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लोकधर्मी, परिवार और जीवन के लिए बने वाटिकन विभाग का नया संविधान

कार्डिनल परोलिन औक कार्ड. टर्कसन समग्र मानव विकास सम्मेलन में भाग लेते हुए - ANSA

09/05/2018 16:11

संत पापा फ्राँसिस द्वारा लोकधर्मी, परिवार और जीवन की भूमिका को बढ़ावा देने के लिए स्थापित विभाग का नया संविधान मंगलवार 8 मई को प्रकाशित हुआ।

संत पापा फ्राँसिस ने 15 अगस्त, 2016 को मोतु प्रोप्रियो, 'सेदुला मातेर' में लोकधर्मी, परिवार और जीवन के लिए नया विभाग स्थापित किया और इसे 4 जून 2016 को एक प्रयोगात्मक आधार पर इस संविधान के तहत रखा गया था और 1सितंबर 2016 को प्रभावी हुआ।

नये विभाग को लोकधर्मियों हेतु गठित परमधर्मपीठीय परिषद और परिवार के लिए गठित परमधर्मपीठीय  परिषद की जिम्मेदारियों और कार्यों को दिया गया। इसके साथ ही दोनों परिषद अब निष्क्रिय हो गये। नये विभाग से जीवन के लिए परमधर्मपीठीय अकादमी और विवाह एवं परिवार विज्ञान संबंधी संत पापा जॉन पॉल द्वितीय के परमधर्मपीठीय धर्मशास्त्रीय संस्थान भी जुड़े हुऐ हैं।

पिछले संविधान की तरह, नए संविधान को प्रयोगात्मक आधार पर अनुमोदित किया गया है और 13 मई को प्रभावी होगा।

विभाग अब तीन वर्गों में विभाजित नहीं है

संविधान की पहली नवीनता यह है कि विभाग को तीन वर्गों में विभाजित नहीं किया गया है, हालांकि इसकी जिम्मेदारियां अधिक हैं। विभाग धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों, स्थानीय कलीसियाओं और अन्य कलीसियाई समूहों के साथ संबंध बनाए रखेगी, उनके बीच आदान-प्रदान को बढ़ावा देगी और संविधान में उल्लिखित मुद्दों से संबंधित मूल्यों और पहलों को बढ़ावा देने के लिए अपने सहयोग की पेशकश करेगी।"

कलीसिया में और दुनिया में लोक धर्मियों को बढ़ावा

यह विभाग कलीसिया और दुनिया में, संघों, आंदोलनों और समुदायों के सदस्यों के रूप में विवाहित या अविवाहित लोकधर्मियों की बुलाहट और मिशन को प्रोत्साहित करेगी।

युवा लोगों की भूमिका

नए संविधान ने कलीसिया से दुनिया की वर्तमान चुनौतियों के बीच युवाओं के नेतृत्व को बढ़ावा देने का आग्रह किया। "इस संबंध में,  विभाग का मुख्य काम विश्व युवा दिवस का आयोजन करना है।

लैंगिक मुद्दे

विभाग पुरुष और महिला के बीच संबंधों की विशिष्टता, पारस्परिकता, पूरकता और समान गरिमा पर अपने विचार विमर्श को और प्रगाढ़ करेगा। विभाग स्त्री 'प्रतिभा' का मूल्यांकन करके तथा "कलीसिया और समाज में महिलाओं की पहचान और मिशन पर उनके योगदान को बढ़ावा देगा।

परिवार की आध्यात्मिक देखभाल

विभाग परिवार की आध्यात्मिक देखभाल को बढ़ावा देगी, विवाह के संस्कार के आधार पर अपनी गरिमा और कल्याण की रक्षा करेगी, और कलीसिया और नागरिक समाज में अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों को बढ़ावा देगी, ताकि परिवार हमेशा कलीसिया और सामाज में अपने कार्यों को पूरा कर सके। इस संबंध में विभाग अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों, विशेष रूप से परिवारों की विश्व बैठक को बढ़ावा देगा।

वैवाहिक जीवन

प्रेरितिक उदबोधन "अमोरिस लाएटिटिया" का जिक्र करते हुए, नया संविधान "विवाहित जीवन में तथाकथित" अनियमित स्थितियों के संबंध में कलीसिया की प्रेरितिक देखभाल को भी व्यक्त करता है।

रक्षा जीवन

नए संविधान ने विकास के विभिन्न चरणों में व्यक्ति की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, जिम्मेदार प्रजनन के पक्ष में गर्भधारण से लेकर सामान्य मृत्यु तक मानव जीवन की सुरक्षा हेतु प्रोत्साहन दिया है।  "विभाग उन सभी संगठनों को बढ़ावा देगी और प्रोत्साहित करेगी जो महिलाओं और परिवारों को जीवन के उपहार का स्वागत करने और बढ़ावा देने में मदद करती हैं, खासतौर से कठिन गर्भावस्था के मामले में और गर्भपात के साधनों को रोकने के लिए। विभाग गर्भपात करने के लिए साधनों का सहारा ले चुकी महिलाओं की मदद करने के लिए कार्यक्रमों और पहलों का भी समर्थन करेगी।

नई विचारधाराएं

नये संविधान अनुसार विभाग बायोमेडिसिन की मुख्य समस्याओं और मानव जीवन से संबंधित कानून और मानव जाति के संबंध में विकसित विचारधाराओं पर अध्ययन और प्रशिक्षण देगी।


(Margaret Sumita Minj)

09/05/2018 16:11