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संत पापा फ्राँसिस \ प्रेरितिक यात्रा

संत पापा की जेनेवा यात्रा की पृष्ठभूमि

संत पापा की जेनेवा यात्रा का प्रतीक चिन्ह - REUTERS

21/06/2018 15:50

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 21 जून 2018 (रेई)˸ काथलिक कलीसिया के परमधर्म गुरू संत पापा फ्राँसिस, आज, 21 जून को ख्रीस्तीय एकतावर्धक तीर्थयात्रा हेतु स्वीटजरलैंड की एक दिवसीय यात्रा पर हैं। इटली के बाहर यह उनकी 23वीं प्रेरितिक यात्रा है।

स्वीटजरलैंड की यात्रा करने वाले वे तीसरे संत पापा हैं। इससे पूर्व संत पापा पौल षष्ठम ने 1969 में एवं संत पापा जॉन पौल द्वितीय ने 1984 में इसकी यात्रा की थी।

स्वीटजरलैंड के एक प्रमुख शहर जेनेवा में संत पापा फ्राँसिस की यात्रा का मुख्य उद्देश्य है, ख्रीस्तीय एकता को मजबूती प्रदान करना। उनकी यात्रा कलीसियाओं की विश्व परिषद की स्थापना की 70वीं वर्षगाँठ के अवसर पर आयोजित की गयी है।

जेनेवा में संत पापा के मुख्य तीन कार्यक्रम हैं, ख्रीस्तीय एकता प्रार्थना में भाग लेना, कलीसिया के विश्व परिषद के सदस्यों से मुलाकात एवं पालेस्कपो में ख्रीस्तयाग का अनुष्ठान। 

उम्मीद की जा रही है कि विभिन्न कलीसियाओं की विश्व परिषद द्वारा आयोजित समारोह में उनकी उपस्थिति, उस प्रकाश को तेज करेगी जिसको उन्होंने ख्रीस्तीय एकतावर्धक मेज को पहले ही प्रदान किया है तथा यह अधिक काथलिकों एवं गैर काथलिकों को ख्रीस्तीयों के दृश्यमान एकता की ओर यात्रा जारी रखने के महत्व पर यकीन दिलायेगी। यह कलीसिया की पूर्ण सहभागिता को भी दर्शायेगी।  

कलीसियाओं की विश्व परिषद (डब्ल्यू सी सी) 345 कलीसियाओं का एक ऐसा परिषद है। इसकी स्थापना 23 अगस्त सन् 1948 ई. में हुई है जिसके सदस्य विश्व के 110 देशों में पाये जाते हैं।

कलीसियाओं की विश्व परिषद का सम्मेलन 15 से 21 जून तक आयोजित किया गया है जिसमें समिति के 150 सदस्य एवं 200 अतिथि उपस्थित हैं। उन अतिथियों में दक्षिण एवं उत्तर कोरिया के भी प्रतिनिधि भी शामिल हैं। उत्तर तथा दक्षिण कोरिया के साथ कलीसियाओं की विश्व परिषद का अच्छा संबंध 1984 से ही है यही कारण है कि उत्तर कोरिया के ख्रीस्तीयों को भी निमंत्रित किया गया है।

जेनेवा में संत पापा की यात्रा के दौरान शांति विषयवस्तु का विशेष महत्व है क्योंकि यह डब्ल्यू सीसी के संविधान का हिस्सा है। परिषद का उद्देश्य है ख्रीस्तीयों के बीच एकता को बढ़ावा देना किन्तु यह न्याय एवं शांति को भी प्रोत्साहन देता है। डब्ल्यू सी सी की संचार की निदेशिका मरियाने एजदेस्तेन ने वाटिकन न्यूज से कहा, "जैसा कि हम जानते हैं कि न्याय के अभाव में हम शांति प्राप्त नहीं कर सकते। ये दोनों एक-दूसरे से जुड़े हैं। यही कारण है कि विश्व एवं कोरियाई प्रायद्वीप में न्याय एवं शांति को बढ़ाने के क्षेत्र में हमारी कई योजनाएँ हैं।" उन्होंने बतलाया कि शांति हेतु दक्षिण सूडान एवं मध्यपूर्व देशों में भी उनकी योजनाएं हैं।    

ख्रीस्तीय एकता को प्रोत्साहन देने हेतु गठित परमधर्मपीठीय परिषद के सदस्य डॉ. अंद्रेयाज क्रोनोमानस्की ने बतलाया कि संत पापा की जेनेवा यात्रा में शरणार्थी विषय पर भी ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा, "जेनेवा में संत पापा की यात्रा के दौरान कलीसियाओं द्वारा शरणार्थियों की सहायता पर भी विचार किया जाएगा।" डब्ल्यू सी सी की 345 सदस्य कलीसियाओं में से अधिकतर अफ्रीकी एवं एशियाई देशों के शरणार्थी हैं जो काथलिक, ऑर्थोडॉक्स एवं लूथेरन कलीसियाओं के गढ़ यूरोप की ओर बढ़ते हैं।  

उन्होंने कहा, यह विषय "न्याय और शांति की तीर्थयात्रा" परियोजना में भाग लेने वाली कलीसियाओं की विश्व परिषद के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।"

डब्ल्यू सीसी के महासचिव डॉ. ओलाव फैकसे त्वेइत ने कहा कि कलीसियाओं की विश्व परिषद की स्थापना की 70वीं वर्षगाँठ पर संत पापा की यह यात्रा, ख्रीस्तीय एकता तथा विश्व में न्याय एवं शांति की खोज पर कलीसियाओं के बीच सहयोग हेतु एक ऐसिहासिक मील का पत्थर है।"


(Usha Tirkey)

21/06/2018 15:50