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संत पापा फ्राँसिस \ मुलाक़ात

काथलिक शिक्षा विश्व को आत्मा प्रदान करती है, संत पापा फ्राँसिस

संत पापा फ्राँसिस - REUTERS

25/06/2018 16:32

वाटिकन सिटी, सोमवार 25 जून 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने सोमवार 25 जून को वाटिकन के कार्डिनल मंडल भवन में ‘ग्रेविसिम एजुकेशन फाउंडेशन’ द्वारा आयोजित "शिक्षा द्वारा परिवर्तन लाना" सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रतिभागियों से मुलाकात की।

संत पापा ने कार्डिनल वरसाल्दी को उनके स्वागत भाषण के लिए धन्यवाद दिया और उनके व्यक्तिगत और व्यावसायिक गतिविधियों से संबंधित विभिन्न क्षेत्रों में अनुभवों की समृद्धि लाने हेतु सभी प्रतिभागियों के प्रति अपना आभार प्रकट किया।

संत पापा फ्राँसिस ने कहा,“ जैसा कि आप जानते हैं मैंने काथलिक शिक्षा के धर्मसंध के अनुरोध पर, द्विताय वाटिकन सभा की ग्रेविसिम एजुकेशन घोषणा की पचासवीं सालगिरह पर 28 अक्टूबर 2015 को इस फाउंडेशन की स्थापना की थी। यह फाउंडेशन,  हमारे समय के ऐतिहासिक परिवर्तनों के साथ काथालिक शिक्षा के प्रति अपनी वचनबद्धता को नवीनीकृत करता है।

संत पापा ने कहा कि केवल शिक्षा में परिवर्तन कर हम दुनिया को बदल सकते हैं और इसके लिए संत पापा ने कुछ सुझाव दिया।

सबसे पहला "नेटवर्क" बहुत महत्वपूर्ण है। नेटवर्किंग का मतलब है कि शिक्षा और शोध में सुधार के लिए स्कूलों और विश्वविद्यालयों को एकजुट करना, बौद्धिक और सांस्कृतिक स्तरों पर अधिक प्रभावशीलता के लिए हर किसी के ज्ञान को विकसित करना।

वेरितातिस गौदियुम (सीएफ न. 4 सी) द्वारा अनुशंसित एक अनुशासनिक और अंतर- अनुशासनात्मक दृष्टिकोण के साथ जटिल चुनौतियों का सामना करने के लिए नेटवर्किंग का अर्थ ज्ञान, विज्ञान और अध्ययन के क्षेत्रों की विभिन्न शाखाओं को एकजुट करना है।

 आज हमारा मानव परिवार वैश्विक चुनौतियां का सामना कर रहा है । काथलिक शिक्षा का व्यापक दृष्टिकोण बुद्धि विकसित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि दूरस्थ वास्तविकताओं को गले लगाने में सक्षम है। यह भी मानता है कि मानव जाति की नैतिक जिम्मेदारी आज अंतरिक्ष के माध्यम से नहीं बल्कि समय के माध्यम से भी बढ़ती है और वर्तमान विकल्पों में भविष्य की पीढ़ियों पर असर पड़ता है।

संत पापा ने दूसरा सुझाव देते हुए कहा कि शिक्षा का सामना करने वाली एक और चुनौती जिसे उन्होंने अपने प्रेरितिक उदबोधन इवांजेलि गौडियम में लिखा है : "हमें आशा द्वारा खुद का ह्रास करने की इजाजत नहीं देनी चाहिए!" (न. 86)। इस अपील के साथ, मैं यह कहना चाहता हूँ कि हमारे समय के पुरुषों और महिलाओं को सामाजिक परिवर्तन का सामना करने के लिए खुद को वास्तविकता में डाल सकें जो ख्रीस्तीय मुक्ति विधान की प्रतिज्ञा से उत्पन्न होती है।

हम आज की वैश्विक दुनिया में आशा प्रदान करने के लिए बुलाये गये है। "वैश्वीकरण की उम्मीद" और "वैश्वीकरण की उम्मीदों का समर्थन करना" काथलिक शिक्षा के मिशन का मौलिक कार्य है, जैसा कि काथलिक शिक्षा के लिए धर्मसंध के हाल ही के दस्तावेज ‘भाईचारा मानवता को शिक्षित करता है,’ में कहा गया है (सीएफ, न. 18-19)। आशा या दृष्टि का वैश्वीकरण बेकार आर्थिक हितों द्वारा आसानी से प्रतिबंधित किया जा सकता है और जो आसानी से सामाजिक तनाव, आर्थिक संघर्ष और शक्ति के दुरुपयोग को जन्म देता है,उसे अक्सर आम भलाई की सही समझ से दूर किया जाता है। हमें एक बौद्धिक और नैतिक प्रशिक्षण के माध्यम से दुनिया को आत्मा देने की जरूरत है जो वैश्वीकरण की अच्छी चीजों का समर्थन करता है।

अगला सुझाव देते हुए संत पापा ने कहा, “आप काम, अभिनव शैक्षिक परियोजनाओं को प्रभावी बनाने के लिए तीन आवश्यक मानदंडों पहचान, गुणवत्ता और सामूहिक भलाई का सम्मान करना चाहिए। यह विद्यालयों, विश्वविद्यालयों और शोध केन्द्रों के मिशन के साथ निरंतरता की मांग करता है जो कलीसिया और सभी के लिए खुली रहती है। ख्रीस्तीय सभ्यता और कलीसिया के सुसमाचार प्रचार के मिशन के लिए ये मूल्य आवश्यक हैं। इस तरह, आप आज की समस्याओं का उत्तर देने के लिए, उन तरीकों को इंगित कर सकते हैं, जो सबसे ज़्यादा ज़रूरतमंदों के लिए अधिमान्य है।

संत पापा ने फाउंडेशन के मिश्न को जारी रखने हेतु प्रोत्साहन दिया तथा उनके तथा सभी सहयोगियों के परिवारों के सदस्यों पर ईश्वर की भरपूर आशीष की कामना की।


(Margaret Sumita Minj)

25/06/2018 16:32