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संत पापा फ्राँसिस \ मिस्सा व प्रवचन

ख्रीस्त के पावन शरीर एवं रक्त महापर्व संत पापा का प्रवचन

पवित्र संस्कार की आशीष देते संत पापा - AP

04/06/2018 14:02

रोम, सोमवार, 4 जून 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने रविवार 3 जून को ख्रीस्त के पावन शरीर एवं रक्त महापर्व पर ऑस्तिया के संत मोनिका गिरजाघर में समारोही ख्रीस्तयाग अर्पित किया।  

उन्होंने प्रवचन में सुसमाचार पाठ पर चिंतन करते हुए कहा, "सुसमाचार जिसको हमने सुना, वह पिछली व्यारी का वर्णन करता है जिसमें आश्चर्यजनक रूप से, भोज की अपेक्षा, तैयारी पर अधिक ध्यान दिया गया है। हम "तैयारी" शब्द को बार-बार सुनते हैं। उदाहरण के लिए ''आप क्या चाहते हैं? हम कहाँ जा कर आपके लिए पास्का भोज की तैयारी करें?'' (मार.14:12) येसु उन्हें आवश्यक तैयारी हेतु स्पष्ट निर्देश के साथ भेजते हैं और वे सजा-सजाया बड़ा कमरा पाते हैं। (पद.15) शिष्य तैयारी के लिए चले गये किन्तु प्रभु ने खुद अपनी तैयारी की इत्यादि।  

पुनरूत्थान के बाद कुछ इसी तरह की घटना घटी जब येसु ने शिष्यों को तीसरी बार दर्शन दिया। जब वे मच्छली मार रहे थे येसु ने तट पर उनका इंतजार किया जहां उन्होंने उनके लिए रोटी और मच्छली पकायी। इतना ही नहीं उन्होंने शिष्यों को उन मछलियों में से कुछ ले आने के लिए कहा जिसको उन्होंने अभी-अभी पकड़ा था और जिसको पकड़ने के लिए उन्होंने स्वयं उन्हें सिखाया था। (यो.21:6.9-10) येसु ने तैयारी कर ली थी और वे अपने शिष्यों से सहयोग की मांग करते हैं।

उसी तरह येसु ने पास्का भोज के पहले अपने शिष्यों से कहा था, "मैं तुम्हारे लिए स्थान तैयार करने जाता हूँ जिससे जहाँ मैं हूँ, वहाँ तुम भी रहो।" (यो.14:2.3)

संत पापा ने कहा, "येसु तैयारी करते हैं किन्तु पास्का भोज से पहले उन्होंने एक आह्वान एवं दृष्टांत के साथ अति आवश्यक तैयारी करने एवं हमेशा तैयार रहने की सलाह दी।"

येसु हमारे लिए तैयारी करते एवं हमें भी तैयार रहने को कहते हैं। वे हमारे लिए क्या तैयारी करते हैं? संत पापा ने कहा कि वे हमारे लिए स्थान एवं भोजन तैयार करते हैं। एक ऐसा स्थान जो सुसमाचार में वर्णित सजा-सजाया बड़ा कमरा से अधिक उत्तम है।  

यहाँ इस पृथ्वी पर हमारा यह विशाल एवं बड़ा घर है कलीसिया, जहाँ सभी के लिए कमरा है किन्तु उन्होंने स्वर्ग में भी हमारे लिए स्थान प्रबंध किया है जिससे कि हम उनके साथ और एक-दूसरे के साथ अनन्त काल तक रह सकें। वे स्थान के साथ-साथ भोजन भी तैयार करते हैं, जिसमें वे हमें अपने आपको देते हैं, ''ले लो, यह मेरा शरीर है''।(मार.14:22)

संत पापा ने कहा, "ये दो उपहार स्थान एवं भोजन, ऐसी चीजें हैं जो हमारे जीने के लिए आवश्यक हैं। ये हमारी मौलिक आवश्यकताएँ हैं। यूखरिस्त में हमें ये दोनों प्रदान किये जाते हैं।"  

इस पृथ्वी पर येसु हमारे लिए भोजन तैयार करते हैं क्योंकि यूखरिस्त कलीसिया की धड़कन है। यह उसे जन्म देती और पुनः जन्म देती है। यह सभी को एक साथ लाती एवं बल प्रदान करती है किन्तु युखरिस्त हमारे लिए ऊपर में भी एक स्थान तैयार करती है अनन्त जीवन का स्थान क्योंकि यह स्वर्ग की रोटी है। यह स्वर्ग से आती है यह अनन्त जीवन का रसास्वादन कराती है। यह एक ऐसी रोटी है जो हमारी बड़ी आशा को पूर्ण करती तथा हमारी सबसे अच्छी कामना को पूरा करती है। यह एक शब्द है जिसमें अनन्त जीवन की प्रतिज्ञा है, कोई साधारण प्रतिज्ञा नहीं किन्तु भविष्य में हमारा इंतजार करने वाला ठोस पूर्वानुमान। यूखरिस्त स्वर्गीय भोज हेतु हमारे लिए एक प्रबंध है, यह स्वयं येसु ख्रीस्त है, अनन्त जीवन एवं अनन्त आनन्द की ओर हमारी यात्रा है।  

स्थान एवं पवित्र परमप्रसाद के साथ येसु हमारे लिए एक भोज तैयार करते हैं जो हमें आध्यात्मिक तृप्ति प्रदान करता है। जीवन में हमें लगातार तृप्त किये जाने की आवश्यकता है न केवल भोजन से तृप्त किया जाना किन्तु योजनाओं एवं स्नेह, आशाओं एवं आकाक्षांओं के साथ।

हम प्यार के भूखे हैं किन्तु सबसे सुखद प्रशंसा, सबसे कीमती उपहार तथा सबसे आधुनिक तकनीकी भी उसे तृप्त नहीं कर सकती, ये हमें कभी पूर्ण संतुष्टि प्रदान नहीं कर सकते। यूखरिस्त रोटी के समान एक साधारण भोजन है किन्तु यही एकमात्र भोजन है जो हमें संतुष्ट कर सकती है क्योंकि इससे बड़ा कोई प्रेम नहीं है। हम इसमें सचमुच येसु से मुलाकात करते हैं। हम उनके जीवन में सहभागी होते और उनके प्यार का एहसास करते हैं। हम इसमें महसूस कर सकते हैं कि उनकी मृत्यु और पुनरूत्थान हमारे लिए है और जब हम यूखरिस्त में येसु की आराधना करते हैं हम पवित्र आत्मा को ग्रहण करते तथा शांति और आनन्द का अनुभव करते हैं।

संत पापा ने विश्वासियों का आह्वान करते हुए कहा, "आइये, हम इस जीवन के भोजन का चुनाव करें। हम ख्रीस्तयाग को प्राथमिकता दें। हमारे समुदाय में यूखरिस्त की आराधना करें। तीव्र अभिलाषा के साथ ईश्वर के प्रति भूख की कृपा के लिए प्रार्थना करें ताकि हम उस भोजन को ग्रहण कर सकेंगे जिसको उन्होंने हमारे लिए तैयार किया है।  

जैसा कि येसु ने अपने शिष्यों के साथ किया था आज वे हमसे कहते हैं कि हम तैयारी करें। शिष्यों के समान हम भी प्रभु से पूछें, प्रभु, आप कहाँ चाहते हैं कि हम तैयारी करें? येसु कोई विशेष, चुना हुआ स्थान नहीं चाहते बल्कि वे उस स्थान को देखते हैं जो प्रेम एवं आशा से वंचित है। उन्हीं असुविधा जनक स्थलों में वे जाना चाहते हैं और उसी तरह वे हमें तैयारी करने का आदेश देते हैं।

संत पापा ने आधुनिक समाज पर गौर करते हुए कहा, "कितने लोग ऐसे हैं जिनके पास प्रतिष्ठित घर अथवा खाने के लिए भोजन नहीं है। हम कई लोगों को जानते हैं जो अकेले हैं, परेशान एवं जरूरतमंद हैं वे परित्यक्त संदूक के समान हैं। हम जो अपने ही कमरे एवं घर में येसु को ग्रहण कर सकते हैं हम उन भाई-बहनों के लिए स्थान एवं भोजन तैयार करें जिन्हें इसकी आवश्यकता है। येसु हमारे लिए रोटी के रूप में तोड़े गये और बदले में हमसे भी मांग करते हैं कि हम अपने आपको दूसरों के लिए अर्पित करें, केवल अपने लिए नहीं जीयें किन्तु औरों के लिए जीयें। इस तरह हम यूखरिस्तीय रूप में जीते हुए उस प्रेम को दुनिया को अर्पित करेंगे जिसको हमने प्रभु के पावन शरीर से प्राप्त किया है। यूखरिस्त तभी जीवन में परिवर्तित होता है जब हम अपने आपको अपने आसपास के लोगों के साथ बांटते हैं।

सुसमाचार हमें बतलाता है कि शिष्यों ने तैयारी की जब वे बाहर निकले तथा शहरों में गये। आज प्रभु हमें भी बुलाते हैं कि हम उनके आगमन की तैयारी करें दूरी रखते हुए नहीं किन्तु हमारे शहरों में प्रवेश करते हुए। उन्हीं शहरों में से एक है ऑस्तिया जिसका अर्थ है प्रवेश द्वार। संत पापा ने कहा कि प्रभु यहाँ आप कितने दरवाजों को खोलना चाहते हैं। कितने दीवारों को गिराये जाने की आवश्यकता है। येसु चाहते हैं कि उदासीनता तथा गुप्त कपटपूर्ण संधि की दीवार को गिराया जाए। शोषण एवं अहंकार के लोहे की जंजीर को तोड़ा जाए तथा न्याय, सभ्यता और वैधता के लिए रास्ता साफ किया जाए। इस शहर का विस्तृत समुद्र तट हमें खुले हृदय की सुन्दरता का बखान करता है तथा जीवन की नई दिशा की ओर बढ़ने हेतु प्रेरित करता है। संत पापा ने कहा कि इसके लिए उन बंधनों को तोड़ने की जरूरत है जो हमें भय एवं निराशा के बंधन से बांधे रखता है। यूखरिस्त हमें निमंत्रण देता है कि हम येसु की लहरों में बहाये जाएँ कि हम आशा के तट पर पड़े न रहें बल्कि गहराई में जाकर मुक्त, साहसी एवं एकजुट बन सकें।  

संत पापा ने सुसमाचार पाठ के अंतिम भाग पर प्रकाश डालते हुए वहाँ उपस्थित विश्वासियों से कहा कि शिष्य भजन गाने के बाद बाहर गये। उसी तरह ख्रीस्तयाग के अंत में हम भी बाहर जायेंगे, हम येसु के साथ बाहर जायेंगे, हमारे शहर की गलियों में। येसु हमारे साथ रहना चाहते हैं वे हमारे जीवन का हिस्सा बनना चाहते हैं। हमारे घरों में प्रवेश करना तथा अपनी मुक्तदायी करूणा, आशीर्वाद एवं सांत्वना को प्रदान करना चाहते हैं।

संत पापा ने कहा कि लोगों से कहा कि उन्होंने दुखद परिस्थितियों का सामना किया है किन्तु प्रभु हमारे करीब रहना चाहते हैं, आइये हम अपना हृदय द्वार खुलें। संत पापा ने प्रार्थना की, हे प्रभु आइये और हमसे मुलाकात कीजिए।

हम अपने हृदय में आपका स्वागत करते हैं,

हमारे परिवारों एवं शहर में।       

हम आपको धन्यवाद देते हैं क्योंकि आपने हमारे लिए तैयार किया है,

जीवन का भोजन एवं अपने राज्य में एक स्थान।

आपका मार्ग तैयार करने में हमें सक्रिय बना।

लोगों को आपके पास लाने हेतु, जो एक मार्ग हैं,

इस प्रकार हमारी गलियों में भाईचारा, न्याय एवं शांति ला सकें, आमेन।


(Usha Tirkey)

04/06/2018 14:02