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तमिलनाडु धर्माध्यक्षों द्वारा सरकार से गरीबों पर ध्यान देने हेतु आग्रह

वेदांत लिमिटेड की सहायक कंपनी स्टरलाइट इंडस्ट्रीज के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए कार्यकर्ता - AP

11/06/2018 15:00

ऊटी, सोमवार 11 जून 2018 (मैटर्स इंडिया) : तमिलनाडु धर्माध्यक्षीय सम्मेलन (टीएनबीसी) ने सरकार से दक्षिणी भारतीय राज्य में वंचित पारंपरिक व्यावसायिक समूहों की समस्याओं पर ध्यान देने का आग्रह किया है।

टीएनबीसी के सहयोग से श्रमिकों के सीबीसीआई कार्यालय द्वारा 7 और 8 जून को संत थिओदोर सेंटोरियम, कूनूर, ऊटी में आयोजित एक सेमिनार में इस प्रसंग पर बात उठाई गई थी।

नौ काथलिक धर्मप्रांत के 35 से अधिक प्रतिनिधियों और श्रमिकों के लिए काम कर रहे कुछ आंदोलनों ने बड़े पैमाने पर तमिलनाडु के असंगठित श्रमिकों के मुद्दों और चुनौतियों पर चर्चा की।

टीएनबीसी क्षेत्रीय श्रम आयोग के अध्यक्ष, पांडिचेरी और कुड्डालोर के महाधर्माध्यक्ष अंतोनी आनंदाराय ने प्रतिभागियों को गरीब श्रमिकों के पक्ष में रहने और उन्हें उनके लिए आवंटित सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ उठाने, श्रमिकों का सम्मान करने और उन्हें गरिमा देने में मदद के लिए प्रोत्साहित किया।

उन्होंने याद दिलाया कि महिलाओं के खिलाफ यौन उत्पीड़न पर कानून को उन सभी कलीसिया संस्थानों में लागू किया जाना चाहिए।

महाधर्माध्यक्ष ने थूथुकुडी में स्टरलाइट कॉपर कारखाने में गरीब मजदूरों पर पुलिस अधिकारियों के असभ्य और अमानवीय व्यवहार की निंदा की। उन्होंने प्रतिभागियों के साथ थूथुकुडी (तुतीकोरिन) में पुलिस हमले के पीड़ितों के लिए दो मिनट का मौन प्रार्थना किया।

सम्मेलन में प्रवासियों और शरणार्थियों के मुद्दों पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने तमिलनाडु के प्रमुख मुद्दों जैसे प्रवासन, असंगठित मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा; राजनीतिक शोषण और ट्रेड यूनियन बनाने की जरूरत आदि पर चर्चा की।

सेमिनार ने प्रतिभागियों को असंगठित श्रमिकों के बीच जागरूकता लाने की दिशा में कदम उठाने में मदद की। तमिलनाडु में असंगठित श्रमिकों को व्यवस्थित करना बहुत जरूरी है।

प्रतिभागियों ने कार्यवाही की एक योजना भी तैयार की जिसमें निदेशकों और कोर टीम के सदस्यों की संवेदनशीलता, आंतरिक संघर्ष और मतभेदों को भंग करना, मानवतावादी चिंताओं के लिए आवाज, सरकारी योजनाओं और सामाजिक सुरक्षा पर ध्यान देना आदि शामिल है।

धर्मप्रांत बचाव, राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए उठाए गए कदमों को लागू करेंगी। सभी वक्ताओं ने संत पापा लियो के 1891 के ऐतिहासिक सामाजिक विश्वपत्र, ‘रेरुम नोवरम’ 'पूंजी और श्रम पर' काथालिक कलीसिया के सामाजिक शिक्षण पर जोर दिया और आज भी कलीसिया के पास व्यापार एवं कार्यकर्ताओं के अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में बहुत कुछ कहना है ।


(Margaret Sumita Minj)

11/06/2018 15:00