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बाढ़ राहत कार्य में कलीसिया की सहभागिता

पानी में डूबा असम कीा मोरेगांव - REUTERS

20/06/2018 15:02

नई दिल्ली, बुधवार 20 जून 2018 (उकान) : पूर्वोत्तर भारत में बाढ़ और भूस्खलन से पिछले हफ्ते कम से कम 23 लोगों के मरने का दावा करने के बाद हजारों लोगों को कलीसिया की एजेंसियों से सहायता मिल रही हैं।

सबसे खराब प्रभावित गांव असम, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा राज्यों में हैं, जहां मानसून बारिश के चलते बाढ़ के पानी में कई घर गिर गये और खेतों की फसल पानी में डूब गई है। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन ने सड़कों को काट दिया है, जबकि नदियों का पानी खतरे के स्तर से उपर बह रही हैं, जिससे सैकड़ों गांव पानी में डूब गये हैं।

मिजोरम में ऐजोल धर्मप्रांत के समाज सेवा संस्थान के निदेशक फादर लॉरेंस केनेडी ने कहा, "स्थिति बहुत गंभीर है क्योंकि हम भूस्खलन के कारण प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में सक्षम नहीं हैं।"

फादर लॉरेंस ने 19 जून को उका समाचार को बताया कि बारिश दो दिनों तक रुक गई थी। कलीसिया के अधिकारी और स्वयंसेवक पैदल गांवों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि ज्यादातर सड़कें खराब हालत में हैं और वाहनों के आवागमन की अनुमति नहीं है।

अधिकारियों का हवाला देते हुए मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि चार राज्यों में बाढ़ से संबंधित दुर्घटनाओं में कम से कम 23 लोग मारे गए हैं, जहां लगभग 500 राहत शिविरों में लगभग 500,000 लोग रह रहे हैं। कम से कम 700 गांव पानी के नीचे हैं।

असम राज्य आपदा प्राधिकरण प्रबंधक ने कहा कि राज्य में कम से कम 448,000 लोग प्रभावित हुए हैं, जहां ब्रह्मपुत्र नदी का पानी कुछ स्थानों पर खतरे के निशान से उपर बह रहा है। असम में 213 राहत शिविर हैं।

त्रिपुरा के आपदा प्रबंधन नियंत्रण केंद्र ने कहा कि 200 राहत शिविरों में 6,500 परिवारों के करीब 15,000 लोग हैं।

फादर केनेडी ने कहा कि कलीसिया के स्वयंसेवक चिकित्सा सहायता प्रदान कर रहे हैं जबकि अर्धसैनिक बल  फंसे लोगों को बचाने में लगे हुए हैं।

कारितास इंडिया में आपदा प्रबंधन अधिकारी प्रियंका समंथा पिंटो ने उका समाचार को बताया कि  साफ पानी और स्वच्छता सुविधाओं की सबसे ज्यादा कमी है क्योंकि हाथ पंप और कुएं सब पानी में डूबे हैं।

उन्होंने कहा कि जल स्रोत दूषित हो गए हैं और सुरक्षित पेयजल के स्रोतों का उपयोग करना मुश्किल है।

पिंटो ने कहा, "प्रभावित समुदायों का स्वास्थ्य गंभीर खतरे में है क्योंकि बाढ़ के चलते दस्त, बुखार और त्वचा में संक्रमण के कुछ मामले सामने आए हैं।"

त्रिपुरा में, कारितास सात गांवों में भोजन, कपड़े, बर्तन, पेयजल और स्वच्छता वस्तुओं को उपलब्ध करा रहा है।

मणिपुर में इम्फाल के महाधर्माध्यक्ष डोमिनिक लुमन ने कहा कि उनके क्षेत्र में स्थिति नियंत्रण में है और पल्लियाँ प्रभावित लोगों की देखभाल कर रही हैं।

"चूंकि पल्लियाँ स्थिति को संभालने में सक्षम हैं, इसलिए हम धर्मप्रांत स्तर पर प्रक्रिया में शामिल नहीं हैं, लेकिन हम मदद करने के लिए तैयार हैं।"

असम राज्य में गुवाहाटी महाधर्मप्रांत में महाधर्माध्यक्ष जॉन मुलाचाइरा ने उका समाचार को बताया कि सरकार अपना काम बखूबी से कर रही है लेकिन आवश्यक होने पर कलीसिया भी मदद करने के लिए तैयार है।


(Margaret Sumita Minj)

20/06/2018 15:02