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संत पापा फ्राँसिस \ अंजेलुस व संदेश

ख्रीस्त के प्रेम में दृढ़ रहने के लिए पड़ोसियों से प्रेम करना आवश्यक

संत पापा फ्राँसिस - AP

07/05/2018 13:47

वाटिकन सिटी, सोमवार, 7 मई 2018 (रेई)˸ वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 6 मई को, संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ स्वर्ग की रानी प्रार्थना का पाठ किया। स्वर्ग रानी प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, अति प्रिये भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।

इस पास्का काल में, ईश वचन हमें जीवन का सुसंगत तरीका दिखाता है ताकि हम पुनर्जीवित ख्रीस्त के समुदाय बन सकें। इसमें, आज का सुसमाचार येसु के आदेश को प्रस्तुत करता है, "तुम मेरे प्रेम में दृढ़ बने रहो।"(यो.15:9)

संत पापा ने कहा, "येसु के प्रेम में दृढ़ बने रहना, ईश्वर के प्रेम की धारा में बहना, उनके साथ स्थायी संबंध स्थापित करना, ये ही शर्त हैं जिससे हम निश्चित रूप से जान सकते हैं कि राह पर हमारे प्रेम में उत्साह एवं साहस की कमी नहीं हुई है। हमें भी येसु के समान एवं उनके माध्यम से पिता द्वारा प्राप्त होने वाले प्रेम को ग्रहण करना तथा उनके प्रेम में दृढ़ बने रहना है। स्वार्थ एवं पाप हमें उनके प्रेम से अलग न करे। संत पापा ने कहा कि यह एक मांग है जो असंभव नहीं है।  

सर्वप्रथम हमारे लिए इस बात के प्रति सचेत होना महत्वपूर्ण है कि ख्रीस्त का प्रेम कोई छिछला अनुभव नहीं है बल्कि हृदय का एक मौलिक मनोभाव है जो उनकी इच्छा के अनुसार जीने में प्रकट होता है। येसु यह स्पष्ट करते हैं, "यदि तुम मेरी आज्ञाओं का पालन करोगे तो मेरे प्रेम में दृढ़ रहोगे। मैंने भी अपने पिता की आज्ञाओं का पालन किया है और उनके प्रेम में दृढ़ बना रहता हूँ।"(पद.10)

संत पापा ने कहा कि प्रेम, हरेक दिन के जीवन में हमारे व्यवहार एवं कार्यों द्वारा प्रकट होना चाहिए, अन्यथा यह केवल भ्रम है, केवल शब्द है प्रेम नहीं। प्रेम को हर दिन ठोस रूप में व्यक्त होना चाहिए। येसु हमें अपनी आज्ञाओं का पालन करने का आदेश देते हैं जिनका सार इन शब्दों में प्रकट होता है, "जिस तरह मैंने तुम लोगों को प्यार किया है उसी तरह तुम एक-दूसरे को प्यार करो।" (पद.12)

हम किस तरह पुनर्जीवित ख्रीस्त द्वारा मिले प्रेम को अपने पड़ोसियों के बीच बांट सकते हैं?

येसु ने बरम्बार बतलाया है कि हमारा पड़ोसी कौन है जिसको हम प्यार कर सकते हैं केवल शब्दों से नहीं किन्तु कार्यों से। हमारे पड़ोसी वे हैं- जिनसे मेरी मुलाकात रास्ते पर होती है और जो अपने चेहरे एवं अपनी कहानी के साथ हमें आकर्षित करते हैं, जो हमें अपनी रूचि एवं निश्चितता से बाहर निकलने के लिए प्रेरित करते हैं, जो सुनने तथा उनके साथ कुछ दूर चलने की तत्परता की आशा हमसे करते हैं। परिवार अथवा समुदाय से शुरू करते हुए, चाहे कोई भी हो अथवा किसी भी परिस्थिति में हो हम सभी भाई बहनों के लिए अपना समय दें। इस तरह यदि हम येसु के प्रेम में दृढ़ बने रहेंगे तो यह प्रेम दूसरों तक पहुँचेगा एवं उन्हें आकर्षित करेगा और उन्हें मित्रता हेतु प्रेरित करेगा।  

संत पापा ने निरंतर प्रेम करने की सलाह देते हुए कहा कि दूसरों के प्रति इस प्रेम को विशेष अवसरों के लिए सुरक्षित नहीं रखा जाना चाहिए बल्कि उसे हमारे जीवन का स्थायी अंश बनाना चाहिए। हम इसी के लिए बुलाये गये हैं, उदाहरण के लिए, बहुमूल्य खजाने की तरह बुजूर्गों की देखभाल करना तथा उनसे प्रेम करना यद्यपि वे आर्थिक समस्या एवं कठिनाईयाँ उत्पन्न करते हों। बीमार व्यक्ति, चाहे वह जीवन के अंतिम घड़ी में ही क्यों न हो, उसे हर संभव मदद दी जानी चाहिए। अजन्में शिशु का स्वागत हमेशा किया जाना चाहिए, इस प्रकार जीवन की रक्षा एवं उससे प्रेम, गर्व धारण से लेकर प्राकृतिक मृत्यु तक की जानी चाहिए। यही प्रेम है।  

हम येसु ख्रीस्त में ईश्वर द्वारा प्रेम किये जाते हैं जो हमें एक-दूसरे को उसी तरह प्रेम करने का आदेश देते हैं जैसा कि उन्होंने किया है। किन्तु हम तब तक ऐसा नहीं कर सकते हैं जब तक कि हममें अपना ही हृदय हो। यूखरिस्त जिसमें हम हर रविवार को भाग लेने के लिए बुलाये जाते हैं, हममें ख्रीस्त के हृदय का निर्माण करता है ताकि हमारा सम्पूर्ण जीवन उनके सच्चे मनोभाव से संचालित हो सके।

संत पापा ने कुँवारी मरियम से प्रार्थना की कि वे हमें येसु के प्रेम में दृढ़ बने रहने तथा दूसरों के प्रति प्रेम में बढ़ने हेतु सहायता प्रदान करे, विशेषकर, कमजोर लोगों के प्रति जिससे कि हम अपने ख्रीस्तीय बुलाहट का प्रत्युत्तर पूरी तरह दे सकें।   

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ स्वर्ग की रानी प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

स्वर्ग की रानी प्रार्थना के उपरांत संत पापा ने जानकारी देते हुए कहा, "कल जर्मनी के अक्वीसग्राना में गरीब बालक येसु की धर्मबहनों की संस्थापिका क्यारा फे की धन्य घोषणा हुई जो उन्नीसवीं सदी के मध्य थीं। हम उनके द्वारा सुसमाचार के उत्साही साक्ष्य के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं, खासकर, वंचित युवाओं की शिक्षा के माध्यम से।

उसके बाद संत पापा ने मध्य अफीकी गणराज्य में हो रहे हिंसा की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा, मैं मध्य अफ्रीकी गणराज्य के लोगों के लिए प्रार्थना करने का निमंत्रण देता हूँ, वह देश, जहाँ मैं यात्रा कर चुका हूँ और उसे अपने हृदय में रखता हूँ, इन दिनों वहाँ गंभीर हिंसा हुई है जिसमें कई मारे गये हैं और अनेक घायल हुए हैं जिनमें एक पुरोहित भी है। माता मरियम की मध्यस्थता द्वारा प्रभु सभी को हिंसा एवं बदले की भावना को नहीं कहने तथा एक साथ शांति का निर्माण करने हेतु मदद करे।

इसके उपरांत संत पापा ने देश-विदेश से एकत्रित सभी तीर्थयात्रियों एवं पर्यटकों का अभिवादन किया। उन्होंने कहा, "मैं आप सभी का अभिवादन करता हूँ, विशेषकर, जो ओविएदो (स्पेन) से आये हैं एवं वेरबोवे (स्लोवाकिया) के विद्यार्थी तथा बेर्न के वेदी सेवक।" संत पापा ने नये स्वीस गार्ड एवं उनके परिवार वालों तथा मित्रों का अभिवादन किया।

संत पापा ने मातेर संगठन के प्रतिनिधियों का अभिवादन किया तथा उन्हें प्रोत्साहन दिया कि वे हिंसा से पीड़ित बच्चों की मदद करने के प्रति अपने समर्पण को जारी रखें। संत पापा ने उपस्थित न्योकटेक्यूमेनाल के सदस्यों को सम्बोधित कर उनके सुसमाचार प्रचार के कार्यों के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने काज़ा चिरकोंदियाले दी लातिना जेल के कैदियों का अभिवादन किया।

अंत में उन्होंने प्रार्थना का आग्रह करते हुए सभी को शुभ रविवार की मंगलकामनाएं अर्पित की।


(Usha Tirkey)

07/05/2018 13:47