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संत पापा फ्राँसिस \ मिस्सा व प्रवचन

मसीह हमें सच्ची आजादी देते हैं, संत पापा

प्रवचन देते हुए संत पापा फ्राँसिस

14/04/2018 16:05

वाटिकन सिटी, शनिवार 14 अप्रैल 2018 ( वीआर,रेई) : हम ख्रीस्तीयों के लिए सच्ची आज़ादी का मतलब है कि हमारे जीवन में ईश्वर को स्थान देना और येसु का अनुसरण करने के लिए मन और दिल को पुरी तरह से खुला रखना। यह बात संत पापा फ्राँसिस ने शुक्रवार को अपने प्रेरितिक भवन संत मार्था के प्रार्थनालय में प्रातःकालीन युखारिस्तीय समारोह के दौरान अपने प्रवचन में कही।

संत पापा ने दैनिक पाठ के आधार पर फरीसी गमालिएल, प्रेरित संत पेत्रुस और योहन तथा येसु का उदाहरण देते हुए कहा कि सच्ची स्वतंत्रता का अर्थ है हमारे जीवन में ईश्वर के लिए स्थान बनाना और उसी का अनुसरण करना। येसु ख्रीस्त ने क्रूस पर मुक्तिदायी मृत्यु द्वारा हमें सच्ची आजादी दी। हम ख्रीस्तीय पास्का के इस काल में इसकी घोषणा करते हैं।

फरीसी गमालिएल

संत पापा ने कहा कि फरीसी गमालिएल नियम कानून का ज्ञाता था और उसने सदूकियों को येसु के चेलों पेत्रुस और योहन को स्वतंत्र करने के लिए मनाया। गमालिएल एक स्वतंत्र विचारों वाला व्यक्ति था। उसने अपने सहयोगियों को इस बात से आश्वस्त कराया कि ख्रीस्तीयों के इस आंदोलन को वे समय के भरोसे छोड़ दें।

संत पापा ने कहा कि गमालिएल ख्रीस्तीय नहीं था वह येसु को मसीह और मुक्तिदाता के रुप में नहीं पहचानता था पर वह स्वतंत्र विचारों वाला व्यक्ति था। वह ईश्वर के कार्यों में दखल देना नहीं चाहता था।

संत पापा ने कहा कि पिलातुस ने भी अच्छी तरह तर्क किया था और जान गया था कि येसु निर्दोष थे। लेकिन पिलातुस स्वतंत्र विचारों वाला नहीं था। पद और महत्वाकांक्षा ने उसे दास बना दिया और उसमें सच्चाई का सामना करने की हिम्मत नहीं थी।

प्रेरित पेत्रुस और योहन

संत पापा ने कहा कि संत पेत्रुस और योहन स्वतंत्रता के दूसरे उदाहरण हैं। उन्होंने रोगियों को चंगा किया और इसीलिए वे महासभा में सदूकियों के सामने लाये गये। बेकसूर होने पर भी उन्हें कोड़ों की मार पड़ी और उन्हें छोड़ दिया गया। वे खुश थे कि येसु के नाम के कारण वे अपमानित होने के योग्य समझे गये। येसु का अनुसरण करने में उन्हें जो खुशी मिली, वे उसे अपने तक ही सीमित नहीं रखे और उनकी खुशी में अधिक से अधिक लोग शरीक होने लगे। इस तरह उनकी संख्या बढ़ती चली गई।

सच्ची आजादी देने वाले येसु

संत पापा ने कहा कि मरुभूमि में येसु ने रोटियों का चमत्कार कर लोगों की भूख मिटाई तो उन्होंने येसु को अपना राजा बनाना चाहा। परंतु येसु उनकी मनसा जानकर दूर पहाड़ों पर चले गये। वे लोगों की वाहवाही से खुद को मुर्ख नहीं बनाये। वे स्वतंत्र थे और इसीलिए वे पिता ईश्वर की इच्छा पूरी कर पाये। येसु ने क्रूस मरण स्वीकार किया। "येसु स्वतंत्रता के सबसे बड़े उदाहरण है।"

संत पापा ने खुद से प्रश्न करने को कहा कि क्या हम सचमुच में स्वतंत्र हैं? या क्या हम अपनी आकांक्षाओं, धन-सम्पति, भोग-विलास के दास हैं? प्रवचन के अंत में संत पापा ने सच्ची आजादी देने वाले येसु का अनुसरण करने के लिए प्रेरित किया।


(Margaret Sumita Minj)

14/04/2018 16:05