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कर्नाटक में सोशल मीडिया पर प्रकाशित पत्र नकली, कहना भारतीय धर्माध्यक्षों का

भारतीय ग-हमंत्री राजसिंह से मुलाकात करते भारत के काथलिक धर्माध्यक्ष, फाईल तस्वीर, 2015 - RV

11/05/2018 11:28

भोपाल, शुक्रवार, 11 मई 2018 (ऊका समाचार): भारत के काथलिक धर्माध्यक्षों ने कहा है कि कर्नाटक चुनावों से पूर्व सोशल मीडिया पर ख्रीस्तीयों के विरुद्ध प्रकाशित पत्र नकली है।  

कर्नाटक राज्य में चुनावों से पूर्व इस दो पृष्ठीय नकली पत्र में भारत के कलीसियाई नेताओं पर कर्नाटक के हिन्दू समुदाय को विभाजित करने का आरोप लगाया गया है।

नौ मई को यह नकली पत्र सोशल मीडिया पर प्रकाशित किया गया जिसमें यह दावा किया गया है कि ख्रीस्तीय नेता, एक अलग अल्पसंख्यक समुदाय रूप में मान्यता मिलने हेतु लिंगायत समुदाय की मांगों का समर्थन करते हैं।

भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के महासचिव धर्माध्यक्ष थेओदोर मैसकरेनस ने इस सन्दर्भ में एक विज्ञप्ति प्रकाशित कर कहा, "हम आपको आश्वस्त करते हैं कि सोशल मीडिया पर प्रकाशित पत्र एक नकली और कपट भरा पत्र है।"

धर्माध्यक्ष मैसकरेनस ने बताया गया कि कलीसियाई अधिकारी नकली पत्र को प्रकाशित करने के लिये ज़िम्मेदार लोगों के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही करने पर विचार विमर्श कर रहे हैं।   

कर्नाटक का लिंगायत समुदाय हिनदू धर्म से उत्पन्न एक समुदाय है। राज्य की लगभग छः करोड़ साठ लाख की कुल आबादी में 17 प्रतिशत लोग लिंगायत समुदाय के सदस्य हैं। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, राज्य के 224 निर्वाचन क्षेत्रों में से लगभग 100 में इस हिन्दू समुदाय का प्रभाव  निर्णायक है। पारम्परिक रूप से यह समुदाय भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में मतदान करता आया है।

सोशल मीडिया पर ख्रीस्तीयों के विरुद्ध प्रकाशित नकली पत्र को बैंगलोर के महाधर्माध्यक्ष बर्नार्ड मोरस को सम्बोधित तथा भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष कार्डिनल ऑसवर्ल्ड ग्रेशियस द्वारा लिखा बताया गया।  

नकली पत्र में कार्डिनल ऑसवर्ल्ड ग्रेशियस को भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के सचिव बताया गया जबकि वे इस सम्मेलन के अध्यक्ष हैं।

धर्माध्यक्ष मैसकरेनस ने लिखा, "यह स्पष्ट है कि उन शरारतियों को भारत के कलीसियाई अधिकारियों के बारे में कुछ भी पता नहीं था।"

उन्होंने कहा, "कलीसिया का कोई भी अधिकारी विभाजन की रणनीति में शामिल नहीं होता है।"

धर्माध्यक्ष ने कहा, "नकली पत्र  में भाषा की ग़लतियाँ यह स्पष्ट संकेत देती है कि ऐसा पत्र कभी भी हमारे कार्यालय से नहीं आ सकता।"

12 मई को कर्नाटक राज्य में चुनाव होनेवाले हैं।


(Juliet Genevive Christopher)

11/05/2018 11:28