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सिंगापुर शिखर सम्मेलन वास्तव में ऐतिहासिक, प्रेरितिक राजदूत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उत्तरी कोरिया के नेता किम जोंग यून 12 जून, 2018 को सिंगापुर के कैपेला होटल में अपने शिखर सम्मेलन के दौरान दोपहर के भोजन के पहले एक साथ घूमते हुए। - REUTERS

13/06/2018 15:48

सेयोल, बुधवार 13 जून 2018 (वीआर,रेई) : कोरिया के प्रेरितिक राजदूत महाधर्माध्यक्ष अल्फ्रेड जुएरेब ने  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उत्तरी कोरियाई नेता किम जोंग-अन के बीच शिखर सम्मेलन के नतीजे पर टिप्पणी की।

कोरिया और मंगोलिया के प्रेरितिक राजदूत महाधर्माध्यक्ष अल्फ्रेड जुएरेब ने अमेरिका और उत्तरी कोरिया के नेताओं के बीच मंगलवार के "ऐतिहासिक" शिखर सम्मेलन की सराहना करते हुए कहा कि कलीसिया में "आशा और आत्मविश्वास" है लेकिन चेतावनी है कि हम लंबी प्रक्रिया की शुरुआत में हैं।

लंबी और कठिन मार्ग

वाटिकन न्यूज़ के साथ एक साक्षात्कार में सियोल से बात करते हुए महाधर्माध्यक्ष जुएरेब ने कहा कि कोरियाई लोग और स्थानीय कलीसिया उत्सुकतापूर्वक "इन सचमुच ऐतिहासिक घटनाओं" का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उत्तरी कोरियाई नेता किम जोंग-अन के बीच शिखर सम्मेलन को शांति को ओर "एक लंबी और कठिन मार्ग की शुरुआत में एक महत्वपूर्ण पृष्ठ को चिह्नित करना" कहा। महाधर्माध्यक्ष जुएरेब ने कहा, "हम आशावादी हैं क्योंकि यह शुरुआत बहुत सकारात्मक थी, बहुत अच्छी थी" और हम "आग और क्रोध" और "उत्तरी कोरिया का पूर्ण विनाश" जैसे शब्दों के उलझन से उपर उठकर शांति की ओर आगे बढ़ रहे हैं।

शांति के लिए नोवेना

 महाधर्माध्यक्ष जुएरेब ने कहा कि कोरिया की कलीसिया ने इन घटनाओं को "महान विश्वास के साथ" लिया है। सियोल में काथलिक महागिरजाघर में हर मंगलवार को शांति और सुलह के लिए विशेष प्रार्थनाएं आयोजित की जा रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कोरिया के काथलिक धर्माध्यक्षों ने कोरियाई प्रायद्वीप पर शांति, सुलह और एकता के लिए प्रार्थना करने के लिए 17 से 25 जून तक एक नोवेना का प्रस्ताव दिया है।

महाधर्माध्यक्ष जुएरेब ने कहा कि इस ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन और इसके द्वारा मेलमिलाप के उपयुक्त वातावरण में कलीसिया उत्तर कोरिया के सुसमाचार प्रचार के लिए प्रार्थना करती है।

उन्होंने कहा, "परमधर्मपीठ बातचीत और सुलह के पक्ष में किसी भी पहल के लिए अपना समर्थन देने की इच्छा रखती है ताकि येसु मसीह के सुसमाचार को उत्तर कोरिया में लाया जा सके।"


(Margaret Sumita Minj)

13/06/2018 15:48