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संत पापा फ्राँसिस \ आमदर्शन व धर्मशिक्षा

बपतिस्मा संस्कार, हमारा पुनर्जन्म

आमदर्शन में संत पापा फ्रांसिस - AP

09/05/2018 17:14

वाटिकन सिटी, बुधवार, 09 मई 2018 (रेई) संत पापा फ्राँसिस ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में विश्व के विभिन्न देशों से आये हुए तीर्थयात्रियों और विश्वासियों को बपतिस्मा संस्कार पर अपनी धर्मशिक्षा देते हुए कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनों, सुप्रभात।

बपतिस्मा की धर्मविधि में आज हम पवित्र आत्मा के सहचर्य की चर्चा करेंगे जो कि बपतिस्मा की धर्मविधि का मुख्य भाग है जिसके द्वारा हम येसु ख्रीस्त के पास्का रहस्य में सहभागी होते हैं। यह हमें संत पौलुस द्वारा रोमी ख्रीस्तीय समुदाय को पूछे गये सावल की याद दिलाती है,“क्या आप लोग यह नहीं जानते कि ईसा मसीह का जो बपतिस्मा हम सब को मिला है, वह उनकी मृत्यु का बपतिस्मा हैॽ वे इसके उत्तर में स्वयं कहते  हैं, “हम उनकी मृत्यु का बपतिस्मा ग्रहण कर उनके साथ इसलिए दफनाये गये हैं कि जिस तरह मसीह पिता के सामर्थ्य से मृतकों में से जी उठे हैं, उसी तरह हम भी एक नया जीवन जीयें।” रोमि.6.3-4)

बपतिस्मा की धर्मविधि में हमें येसु ख्रीस्त के पास्का रहस्य की यादगारी मनाते हैं। इसके द्वारा हम अपने पुराने आचरण और पुराने स्वभाव का परित्याग करते हैं क्योंकि वह बहकाने वाली दुर्वासनाओं के कारण बिगड़ता है। (एफे.4.22) यह इसलिए कि जो मसीह के साथ एक हो गया है तो वह नयी सृष्टि बन गया है। पुरानी बातें समाप्त हो गयी हैं और सब कुछ नया हो गया है।(2 कुरि.5.17) येरुसलेम के संत सिरिल नव दीक्षार्थितों को अपनी धर्मशिक्षा में जल से बपतिस्मा लेने के रहस्य को समझाते हुए कहते हैं, “जल से बपतिस्मा ग्रहण करने के द्वारा हम न केवल मरते वरन हमारा नया जन्म होता है। बपतिस्मा का जल हमारी कब्र और हमारी माता बनती है।” संत पापा फ्रांसिस ने कहा कि नये मानव का जन्म इस बात की माँग करता है कि वह पाप के कारण अपने कुरूप स्वभाव को मिट्टी में मिलने दे। कब्र और गर्भ का यह स्वरुप हमारे लिए बपतिस्मा की एक बड़ी निशानी को दिखलाती है जहाँ हम मृत्यु के उपरांत नये जीवन में प्रवेश करते हैं। संत पापा ने कहा कि मैं प्राचीन रोमन बपतिस्मा की धर्मविधि का जिक्र करना चाहता हूँ जिसे संत पापा सिक्सुत तृतीय लातीनी भाषा में व्यक्त करते हैं, “माता कलीसिया पवित्र जल के द्वारा अपनी संतानों को जन्म देती है। इस स्रोत के द्वारा कितनों का जन्म होता है जो स्वर्ग राज्य की आशा करते हैं।”

संत पापा फ्रांसिस ने कहा कि यदि हमारे माता-पिता ने हमें इस धरती पर जन्म दिया है तो कलीसिया ने हमें बपतिस्मा द्वारा अनंत जीवन हेतु पुनर्जन्म प्रदान किया है। हम येसु ख्रीस्त में पिता ईश्वर की संतान बन गये हैं। (रोम.8.15, गला.4.5-7) बपतिस्मा के जल और पवित्र आत्मा से पुनर्जन्म द्वारा स्वर्गीय पिता हम में से प्रत्येक जन को अपने प्रेममय वचनों से कहते हैं, “तुम मेरी प्रिय संतान हो।” (मत्ती. 3.17) पिता की यह वाणी विश्वासियों के हृदय में गुंजित होती है, यह हमारा परित्याग नहीं करती वरन यह हमारे जीवन में सदा बनी रहती है। पुनर्जीवित ईश्वर की संतान स्वरुप हम सदा ईश्वर के हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि बपतिस्मा की पुनरावृत्ति नहीं होती है क्योंकि इसके द्वारा हमारे जीवन में आध्यात्मिकता की एक अमिट मोहर डाली जाती है। “यह छाप हमारे जीवन में किसी भी पाप द्वारा नहीं मिटाई जा सकती है यद्यपि पाप बपतिस्मा के मुक्तिदायी फलों को उत्पन्न करने में बाधक सिद्ध होता है।”

बपतिस्मा संस्कार के द्वारा बपतिस्मा प्राप्त येसु ख्रीस्त के साथ संयुक्त होते और उनके अनुरूप बनते हैं, “क्योंकि ईश्वर ने निश्चित किया कि जिन्हें उन्होंने पहले से अपना समझा, वे उनके पुत्र के प्रतिरूप बनाये जायेंगे, जिससे उनका पुत्र इस प्रकार बहुत-से भाइयों का पहलौठा हो।”(रोमि.8.29) पवित्र आत्मा की शक्ति से बपतिस्मा हमें न्याय दिलाता, हम शुद्ध और पवित्र किये जाते और येसु ख्रीस्त में एक शरीर बनाते हैं। यह बपतिस्मा के विलेपन द्वारा व्यक्त होता है,“जहाँ हम सभी बपतिस्मा प्राप्त राजकीय पुरोहित और ईश्वरीय समुदाय के सदस्य बन जाते हैं।” यही कारण है कि पुरोहित यह घोषित करते हुए सभी दीक्षार्थियों के माथे में पवित्र तेल का विलेपन करता है,“ईश्वर अपने पवित्र तेल के विलेपन से आप को पवित्र करते हैं जिससे आप येसु ख्रीस्त में पुरोहित, राजा और नबी के रुप में ईश्वरीय अनंत प्रजा के सदस्य बने रहें।” 

संत पापा ने कहा कि ख्रीस्तीय बुलाहट येसु ख्रीस्त के साथ कलीसिया में संयुक्त रहते हुए उनके मुक्तिदायी कार्य में सहभागी होना है जिसके फलस्वरुप हम दुनिया में फल उत्पन्न करते हैं जो सदा बना रहता है। पवित्र आत्मा से प्रेरित वास्तव में पूरा विश्वासी समुदाय येसु ख्रीस्त के मुक्तिदायी कार्यो को “पुरोहित, राजकीय प्रजा और नबी” की भांति पूरा करते हैं। वे अपने प्रेरितिक उत्तदायित्वों को सेवा की भावना से प्रेरित होकर पूरा करते हैं। संत पापा फ्रांसिस ने कहा कि येसु ख्रीस्त का राजकीय पुरोहिताई और नबीवत प्रजा होने का अर्थ हमारे लिए क्या हैॽ इसका अर्थ अपने को ईश्वर के हाथों में सुपूर्द करना है (रोमि., 12.1) जिससे हम अपने विश्वासमय जीवन और सेवा कार्यों के द्वारा उनका साक्ष्य दे सकें, हम अपने जीवन में येसु ख्रीस्त का अनुसरण करते हुए अपने जीवन को दूसरों की सेवा हेतु अर्पित कर सकें।(मत्ती. 20.25-28, यो.13. 13-17)

इतना कहने के बाद संत पापा फ्राँसिस ने अपनी धर्मशिक्षा माला समाप्त की और सभी तीर्थयात्रियों और विश्वासी समुदाय का अभिवादन किया।

उन्होंने विशेष रुप से युवाओं, बुजुर्गों, बीमारों और नव विवाहितों की याद की। उन्होंने कहा कि हम मई के महीने में हैं जो कुंवारी माता मरियम को समर्पित है। हम प्रति दिन रोजरी माता विन्ती के द्वारा माता मरियम को अपनी भक्ति अर्पित करें जिससे ईश्वर की माता हमें अपने बेटे येसु ख्रीस्त के जीवन रहस्यों को समझने में मदद करें। इस भांति हम दूसरों के लिए ईश्वरीय प्रेम का उपहार बन सकेंगे।

इतना कहने के बाद संत पापा ने सभी विश्वासियों और तीर्थयात्रियों के साथ हे हमारे पिता प्रार्थना का पाठ किया और सबों को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया।


(Dilip Sanjay Ekka)

09/05/2018 17:14