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संत पापा फ्राँसिस \ अंजेलुस व संदेश

ईर्ष्या, मिथ्या आरोप हेतु प्रेरित करता है, संत पापा

देवदूत प्रार्थना के उपरांत आशीर्वाद देते संत पापा

11/06/2018 13:47

वाटिकन सिटी, सोमवार, 11 जून 2018 (रेई)˸ वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 10 जून को, संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया देवदूत प्रार्थना का पूर्व उन्होंने विश्वासियों के सम्बोधित कर कहा, अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।

"इस रविवार का सुसमाचार पाठ (मार. 3,20-35) दो तरह की गलतफहमियों को प्रस्तुत करता है जिनका सामना येसु को करना पड़ा, शास्त्रीयों एवं अपने ही परिवार वालों से।

पहली गलतफहमी- शास्त्रियों ने पवित्र धर्मग्रंथ का अध्ययन किया था और वे उसकी व्याख्या हेतु नियुक्त किये गये थे। उन में से कुछ येरूसालेम से गलीलिया भेजे गये थे, जहाँ से येसु की प्रसिद्धि फैल रही थी। वे लोगों की आंखों में उन्हें बदनाम करने के लिए, बकवादियों का दल बनाने, दूसरे को बदनाम करने, अधिकार को हटाने का काम करने लगे, जो अत्यन्त खराब बात थी। वे इसी काम के लिए भेजे गये थे और वे एक खास एवं खतरनाक आरोप के साथ वहाँ पहुँचे, ''उसे बेलजेबुल सिद्ध है'' और ''वह नरकदूतों के नायक की सहायता से नरकदूतों को निकालता है''। (पद.22) अर्थात् वे कहना चाहते थे कि नरकदूतों के नायक ने उन्हें भेजा है जो यह कहने के समान था कि वे भूतग्रस्त हैं। येसु रोगियों को चंगा कर रहे थे जबकि वे लोगों को यह विश्वास कराना चाहते थे कि येसु ईश्वर की आत्मा से ऐसा नहीं कर रहे थे। वे बोलना चाह रहे थे कि येसु जो कर रहे थे वह बुराई के प्रभाव और शैतान की शक्ति से कर रहे थे। येसु इसका दृढ़ और स्पष्ट शब्दों में खंडन करते हैं क्योंकि शास्त्री शायद बिना जाने, ईश्वर के प्रेम को इनकार करने और ईश निंदा करने के गंभीर पाप में गिर रहे थे, जो इस समय येसु के कार्यों में व्याप्त था। ईश निंदा पवित्र आत्मा के विरूद्ध पाप है जो एकमात्र अक्षम्य पाप है जैसा कि येसु कहते हैं क्योंकि यह एक बंद हृदय के रूप में  येसु के कार्यों में प्रकट ईश्वर की करूणा के लिए द्वार नहीं खोलता। लेकिन इस घटना में एक चेतावनी है जो हम सभी के लिए लाभदायक हो सकती है। वास्तव में, कई बार ऐसा होता है कि भलाई के बदले एक प्रबल ईर्ष्या के कारण और किसी व्यक्ति के अच्छे कार्यों के लिए, उसपर झूठा आरोप लगाया जाता है, यहाँ एक असली घातक जहर है जो पूर्व नियोजित तरीके से, एक-दूसरे की प्रतिष्ठा को नष्ट करना चाहता है।

संत पापा ने कहा कि ईश्वर हमें इस खतरनाक प्रलोभन से मुक्त करे। यदि हम अपने अंतःकरण की जांच करते हैं और महसूस करते हैं कि यह बुरा घास हमारे अंदर उग रहा है तब उसके बढ़ने एवं दुष्ट प्रभाव डालने से पहले ही हम पापस्वीकार करने जाएँ क्योंकि यह लाइलाज है। संत पापा ने कहा कि इससे सावधान रहें, क्योंकि यह परिवारों, मित्रों, समुदायों और यहां तक कि समाज को भी नष्ट कर सकता है।

संत पापा ने दूसरी गलतफहमी के बारे बतलाते हुए कहा, आज का सुसमाचार पाठ एक-दूसरी प्रकार की गलतफहमी को भी प्रकट करता है, येसु के रिश्तेदार जो उनसे भिन्न सोच रखते थे। वे चिंतित थे क्योंकि उनके लिए येसु का जीवन एक पागलपन के समान था। (पद.21) वास्तव में, वे लोगों के लिए इतने उदार थे, सबसे बढ़कर बीमारों एवं पापियों के लिए कि उनके पास खाने-पीने का भी समय नहीं था। येसु ऐसे ही थे, उनके लिए लोगों की सेवा करने, उनकी मदद करने, उन्हें शिक्षा देने एवं बीमारों को चंगा करने के द्वारा उन्हें प्राथमिकता देना सबसे बढ़कर था। अतः उनके परिवार वालों ने उन्हें नाजरेथ में अपना घर ले जाने का निश्चय किया। वे उस स्थान पर आये जहाँ येसु शिक्षा दे रहे थे और उन्होंने उन्हें बुला भेजा। लोग उनके पास गये और उन्होंने उन से कहा, ''देखिए, आपकी माता और आपके भाई-बहनें, बाहर हैं। वे आप को खोज रहे हैं।''

ईसा ने उत्तर दिया, 'कौन है मेरी माता, कौन हैं मेरे भाई?'' उन्होंने अपने चारों ओर बैठे हुए लोगों पर दृष्टि दौड़ायी और कहा, ''ये हैं मेरी माता और मेरे भाई। जो ईश्वर की इच्छा पूरी करता है, वही है मेरा भाई, मेरी बहन और मेरी माता।''(पद.33-34)

इस प्रकार, येसु ने एक नये परिवार का निर्माण किया, जो प्रकृति पर नहीं किन्तु उनके विश्वास और प्रेम पर आधारित थी जो उनके प्रेम में पवित्र आत्मा द्वारा हमें एकता के सूत्र में बांध देता है।   

जो लोग येसु की शिक्षा को स्वीकार करते हैं वे ईश्वर के पुत्र-पुत्रियाँ हैं और आपस में भाई-बहन। येसु के वचनों को स्वीकार करना, हमें येसु के परिवार में आपस में भाई- बहन बनाता है। इसके विपरीत जब हम दूसरों की निंदा करते और उनके सम्मान को ठेस पहुँचाते हैं तब हम शैतान के परिवार के सदस्य बन जाते हैं।

संत पापा ने यहाँ स्पष्ट किया कि येसु का यह उत्तर उनकी माता एवं परिवार का अपमान नहीं था। निश्चय ही, मरियम के लिए यह एक बड़ी पहचान थी क्योंकि वे एक पूर्ण शिष्य थीं जिन्होंने ईश्वर की इच्छा को सब कुछ में पूरा किया था। संत पापा ने प्रार्थना की कि कुँवारी मरियम हमें येसु के साथ जीने, उनमें तथा कलीसिया में क्रियाशील पवित्र आत्मा के कार्यों को पहचानने तथा विश्व को नये जीवन में नवीकृत करने में मदद करे।

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

देवदूत प्रार्थना के उपरांत संत पापा ने कोरिया की याद करते हुए उनके लिए प्रार्थना की अपील की कि सिंगापुर में जो वार्ता होने वाली है उसके द्वारा सकारात्मक पथ को बल मिले ताकि कोरियाई प्रायद्वीप एवं विश्व का भविष्य शांतिमय हो सके। उन्होंने इस मतलब के लिए विश्वासियों के साथ प्राणाम मरियम प्रार्थना का पाठ किया।

इसके उपरांत उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कि आज फ्राँस के अगेन में निष्कलंक गर्भागमन की धर्मबहन मेरी की धन्य घोषणा हुई जो 18वीं एवं 19वीं शताब्दी के बीच रहीं। उन्होंने निष्कलंक मरियम की पुत्रियों के धर्मसंघ की स्थापना की जो मरियानिष्ठ कहलाता है। हम उनके इस पुत्री के लिए प्रभु की स्तुति करते हैं। जिन्होंने उनके लिए तथा भाई-बहनों की सेवा के लिए अपना जीवन अर्पित किया।   

तदुपरांत संत पापा ने देश-विदेश से एकत्रित सभी तीर्थयात्रियों एवं पर्यटकों का अभिवादन किया। उन्होंने कहा, "मैं रोम तथा विभिन्न जगहों से आये तीर्थ यात्रियों का अभिवादन करता हूँ जो पल्ली दलों, परिवारों और संगठनों के सदस्य हैं। खासकर, मैं उन विश्वासियों का अभिवादन करता हूँ जो स्पेन के मुर्चा, पम्पलोना और लोग्रोनो एवं इटली के नेपल्स से आये हैं, मेस्त्रीनों एवं लेगन्यो के पर्वत आरोही दल।"

अंत में संत पापा ने प्रार्थना का आग्रह करते हुए सभी को शुभ रविवार की मंगल- कामनाएँ अर्पित की।


(Usha Tirkey)

11/06/2018 13:47