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सभी प्रकार के शोषणों से बच्चों को मुक्त करें, संत पापा फ्राँसिस

एक भारतीय बाल मजदूर - AFP

16/04/2018 16:57

वाटिकन सिटी, सोमवार, 16 अप्रैल 2018 (रेई): आज सोमवार 16 अपैल बाल दासता के खिलाफ विश्व दिवस है। बाल दासता के खिलाफ आवाज उठाते हुए संत पापा फ्राँसिस ने हर प्रकार के शोषणों से बच्चों को बचाने हेतु सभी का आह्वान किया है।

संदेश में उन्होंने लिखा,“जो लोग बच्चों की देखभाल और रक्षा करते हैं वे ईश्वर की ओर होते हैं और कचरे की संस्कृति पर विजय पाते हैं जो बच्चों पर अत्याचार करते हैं। आइए, हम सभी प्रकार के शोषणों से बच्चों को मुक्त करें।”

बाल दासता के खिलाफ आवाज उठाने वाले 11 वर्षीय इक्बाल मसीह की 16 अप्रैल को की गई हत्या की यादगार में यह विश्व दिवस रखा गया है। इक्बाल मसीह की तरह दुनिया में अभी भी 400 मिलियन से अधिक बच्चे हैं जो इस दासता के शिकार हैं, खासकर गरीब देशों में।

इक्बाल मसीह का जन्म पाकिस्तान के एक बहुत गरीब परिवार में हुआ था। चार साल की उम्र से ही वह काम कर रहा था और पांच साल में, वह एक कालीन निर्माता को बेच दिया गया था जहाँ वह कारखाने में काम करने लगा। वहाँ काम करने वाले लोगों में विशेष रूप से बच्चे थे। उसे किसी तरह की आजादी  नहीं थी और हर छोटी गलती के लिए दंडित किया गया, और विद्रोह के हर प्रयास में पीटा गया।

 लेकिन इक्बाल, मजबूत और बहादुर था वह  दस साल की उम्र में वहाँ से बच निकलने में सफल हुआ। उसकी मुलाकात उल्ला खासी से हुई, जो शोषित नाबालिगों के साथ काम करता है और दास बच्चों की स्वतंत्रता के लिए प्रतिबद्ध है। वे पाकिस्तान के कपड़ा माफिया और कारखानों के शोषण निंदा करते है और मानवीय संगठनों, समाचार पत्रों, संसदों और विश्वविद्यालयों द्वारा दुनिया के विभिन्न हिस्सों में इनके शोषण के विरोध में आवाज बुलंद की गई।

 अंतर्राष्ट्रीय दबाव के कारण पाकिस्तानी सरकार को कई कालीन कारखानों को बंद करने और उस समय शोषित बच्चों और इकबाल को मुक्त करने के लिए मजबूर होना पड़ा। 16 अप्रैल 1995 को, केवल बारह वर्ष की आयु में, इक्बाल की हत्या कर दी गई थी।


(Margaret Sumita Minj)

16/04/2018 16:57