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संत पापा फ्राँसिस \ मुलाक़ात

इताली धर्माध्यक्षों से संत पापा, धर्मप्रांतों के बीच पुरोहितों को साक्षा करें

इटली के काथलिक धर्माध्यक्षों से मुलाकात करते संत पापा - REUTERS

22/05/2018 16:52

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 22 मई 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने सोमवार 21 मई को वाटिकन के सिनॉड भवन में इटली के काथलिक धर्माध्यक्षों से मुलाकात कर, उनसे तीन बातों पर चिंता व्यक्त की, बुलाहट की कमी, सुसमाचारी निर्धनता तथा आर्थिक मामलों में पारदर्शिता एवं धर्मप्रांतों के विघटन एवं एकीकरण। 

संत पापा ने कहा, "यदि पियेदमोंते में बुलाहट कम है और पुलिया में अधिक तो उसे बांटने पर विचार करें। धर्मप्रांत के संसाधनों की व्यवस्था हमेशा पारदर्शी तरीके से करें। यदि किसी को शाम का भोजन के लिए निमंत्रण देते हैं तो कलीसिया का नहीं, अपना पैसा खर्च करें।"

सोमवार को इताली काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन की आमसभा के उद्घाटन पर संत पापा ने उनसे कहा, "आपको छड़ी लगाने के लिए नहीं किन्तु उन चीजों को कहना चाहता हूँ जो मुझे सचमुच चिंतित कर देते हैं।"   

संत पापा ने कहा कि इस धरती पर बुलाहट की कमी जो कई शताब्दियों तक ऊपजाऊ रही तथा उदारता पूर्वक मिशनरियों को प्रदान किया, सापेक्षवाद, अनंतिम तथा पैसे की तानाशाही की संस्कृति का विषैला फल है, जो ठोकर एवं निरूत्साहित साक्ष्य के कारण युवाओं को समर्पित जीवन से दूर करता है। उन्होंने बुलाहट की कमी को दूर करने का ठोस उपाय बतलाते हुए कहा कि इटली के धर्मप्रांत आपस में अपने पुरोहितों को साक्षा करें।

धर्मप्रांत के पैसे पर रात्रि भोज के लिए निमंत्रण न दें

संत पापा ने इटली के धर्माध्यक्षों के प्रति अपनी दूसरी चिंता को व्यक्त करते हुए कहा कि यह सुसमाचारी निर्धनता एवं पारदर्शिता है। उन्होंने कहा, "मेरे लिए एक जेस्विट के रूप में गरीबी हमेशा एक माता तथा दीवार के समान है क्योंकि उसने मुझे जन्म दिया है एवं यह मेरी रक्षा करती है। सुसमाचारी निर्धनता के बिना कोई प्रेरितिक उत्साह नहीं है। वे विश्वासी, गरीबी के बारे बातें नहीं कर सकते यदि वे फराऊन की तरह जीते हैं। गरीबी के बारे बात करना तथा ऐश आराम की जिंदगी जीना, विरोधात्मक-साक्ष्य है।" उन्होंने कहा कि कलीसिया की सम्पति को व्यक्तिगत सम्पति की तरह प्रयोग करना बड़ा ठोकर है।    

संत पापा ने उन याजकों के प्रति खेद प्रकट किया जो चालाकी करते अथवा ईमानदार नहीं होते। उन्होंने कहा, " हम सभी के लिए साफ एवं एक नियम होनी चाहिए। मैं आप में से एक के बारे जानता हूँ जो धर्मप्रांत के पैसों से दूसरों को भोजन हेतु कभी निमंत्रण नहीं देते बल्कि अपने ही पॉकेट से खर्च करते हैं। यह एक छोटा उदाहरण है किन्तु महत्वपूर्ण है। मैं इससे सचेत हूँ और उनके प्रति कृतज्ञ भी। संत पाप ने कहा कि इटली के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन द्वारा निर्धनता एवं पार्दर्शिता के रास्ते पर बहुत कुछ किया जा चुका है किन्तु इसमें और कुछ किये जाने की आवश्यकता है।

धर्मप्रांतों को कम करने एवं उन्हें एक करने की कलाह देते हुए संत पापा ने कहा कि यह आसान नहीं है किन्तु कुछ ऐसे धर्मप्रांत हैं जिनका विलय हो जाना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि वे 23 मई 2013 को इस पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यह प्रेरितिक आवश्यकता है जिसपर अध्ययन किया जाना चाहिए।      

संत पापा ने सभी धर्माध्यक्षों को माता बनने का परामर्श देते हुए, संत इग्नासियुस लोयोला की प्रार्थना के माध्यम से शुभकामनाएं दी, "माता मरियम हमें सहायता दे ताकि कलीसिया एक माता बन सके और हमारी आत्मा भी एक माँ बन सके। तीन महिलाएँ, मरियम, कलीसिया एवं हमारी आत्मा ये तीनों माताएं हैं। 


(Usha Tirkey)

22/05/2018 16:52