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रेडियो वाटिकन

विश्व के साथ संवाद करती संत पापा एवं कलीसिया की आवाज़

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संत पापा फ्राँसिस \ मिस्सा व प्रवचन

धर्माध्यक्षओं का कार्य रेवड़ की देखभाल

संत मार्था में प्रातःकालीन मिस्सा बलिदान के दौरान संत पापा

15/05/2018 16:48

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 15 मई 2018 (रेई) संत पापा फ्रांसिस ने मंगलवार को वाटिकन के अपने निवास संत मार्था में प्रातःकालीन मिस्सा बलिदान के दौरान धर्माध्यक्षों को अपनी भेड़ों की देख-रेख करने का आह्वान किया।

उन्होंने प्रेरित चरित से लिये गये प्रथम पाठ पर अपना चिंतन प्रस्तुत करते हुए कहा कि पौलुस पवित्र आत्मा से प्रेरित होकर बुजूर्गों और कलीसियाई समुदाय से विदा लेते हुए येरुसलेम की ओर बढ़ते हैं जो पवित्र आत्मा से प्रेरित उनकी आज्ञाकारिता और रेवड़ के प्रति प्रेम को दिखलाता है।

पौलुस का आत्म-परिक्षण

संत पापा फ्रांसिस ने कहा कि पौलुस ऐफेसिस में कलीसियाई समुदाय के बुजूर्गों की सभा बुलाते और आत्म परिक्षण करते हुए उनसे विदा लेते हैं। उन्होंने कहा कि पौलुस अपने किये गये कार्यों की याद दिलाते हुए दो बातों के पर गर्व करते हैं, “अपने पापों पर और येसु ख्रीस्त के क्रूस पर जो उनकी मुक्ति का कारण है।”

पवित्र आत्मा की पुकार

पौलुस पवित्र आत्मा की प्रेरणा से येरुसलेम के लिए प्रलायन करते हैं। संत पापा ने कहा, “यह धर्मध्यक्षों के अनुभव को हमारे समक्ष रखता है, जो पवित्र आत्मा की आवाज को सुनते हैं और उनके अनुरूप ईश्वरीय कार्यों को करने की पहल करते हैं।” पौलुस को अपने में एक तरह से पता है कि “वे अपने जीवन में कठिनाइयों, क्रूस का सामना करने वाले हैं, यह हमें येसु के येरुसलेम प्रवेश की याद दिलाती है। उन्होंने हमारे खातिर येरुसलेम में प्रवेश किया।” संत पापा ने कहा, “प्रेरित पौलुस ईश्वर की आज्ञा का पालन करते हुए अपने को उनके हाथों में अर्पित करता है। यह हमारे लिए पवित्र आत्मा की शक्ति है। धर्माध्यक्ष पवित्र आत्मा की शक्ति से सदैव आगे बढ़ते हैं, जिसे हम पौलुस के जीवन में पाते हैं।”

रेवड़ की देख-रेख

संत पापा फांसिस ने कहा कि पौलुस अपनी रेवड़ की देख-रेख करने हेतु, एक समुदाय से विदा लेते हुए दूसरे समुदाय की ओर बढ़ते हैं। उन्होंने धर्माध्यक्षों को संबोधित करते हुए कहा, “आप अपने रेवड़ की देख-रेख करें क्योंकि आप एक गरेड़िया हैं। आप कलीसियाई पद से प्रभावित होने के बजाय अपने भेड़ों की रखवाली करें।

पौलुस का साक्ष्य  

पौलुस कलीसिया के चरवाहों को ईश्वर के हाथों में सुपूर्द करते हैं जो उनकी देख-रेख और सहायता करते हैं। इस भाँति वे अपनी अनुभूतियों के बारे में कहते हैं कि अपने प्रेरितिक कार्य के बदले उन्होंने सोने या चांदी न ही किसी वस्त्र की चाह की। संत पापा ने कहा कि वे एक साक्ष्य प्रस्तुत करते हैं जो अपने में एक घोषणा, एक चुनौती है। “मैंने ऐसा किया, आप भी ऐसा ही करें।” पौलुस के पास ईश्वर की कृपा, प्रेरिताई कार्य हेतु साहस, येसु ख्रीस्त की मुक्ति का एहसास के अलावे और कुछ नहीं था।

संत पापा फ्राँसिस ने कहा “जब मैं इस पद को पढ़ता हूँ तो एक धर्माध्यक्ष होने के नाते मेरे जेहन में यह विचार आता है कि विदा लेने की मेरी बारी कब आयेगी।” उन्होंने अपने प्रवचन के अंत में कहा कि मैं ईश्वर से निवेदन करता हूँ कि वे इसी भांति मुझे भी विदा लेने दें। मैं अपनी आत्म-परीक्षण में पौलुस की भांति खरा नहीं उतरूंगा... लेकिन ईश्वर भले हैं, वे कृपालु हैं.. वे धर्माध्यक्षों के धर्माध्यक्ष हैं। वे हम सबों को यह कृपा दें कि हम सभी ईश्वर की आत्मा से प्रेरित होकर, उनकी शक्ति से, येसु ख्रीस्त के प्रेम में और पवित्र आत्मा में विश्वास करते हुए जीवन की राह में आगे बढ़ सकें। 


(Dilip Sanjay Ekka)

15/05/2018 16:48