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कठुआ एवं उन्नाव में हुए बलत्कार की कलीसिया ने कड़ी निंदा की

कठुआ एवं उन्नाव में बलत्कार का विरोध करते लोग - AP

17/04/2018 16:13

नई दिल्ली, मंगलवार, 17 अप्रैल 2018 (एशियान्यूज)˸ भारत की काथलिक कलीसिया ने कठुआ के 8 साल की असीफा बानो पर सामूहिक बलत्कार एवं हत्या तथा उन्नाव में 17 वर्ष की लड़की के साथ भारतीय जनता पार्टी के सदस्य द्वारा बलात्कार एवं पार्टी द्वारा उसे न्यायसंगत ठहराये जाने के प्रयास की कड़ी निंदा की है।

भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के महासचिव धर्माध्यक्ष थेओदोर मसकरेनहास ने एक प्रेस वक्तव्य जारी कर सम्मेलन के सभी धर्माध्यक्षों की ओर से महिलाओं पर हो रही हिंसा पर गहरी चिंता एवं दुःख प्रकट किया।  

प्रेस विज्ञाप्ति में उन्होंने कहा है कि "कठुआ में आठ साल की बच्ची के साथ जो कुछ हुआ, उसपर हमला और  छेड़छाड़ एवं निर्दयता से उसकी हत्या तथा उन्नाव अथवा देश के किसी भी हिस्से में महिलाओं के साथ जो बलात्कार एवं हत्याएं हो रही हैं उनसे प्रभावित हुए बिना कोई नहीं रह सकता।"  

कठुआ एवं उन्नाव में जो हुआ है वह अधिक खेद जनक इसलिए है क्योंकि उसे समाज के कुछ वर्गों द्वारा न्यायसंगत ठहराये जाने की कोशिश की जा रही है। ऐसे लोग जिन्हें कानून की रक्षा करनी चाहिए वे या तो कथित तौर पर अपराधी बन गये हैं अथवा अपराधियों का बचाव कर रहे हैं।  

कहा गया है कि बलात्कार के लिए कोई औचित्य नहीं है; और जो भी हो इस तरह के अपराधों के खिलाफ विवेकपूर्ण लोगों को एक साथ आवाज़ उठाना चाहिए।

धर्माध्यक्ष ने गौर किया कि महिलाओं एवं बच्चों को किसी व्यक्तिगत, धार्मिक अथवा राजनीतिक मुद्दों के लिए बार-बार निशाना बनाया जाना, मानवता के खिलाफ अपराध के सिवा कुछ नहीं है।

घटना के विरोध में देश के कई हिंस्सों में प्रदर्शन कर न्याय की मांग करते हुए अपराधियों को सजा की मांग की गयी।  

मुस्लिम गुर्जर समुदाय से ताल्लुक़ रखने वाली पीड़िता 10 जनवरी को लापता हो गई थी और 17 जनवरी को जब उसका शव जंगलों से मिला तो उसके शरीर पर गहरी चोट के निशान थे। जांच के अनुसार, इस साज़िश का मक़सद मुस्लिम गुर्जरों को डराकर भगाना था ताकि वे अपनी ज़मीनें बेचकर वहां से चले जाएं।

मुम्बई महाधर्मप्रांत के न्याय एवं शांति आयोग के शीर्ष मोनसिन्योर अल्लोएन डीसिल्वा ने लोगों का आह्वान किया है कि हर व्यक्ति की गरिमा को पहचानने और न्याय की मांग करने के लिए वे बुधवार को एक शांति रैली में भाग लें। उन्होंने लोगों को एक याचिका पर हस्ताक्षर कराने की भी योजना बनाई है।

नाबालिगों की सुरक्षा हेतु गठित परमधर्मपीठीय समिति की सदस्य सिस्टर अरिना गोनसाल्स ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे जघन्य अपराध बतलाया तथा कहा कि यह पूरे देश के लिए शर्म की बात है। उन्होंने दुखित परिवार के प्रति सहानुभूति प्रकट की।


(Usha Tirkey)

17/04/2018 16:13