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संत पापा फ्राँसिस \ अंजेलुस व संदेश

दयालु बनें, नव अभिषिक्त पुरोहितों से संत पापा

पुरोहितों का अभिषेक करते संत पापा - REUTERS

23/04/2018 15:15

वाटिकन सिटी, सोमवार, 23 अप्रैल 2018 (रेई)˸ वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर में, रविवार 22 अप्रैल को, बुलाहट के लिए प्रार्थना दिवस पर संत पापा फ्राँसिस ने 16 पुरोहितों का अभिषेक सम्पन्न किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रवचन में दयालु बनने की प्रेरणा दी। 
उन्होंने प्रवचन में कहा, "प्रिय भाइयो एवं बहनो, ये हमारे बेटे हैं जो पुरोहिताई के लिए बुलाये गये हैं। आइये, हम ध्यान पूर्वक चिंतन करें कि कलीसिया में उन्हें किस प्रकार का मिशन पूरा करना पड़ेगा। जैसा कि हम जानते हैं कि नये व्यवस्थान में एकमात्र महापुरोहित हैं प्रभु येसु किन्तु उनमें ईश्वर की सारी पवित्र प्रजा याजकीय प्रजा बन जाती है, फिर भी, अपने शिष्यों के बीच में से येसु कुछ लोगों को खास तौर से चुनना चाहते हैं ताकि कलीसिया में उनके नाम पर सार्वजनिक रूप से याजकीय कार्य को सम्पन्न करने के द्वारा वे गुरू, याजक एवं चरवाहा के मिशन को आगे ले जा सकें। 


वास्तव में, इसी के लिए वे पिता द्वारा भेजे गये थे, जिन्होंने प्रेरितों को भेजा और उनके बाद धर्माध्यक्ष एवं उनके उतराधिकारी दुनिया में भेजे जाते हैं। इस प्रकार पुरोहित उन्हें सहकर्मी की तरह सहयोग देते हैं जो पुरोहितीय मिशन में उनके साथ एक होकर कार्य करते और जो ईश प्रजा की सेवा हेतु बुलाये गये हैं। 
संत पापा ने पुरोहित उम्मीदवारों की ओर इंगित करते हुए कहा कि काफी मनन-चिंतन एवं प्रार्थना के बाद अब हम हमारे भाइयो का पुरोहित अभिषेक सम्पन्न करने जा रहे हैं क्योंकि गुरू, पुरोहित एवं चरवाहे के रूप में ख्रीस्त की सेवा के द्वारा वे ख्रीस्त के शरीर के निर्माण में सहयोग देंगे, जो कलीसिया, ईश प्रजा तथा पवित्र आत्मा का मंदिर है।
वास्तव में, वे सर्वोच्च एवं अनन्त पुरोहित ख्रीस्त का प्रतिनिधित्व करेंगे और नये व्यवस्थान के सच्चे पुरोहित के रूप में अभिषिक्त किये जायेंगे।  इस नाम के द्वारा जो उन्हें अपने धर्माध्यक्षों से जोड़े रखेगा, वे सुसमाचार की व्याख्या करने, ईश प्रजा की देखभाल एवं संस्कारों का अनुष्ठान करने, खासकर, मिस्सा बलिदान अर्पित करने के लिए के लिए समर्पित होंगे।  
संत पापा ने कहा, "प्रिय पुत्रो एवं भाइयो, आप जो पुरोहित अभिषेक किये जाने वाले हैं, ध्यान रहे कि पवित्र संस्कारों का अनुष्ठान करने के मिशन द्वारा आप, एकमात्र गुरू, ख्रीस्त के मिशन के सहभागी बनेंगे। आप सभी लोगों के लिए ईश्वर के वचन को बांटें जिसको स्वयं आपने उनके पुत्र के रूप में आनन्द से ग्रहण किया है। प्रभु के वचनों को पढ़ें और उस पर चिंतन करें, जो पढ़ते हैं उस पर विश्वास करें एवं विश्वास में आपने जो सीखा है उसकी शिक्षा दूसरों को दें तथा जो शिक्षा आप देते हैं उसे खुद जीयें।" 
उन्होंने कहा कि उनका सिद्धांत ईश प्रजा को पोषित करे तथा उनके जीवन की खुशबू ख्रीस्तीय विश्वासियों को आनन्द एवं समर्थन प्रदान करे। वे जिन वचनों एवं उदाहरणों से ईश्वर के परिवार का निर्माण करते हैं वह कलीसिया है। वे ख्रीस्त के पवित्रीकरण के कार्यों को जारी रखें। उनके मिशन द्वारा विश्वासियों का आध्यात्मिक बलिदान पूर्ण हो तथा समस्त कलीसिया के नाम पर, पवित्र रहस्यों के अनुष्ठान में वेदी पर रक्त रहित बलिदान अर्पित किया जाए।
उन्होंने कहा, "अतः आप जो करते हैं उसे अच्छी तरह जानें। जो मनाते हैं उसका अनुपालन करें क्योंकि प्रभु की मृत्यु एवं उनके पुनरूत्थान के रहस्यों में भाग लेकर, वे ख्रीस्त की मृत्यु में सहभागी होते तथा उनके साथ नया जीवन प्राप्त करते हैं।"  


संत पापा ने उन्हें संस्कारों का अनुष्ठान करने की सलाह देते हुए कहा कि बपतिस्मा के द्वारा वे नये सदस्यों को ईश प्रजा में शामिल करें, मेल-मिलाप के संस्कारों के अनुष्ठान द्वारा ख्रीस्त एवं कलीसिया के नाम पर वे पापों को क्षमा करें। संत पापा ने इन कार्यों में उन्हें दया करने पर बल देते हुए कहा कि वे दयालु बनने से कभी न थकें। अपने पापों एवं दुर्बलताओं की याद करें जिन्हें येसु ने माफ कर दिया है। पवित्र तेल द्वारा रोगियों को चंगा करें। दिन के समय पवित्र धर्मविधियों का अनुष्ठान करें तथा आराधना एवं निवेदन की प्रार्थनाओं द्वारा ईश प्रजा एवं समस्त मानव जाति की आवाज बनें। 
याद रखें कि आप मनुष्यों के बीच से तथा उनके लिए ईश्वर की कृपा का माध्यम बनने के लिए चुने गये हैं, आप ख्रीस्त के सच्चे आनन्द एवं निष्ठा में याजकीय कार्यों को पूरा करें।  
अंततः संत पापा ने प्रोत्साहन दिया कि वे शीर्ष एवं महापुरोहित ख्रीस्त के मिशन, में भाग लें, धर्माध्यक्षों के साथ पुत्रों की तरह अपने आपको विश्वासियों को एक परिवार में एकत्रित करने के लिए समर्पित करें। लोगों को पवित्र आत्मा में ख्रीस्त द्वारा पिता की ओर अग्रसर करें। अपनी नजरों के सामने भले चरवाहे का आदर्श रखें जो सेवा कराने नहीं किन्तु सेवा करने तथा खोजने एवं खोये हुओं को उन्हें बचाने आये।
ख्रीस्तयाग के उपरांत संत पापा ने विश्वासियों के साथ स्वर्ग की रानी प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरित आशीर्वाद दिया।  


(Usha Tirkey)

23/04/2018 15:15