

फ्राँस के राष्ट्रपति से संत पापा की मुलाकात

फ्राँस के राष्ट्रपति इम्मानुएल माक्रोन से मुलाकात करते संत पापा - AP

26/06/2018 16:58

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 26 जून 2018 (वाटिकन न्यूज)˸ संत पापा फ्राँसिस ने मंगलवार 26 जून को वाटिकन के प्रेरितिक प्रासाद में फ्राँस के राष्ट्रपति इम्मानुएल माक्रोन से मुलाकात की जिन्होंने बाद में क्रमशः वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पीयेत्रो परोलिन एवं वाटिकन विदेश सचिव महाधर्माध्यक्ष पौल गल्लाघर से भी मुलाकातें कीं।

मंगलवार को जारी वाटिकन प्रेस वक्तव्य में कहा गया कि दोनों के बीच सौहार्दपूर्ण इस मुलाकात में परमधर्मपीठ एवं फ्राँस के द्विपक्षीय अच्छे संबंधों को रेखांकित किया गया तथा देश के सार्वजनिक हित में विभिन्न धर्मों के योगदानों पर गौर किया गया खासकर, कलीसिया के योगदान पर।

वक्तव्य में यह भी बतलाया गया कि मुलाकात के दौरान वैश्विक मुद्दों पर साझा हित पर विचार-विमर्श किया गया, विशेषकर, पर्यावरण सुरक्षा, विस्थापन, संघर्ष रोकथाम एवं समाधान के लिए बहुपक्षीय जुड़ाव, खासकर, निरस्त्रीकरण के संबंध में।

संत पापा एवं फ्राँस के राष्ट्रपति ने वार्तालाप में संघर्ष की स्थिति पर भी गौर किया विशेषकर, मध्यपूर्व एवं अफ्रीका की स्थिति पर।  

अंत में, यूरोपीय परियोजना के दृष्टिकोण पर भी चिंता व्यक्त की गयी।

संत पापा से मुलाकात के उपरांत फ्राँस के राष्ट्रपति इम्मानुएल माक्रोन दोपहर 2.30 बजे रोम स्थित संत जोन लातेरन महागिरजाघर पहुँचे जहाँ उन्हें लातेरन अध्याय के प्रोटोकानोनिको सम्मान से सम्मानित किया गया।

सम्मान समारोह के दौरान लातेरन में उनका स्वागत वहाँ के विकर महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल अंजेलो दे दोनातिस एवं महागिरजाघर के अन्य सदस्यों ने की।

सम्मान समारोह की शुरूआत कार्डिनल अंजेलो दे दोनातिस के अभिवादन द्वारा हुई। इसके बाद प्रार्थना की गयी एवं बाईबिल से पाठ पढ़ा गया। प्रार्थना के उपरांत राष्ट्रपति माक्रोन ने लातेरन महागिरजाघर के कोलोन्ना प्रार्थनालय में "कैनोनिकल आसन" का अधिकार स्वीकार करने के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किया।

इस अवसर पर रोम में धर्मप्रांतीय करीतास निदेशक एवं अध्याय के चैम्बरलेन मोनसिन्योर एनरिको फेरोची द्वारा उन्हें महागिरजाघर के क्रूस की एक प्रति भेंट की गयी। उसके बाद राष्ट्रपति को महागिरजाघर के आंतरिक भाग का दर्शन कराया गया जहाँ हेनरी चतुर्थ की प्रतीमा स्थापित है जिन्हें प्रोटो कैनोनिको का प्रथम सम्मान प्रदान किया गया था।


(Usha Tirkey)

26/06/2018 16:58