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शांति बनाने और संघर्ष निवारण में महिलाओं की भूमिका, महाधर्माध्यक्ष औजा

संयुक्त राष्ट्र में वाटिकन के स्थायी पर्यवेक्षक महाधर्माध्यक्ष बेरनार्दितो औजा - RV

18/04/2018 15:50

न्यूयॉर्क, बुधवार 18 अप्रैल 2018 (वीआर,रेई) : संयुक्त राष्ट्र में वाटिकन के स्थायी पर्यवेक्षक ने कहा कि संघर्ष में यौन हिंसा को रोकने के लिए महिलाओं को सभी शांति निर्धारण कार्यों में सहभागी बनाना चाहिए।

महिलाओं की आवाज़ें संघर्ष की रोकथाम, शांति-निर्धारण और संघर्ष के बाद के सभी कार्यों में एकीकृत होनी चाहिए। यह ‘महिलाएँ, शांति और सुरक्षा’ विषय पर सुरक्षा परिषद की बहस के दौरान सोमवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में वाटिकन के स्थायी पर्यवेक्षक  महाधर्माध्यक्ष बेरनार्दितो औजा का संदेश था।

संघर्ष में यौन हिंसा के उन्मूलन पर चर्चा करते हुए महाधर्माध्यक्ष बेरनार्दितो ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति और सुरक्षा में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को सुविधाजनक बनाने के लिए एक मजबूत ढांचा विकसित किया गया है।

लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि अक्सर, युद्ध में और संघर्ष के बाद आज भी, महिलाओं की यौन हिंसा से पीड़ित होना जारी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हिंसा से बचे लोगों को समर्थन मिलनी चाहिए और सरकारों को इस तरह के अपराधों के अपराधियों पर मुकदमा चलाने का ठोस कदम उठाना चाहिए।

कार्रवाई के तीन क्षेत्रों की बात करते हुए, वाटिकन प्रतिनिधि ने कहा कि अधिक संसाधनों को संघर्ष की रोकथाम के लिए उपलब्ध करना चाहिए, साथ ही यह सुनिश्चित करना कि महिलाएँ इस प्रक्रिया में पूरी तरह से भाग लेने में सक्षम हैं।

दूसरी बात, उन्होंने कहा कि यौन हिंसा की रोकथाम और महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा सभी शांति अभियानों और कार्यवाई का एक अभिन्न अंग होना चाहिए।

तीसरी बात कि संघर्ष की स्थिति में महिलाओं के खिलाफ हिंसा, जो अक्सर अराजक, कुख्यात और खतरनाक होते हैं, को रोकने के लिए कदम उठाना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय समुदायों को, संघर्ष के बाद देशों में शिक्षा, सामाजिक और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए के सहारा और समर्थन देना चाहिए।

महाधर्माध्यक्ष औजा ने कहा कि काथलिक कलीसिया में महिलाओं और लड़कियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच प्रदान करने का एक लंबा इतिहास रहा है। उन्होंने कहा कि महिलाओं ने बेथलहम विश्वविद्यालय जैसे काथलिक-संचालित संस्थानों में अधिकांश छात्रों को जारी रखा है, जहां लगभग 80 प्रतिशत छात्राएँ फिलीस्तीनी युवतियाँ हैं

महाधर्माध्यक्ष ने निष्कर्ष में कहा कि महिलाओं के निवेश और कौशल बिना, न ही संघर्षों के कारणों की व्यापक समझ और न ही उन्हें समाप्त करने के लिए प्रभावी समाधान, कभी भी हासिल किया जा सकेगा। जाएगा।


(Margaret Sumita Minj)

18/04/2018 15:50