Social:

RSS:

रेडियो वाटिकन

विश्व के साथ संवाद करती संत पापा एवं कलीसिया की आवाज़

अन्य भाषाओं:

संत पापा फ्राँसिस \ आमदर्शन व धर्मशिक्षा

दृढ़ीकरण संस्कार में पवित्र आत्मा की मुहर

आमदर्शन समारोह के दौरान लोगों से मुलाकात करते संत पापा - REUTERS

30/05/2018 16:29

वाटिकन सिटी, बुधवार, 30  मई 2018 (रेई) संत पापा फ्राँसिस ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर, संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में विश्व के विभिन्न देशों से आये हुए तीर्थयात्रियों और विश्वासियों को दृढ़ीकरण संस्कार में पवित्र आत्मा की मुहर पर अपनी धर्मशिक्षा देते हुए कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।

आज की धर्मशिक्षा में हम दृढ़ीकरण संस्कार की चर्चा जारी रखते हैं। आज मैं ख्रीस्तीयों के जीवन में इस संस्कार के आतंरिक प्रभाव पर प्रकाश डालना चाहूँगा। वास्तव में, इसका अर्थ बपतिस्मा संस्कार में प्रकाशित होता है जो पवित्र परमप्रसाद संस्कार में अपनी पराकाष्ठा को प्राप्त करती है।

संत पापा ने कहा कि बपतिस्मा संस्कार में मिली आध्यात्मिक कृपाओं में मजबूती और सुदृढ़ता को प्राप्त करने हेतु दृढ़ीकरण संस्कार हमें अपनी प्रतिज्ञाओं को नवीकृत करने के लिए निमंत्रण देता है, जिसे हमारे माता-पिता और दादा-दादी हमारे बपितस्मा के दिन हमारी ओर से करते हैं। दृढ़ीकरण संस्कार के दौरान दीक्षार्थिय़ों को स्वयं कलीसिया के विश्वास की घोषणा “मैं विश्वास करता हूँ” कहते हुए करना होता है। वे विशेषकर धर्माध्यक्ष के द्वारा पूछे जाने वाले सवालों का उत्तर देते हैं, “पवित्र आत्मा, जो जीवन के स्रोत्र हैं, उन्हें दृढ़ीकरण संस्कार के दिन अपने विशेष वरदानों से विभूषित करते हैं, जैसा कि उन्होंने पेतेकोस्त के दिन प्रेरितों को किया था।”

पवित्र आत्मा का हमारे बीच आना एक साथ हमारे हृदयों को प्रार्थना में, उनकी ओर उन्मुख करने की मांग करता है। समुदाय द्वारा शांतिमय प्रार्थना करने के उपरान्त धर्माध्यक्ष अपना हाथ दीक्षार्थियों के ऊपर रखते हुए ईश्वर से निवदेन करते हैं कि वे उनके ऊपर अपनी कृपा बरसाये। संत पापा फ्राँसिस ने कहा कि केवल एक पवित्र आत्मा है (1कुरि.12.4) लेकिन हमारे ऊपर उतरने के द्वारा वे हमें अपनी विभिन्न कृपा रूपी धनों से भर देते हैं। “किसी को आत्मा द्वारा प्रज्ञा के शब्द मिलते हैं किसी को उसी आत्मा द्वारा ज्ञान के शब्द मिलते हैं, और किसी को उसी आत्मा द्वारा विश्वास मिलता है। वही आत्मा किसी को रोगियों को चंगा करने का, किसी को चमत्कार दिखाने का, किसी को भविष्यवाणी करने का, किसी को आत्मा की परख करने का, किसी को भाषाएँ बोलने का और किसी को भाषाओं की व्याख्या करने का वरदान देता है।” नबी इसायस के अनुसार पवित्र आत्मा हमें ईश्वर के प्रेरितिक कार्यों को पूरा करने हेतु अपने सात गुणों से विभूषित करते हैं।(इसा.11.2) संत पौलुस भी पवित्र आत्मा के इन वरदानों की चर्चा करते हैं, “प्रेम, आनंन्द, शांति, सहनशीलता, मिलनसारी, दयालुता, ईमानदारी, सौम्यता और संयम” (गला.5.22)। आत्मा द्वारा ईश्वर हममें इन वरदानों से भरता और कलीसिया को धनी बनाता है। वे अनेकता के रचियता हैं लेकिन इसके साथ ही हम उन्हें एकता के जनक स्वरूप पाते हैं।  

प्राचीन रीति के अनुरूप जहाँ हम अपने को चेलों के साथ संयुक्त होता हुआ पाते हैं, बपतिस्मा संस्कार में मिलने वाले पवित्र आत्मा के वरदान हस्तारोपण की विधि द्वारा हमारे जीवन में पूरी होती है।(प्रेरि.8.15-17, 19.5-6, इब्रा.6.2) वर्तमान समय में हम इस सुगंधित तेल के विलेपन को “क्रिज्म” कहते हैं जो आज भी पूर्वी और पश्चिमी रीति की कलीसियाओं में प्रचलित है।

संत पापा फ्रांसिस ने कहा कि तेल हमारे जीवन में एक उपचारत्मक और उबटन का तत्व है जो हमारे घावों में प्रवेश करता और उत्तकों को चंगाई प्रदान करता है। तेल में निहित इन गुणों के कारण धर्मग्रंथ और धर्मविधि में इसे एक निशानी के रुप में उपयोग किया जाता है जो हमारे लिए पवित्र आत्मा के अद्भुत कार्यों को ठोस रुप में व्यक्त करता है। दृढ़ीकरण संस्कार में धर्माध्यक्ष दीक्षार्थियों के माथे में पवित्र तेल का विलेपन करते हुए कहते हैं,“पवित्र आत्मा की मुहर को ग्रहण कीजिए जो आप को एक उपहार स्वरूप दिया जा रहा है।” संत पापा ने कहा कि पवित्र आत्मा हमारे लिए मिलने वाला वह अदृश्य उपहार है जो दृश्यमान पवित्र तेल के विलेपन द्वारा हमारे मांथे में अंकित किया जाता है। येसु ख्रीस्त पुत्र के रुप में अपने पिता के प्रतिरुप को धारण करते हैं। ख्रीस्तीय भी अपने में एक मुहर को धारण करते जो इस बात को स्पष्ट करता है कि वे किससे संयुक्त हैं। संत पौलुस इसकी चर्चा करते हुए कहते हैं,“ईश्वर आप लोगों के साथ हम को मसीह में सुदृढ़ बनाये रखता है और उसी ने हमारा अभिषेक किया है। उसी ने हम पर अपनी मुहर लायी है और अग्रिम के रुप में हमारे हृदयों को पवित्र आत्मा प्रदान किया है।” (2कुरि.1.21-22. एफि.1.13)

संत पापा ने कहा कि सुगंधित तेल के द्वारा क्रूस का चिन्ह दीक्षार्थी के मांथे में अंकित किया जाना उसे एक अटूट आध्यात्मिक निशानी प्रदान करती है जो उसे अधिक गहराई से येसु ख्रीस्त से संयुक्त करती जो उन्हें अपने मानव समाज में अपनी “खुशबु” फैलाने हेतु कृपाओं से भर देते हैं। (2 कुरि.2.15)

संत पापा ने नव दीक्षार्थियों के लिए कहे गये संत आम्ब्रोस के शब्दों की ओर तीर्थयात्रियों और विश्वासियों का ध्यान आकर्षित कराते हुए कहा, “आप इस बात को याद रखें कि आप पवित्र आत्मा की मुहर से अंकित किये गये हैं... आप इसे सदैव बनाये रखें। पिता ईश्वर ने आप को चुना है और अपने पुत्र येसु ख्रीस्त में सुदृढ़ करते हुए पवित्र आत्मा को एक उपहार स्वरुप आप को प्रदान किया है।” पवित्र आत्मा अवांछित उपहार हैं जिसे हमें कृतज्ञ हृदय से ग्रहण करने की जरूरत है जो हमें अनन्य कृपाओं से भर देते हैं। उन्होंने कहा कि इस वरदान को हमें सुरक्षित रखते हुए देख-रेख करने, इसके प्रति नम्र बने रहने और इसके तेजस्वी कार्य द्वारा अपने को मोम की भांति बनायें रखने की जरुरत है,जिससे हम विश्व में येसु ख्रीस्त के रुप को परिलक्षित कर सकें।

इतना कहने के बाद संत पापा फ्राँसिस ने अपनी धर्मशिक्षा माला समाप्त की और सभी तीर्थयात्रियों और विश्वासी समुदाय का अभिवादन किया। संत पापा ने विशेष रुप से युवाओं, बुजुर्गों, बीमारों और नव विवाहितों की याद की। उन्होंने कहा कि कल हम माता मरिया को समर्पित मई महीने का समापन करेंगे। माता मरियम हमारे जीवन के आनंद भरे क्षणों के साथ-साथ जीवन की अति कठिन परिस्थितियों में भी हमारे साथ रहें और हमारे परिवारों की रक्षा करें जिससे हमारे परिवार प्रार्थना और आपसी समझ का स्थल बना रहें। इतना कहने के बाद संत पापा ने विश्वासियों और तीर्थयात्रियों के साथ हे हमारे पिता प्रार्थना का पाठ किया और सबों को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया।


(Dilip Sanjay Ekka)

30/05/2018 16:29