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संत पापा फ्राँसिस \ मुलाक़ात

संत पापा ने रोम स्थित तोर दी स्कियावी के पवित्र संस्कार पल्ली का दौरा किया

पल्ली वासियों से सवाल जवाब करते हुए संत पापा फ्राँसिस - AP

07/05/2018 16:54

रोम, सोमवार 7 मई 2018 ( वीआर,रेई) : संत पापा फ्राँसिस रविवार 6 मई रोम स्थित तोर दी स्कियावी के पवित्र संस्कार पल्ली का दौरा किया और वहाँ विकलांग लोगों के लिए बनाये गये घर "कासा देला जोया" "आनंदालय" का उद्घाटन किया।

संत पापा रविवार को निर्धारित समय अपराहन 4 बजे से करीब 40 मिनट पहले ही पवित्र संस्कार पल्ली पहुँचे। वहाँ संत पापा का स्वागत महाधर्माध्यक्ष अंजेलो दे दोनातिस, कार्डिनल जोस जोर्ज रोसा, कार्डिनल लुईस अंतोनियो ताग्ले पल्ली पुरोहित डोन मौरिजियो मिरिल्ली ने किया।

संत पापा ने पल्ली के प्रांगण में पल्ली के माता-पिता, युवाओं, बच्चों और धर्मशिक्षकों से मुलाकात की। वहाँ चार लोगों ने संत पापा से प्रश्न किया जिसका उत्तर संत पापा ने दिया।

सबसे पहले  प्रार्थनालय दल के प्रमुख मौरिजोयो ने पूछा,“ बच्चों के विश्वास की यात्रा में माता पिता के योगदान को किस तरह समझायें कि उन्हें बच्चों को अकेला न छोड़ें। परिवारों के अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए किस प्रकार प्रेरित किया जाए? ”

प्रेम की भाषा

संत पापा ने कहा परिवार में दादा दादी का बहुत महतपपूर्ण स्थान है उन्हें बेकार या अनुत्पादक समझकर बहुत से परिवार उन्हें अलग दरकिनार कर देते हैं। जबकि वे परिवार और समाज के खजाने हैं। वे बच्चों के साथ रहकर प्रेम को मजबूत करते हैं। उनके बीच आपसी संबंध मजबूत होता है। संत पापा ने कहा कि काम पर जाने वाले माता-पिता को भी अपने बत्तों के साथ रहने और उनके साथ खेलने के लिए समय निकालना होगा। यह बिटामिन का काम करता है बच्चे स्वस्थ और मजबूत रहते हैं। माता पिता अपने  विश्वास और मूल्यों को अपने बच्चों को देते हैं। अतः परिवार में बच्चों के सवालों का जवाब देना उनके साथ खेलना बहुत जरुरी है। परिवार में बच्चा जो सीखता है उसे वह बाहर रहकर नहीं सीख सकता।

साक्ष्य और स्थिरता

दूसरा प्रश्न सिमोना का था। उसने बुरी गवाही और असंगत व्यवहारों के कारण पल्ली का हिस्सा बनने में कठिनाई के बारे में कहा कि प्यार और स्वीकृति की कमी के कारण भी अक्सर युवा लोग अन्य रास्ते में चले जाते हैं। वे पापा पूछती हैं: " क्या संत पापा वास्तव में हमसे प्यार करते हैं? क्या धर्माध्यक्ष, पुरोहित और धर्मशिक्षक वास्तव में हमें प्यार करते हैं? और यदि वे प्यार करते हैं, तो यह सभी लड़कों तक क्यों नहीं पहुंच सकता है और उन्हें दूर भेज सकता है, यानी, यह अपने करीब क्यों नहीं रख सकता है? "

इसके उत्तर में संत पापा ने कहा कि सच्चे साक्ष्य की जरुरत है। सबसे पहले घर में और पल्ली में साक्ष्य की जरुरत है।  एक गुण है जो पुरोहितों, धर्मसंघियों, धर्माध्यक्षों और परमाध्यक्षों और सभी के पास होना चाहिए और वह है करीब रहने का गुण।  इसे मनोवैज्ञानिकों से पहले पिता ईश्वर ने कहा है। वे हमारे करीब रहना चाहते थै और इस लिए उन्होंने अपने बेटे को हमारे पास भेजा ताकि वे अपने पिता के प्रेम का साक्ष्य दे सके। यही काम हम पुरोहितों और धर्माध्यक्षों को करना है। अपने जीवन साक्ष्य और पल्ली में पल्लीवासियों के करीब रहकर हम अपने प्रेम को प्रकट कर सकते हैं।  

आनंद का सुसमाचार

तीसरा प्रश्न 15 वर्षीय ब्यात्रीस का था। उसने कहा कि दो साल पहने उसने अपने पिता को खोया पर पल्ली में उसे दूसरा घर मिला। उसकी इच्छा है कि उसके साथी जो पल्ली से दूर रहना चाहते हैं वे भी पल्ली में प्रेम का अनुभव कर सकें।

संत पापा ने मजाक के लहजे में कहा कि आपके साथी सही हो सकते हैं क्योंकि बहुधा पुरोहित,धर्मबहनें उबाऊ होते हैं। वे इस तरह चलते फिरते हैं जैसे किसी की अंत्येष्टि में जा रहे हों। इस चेहरे को देखने कौन पल्ली आएगा। लेकिन सच्चाई यह है कि सुसमाचार का आनंद केवल अंतर बनाता है।

कलीसिया धर्मवाद से नहीं बल्कि गवाह के आकर्षण से बढ़ता है। हम एक क्लब या एक फुटबॉल टीम नहीं हैं, जो सदस्यों की तलाश में जाता है।  हम येसु के शिष्य हैं, जो सुसमाचार हमें बताता हैं उसे हम जीने की कोशिश करते हैं। और यह हमेशा खुशी देता है। और जब लोग इस खुशी देखते हैं तो कहते हैं, "वे इतने खुश क्यों हैं?" एसा ही कलीसिया के शुरुआती दिनों में हुआ। पवित्र आत्मा के आने के बाद, लोगों ने उन्हें देखा और कहा: "देखो, ये खुश हैं! और वे एक-दूसरे से कैसे प्यार करते हैं! वे झगड़ते नहीं हैं ..."। क्योंकि ये लोग खुश थे उनकी खुशी दूसरों को आकर्षित करती थी। हम खुशी के बिना सुसमाचार नहीं जी सकते: यह सुसमाचार को जीने का एक शर्त है।

चौथा प्रश्न 12 वर्ष के मत्तीया का था। उसने अपनी बीमार माँ जिसका ऑप्रेशन जल्दी ही होने वाला है उनके लिए और पल्ली के सभी माता पिता के लिए संत पापा से  आशीष और प्रार्थना मांगी।

संत पापा ने बच्चों से पूछा कि क्या वे अपने माता पिता के लिए प्रार्थना करते हैं? उन्होंने कहा जैसा माता पिता आप सोगों के लिए प्रार्थना करते हैं आप भी उनके लिए दादा दादी के लिए रोज प्रार्थना करें। लम्बी प्रार्थना की जरुरत नहीं है आप ईश्वर से कहें कि वे माता पिता को अच्छा स्वास्थ्य दें। उनहें खुश रखें। उनकी रक्षा करें। संत पापा ने मत्तीया की माता और सभी माता पिता के लिए प्रार्थना का आश्वासन दिया।


(Margaret Sumita Minj)

07/05/2018 16:54