Social:

RSS:

रेडियो वाटिकन

विश्व के साथ संवाद करती संत पापा एवं कलीसिया की आवाज़

अन्य भाषाओं:

वाटिकन \ घटनायें

बच्चों से अपने पहले शिक्षकों को याद रखने का आग्रह

संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 9 जून को 500 से अधिक स्कूली बच्चों से मुलाकात की। - REUTERS

11/06/2018 15:23

वाटिकन सिटी, सोमवार 11 जून 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 9 जून को 500 से अधिक स्कूली बच्चों से मुलाकात की जो मिलान और रोम के उपनगरों से "ट्रेनो देई बाम्बिनी" (बच्चों की ट्रेन) में आए थे।

"पहले शिक्षकों को कभी न भूलें, स्कूल को कभी न भूलें, क्योंकि वे आपकी संस्कृति की जड़ों हैं। और अपने शिक्षकों और स्कूलों को याद रखने से आपको जीवन में सफलता हासिल करने में मदद मिलेगी।"

संत पापा फ्रांसिस ने रोम और मिलान के उपनगरों से आये विभिन्न धर्मों के 500 से अधिक बच्चों को शनिवार को उपदेश दिया, जो इतालवी "ट्रेनो देई बाम्बिनी"अर्थात "बच्चों की ट्रेन" नामक एक पहल में उनसे मिलने आए थे। ।

"ट्रेनो देई बाम्बिनी"

संस्कृति हेतु गठित परमधर्मपीठीय समिति दवारा इतालवी रेलवे के सहयोग से "ट्रेनो देई बाम्बिनी" का आयोजन किया गया था। इसमें काथलिक, ओर्थोडोक्स, मुस्लिम, बौद्ध, अन्य धर्मों के और कोई भी धर्म न मानने वाले बच्चे भी शामिल थे। इस साल "ट्रेनो देई बाम्बिनी" का 6 वां संस्करण का विषय "फ्रेंडली सिटी" है, जिसका उद्देश्य उन शहरों के उन उपनगरों का पुनर्विकास करना है जहां बच्चों को बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

इतालवी रेलवे के लाल टोपी और सफेद टी-शर्टों पहने हुए संत पापा से मुलाकात करने पहुँचे बच्चे वहुत ही आकर्षक लग रहे थे। संत पापा ने बच्चों के लिए कोई भाषण तैयार नहीं किया था पर बच्चों द्वारा पूछे सवालों का जवाब दिया।

बच्चों द्वारा अपने स्कूल और शिक्षकों के बारे बूछे जाने पर  संत पापा ने अपने प्रारंभिक शिक्षकों को याद की  विशेष रूप से स्टेला को याद किया, जिन्होंने उसे पहले और तीसरे क्लास में पढ़ाया था। संत पापा ने कहा कि वे शुरु से ही उसके साथ संपर्क बनाये रखे थे। बाद में जब वे धर्माध्यक्ष थे तो भी उसकी बीमारी में और 94 वर्ष की उम्र में उसकी मृत्यु तक उसकी सहायता की थी।

संत पापा फ्राँसिस ने बच्चों द्वारा दिये गए उपहारों की बहुत सराहना की और कहा, "यह महत्वपूर्ण है क्योंकि आपने इसे बनाने में अपने हाथ, अपने दिल और अपने दिमाग का इस्तेमाल किया है।" "और जब बुद्धि,दिल और हाथों से जो कुछ बनाया जाता है वह मनुष्य का अपना और विशेष होता है।

एक बार पुनः संत पापा ने उन्हें अपने स्कूल और अपने पहले शिक्षकों को न भूलने के महत्व की याद दिलाई,जो हमेशा उनकी जड़ों को बनाए रखकर जीवन को सफल बनाने में मदद करेगी।


(Margaret Sumita Minj)

11/06/2018 15:23