Social:

RSS:

रेडियो वाटिकन

विश्व के साथ संवाद करती संत पापा एवं कलीसिया की आवाज़

अन्य भाषाओं:

विश्व की घटनायें \ विश्व

संयुक्त राष्ट्र: परमधर्मपीठ द्वारा युद्ध में स्वचालित रोबोटों के उपयोग की निंदा

रोबोट, टोक्यो, जापान के उत्तर काज़ो में, 1 जुलाई, 2015 को स्वत: परिवर्तन डिस्पेन्सर के निर्माता, ग्लोरी लिमिटेड के कारखाने में काम करते हुए - REUTERS

11/04/2018 16:06

जिनेवा, बुधवार 11 अप्रैल 2018 (रेई) : “स्वत: घातक हथियार युद्ध को और भी अमानवीय बनाते हैं, क्योंकि वे नैतिक विकल्पों में असमर्थ हैं।” यह बात महाधर्माध्यक्ष यूर्कोविच ने कही।"

जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र में परमधर्मपीठ के स्थायी पर्यवेक्षक महाधर्माध्यक्ष इवान यूर्कोविच ने "लेथल स्वायत्त हथियार सिस्टम्स" पर सरकारी विशेषज्ञों के सामने अपने विचार रखते हुए कहा कि स्वत: घातक हथियारों, तथाकथित "किलर रोबोट" का इस्तेमाल - जो इंसान द्वारा दूर से नियंत्रित नहीं होता है, लेकिन पूर्व-निर्धारित एल्गोरिदम के आधार पर कार्य करता है - युद्ध को "और भी अमानवीय" बना देगा क्योंकि "कोई भी तकनीक स्वीकार्य होने के लिए व्यक्ति की सही अवधारणा के साथ सुसंगत होना चाहिए, यह कानून और नीति का पहला आधार है।"

नैतिक दुविधाओं के सामने अप्रभावी मशीनें

महाधर्माध्यक्ष यूर्कोविच ने कहा,"हर सशस्त्र हस्तक्षेप का सावधानीपूर्वक मुल्यांकन किया जाना चाहिए और हर बार इसे वैधता और इच्छित उद्देश्यों के अनुरूप सत्यापित करना आवश्यक है, जो कि नैतिक और कानूनी रूप से भी वैध होना चाहिए।" मशीनों को सौंपे जाने वाले ये कार्य तेजी से जटिल होते जा रहे हैं जो नैतिक दुविधाओं के सामने अप्रभावी हैं।"

व्यक्ति में भरोसा का अभाव

 परमधर्मपीठ के प्रतिनिधि ने युद्ध के रोबोटीकरण और "अमानवीकरण" विषय पर एक कानूनी सहमति और नैतिक आधार बनाने के लिए, "मानवविज्ञान विरोधी सिद्धांत" के सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए चर्चा करने को कहा। एक स्वत: हथियार एक नैतिक रूप से जिम्मेदार नहीं हो सकता है और इसके लिए प्रोग्रामिंग द्वारा निर्धारित नैतिक विकल्पों का चुनाव करने में असमर्थ है, उदाहरण के लिए, सैन्य सफलताओं को प्राप्त करने के लिए नागरिकों को मारने का निर्णय लेना।

 विशेष रूप से, महाधर्माध्यक्ष यूर्कोविच ने रेखांकित किया कि मशीनों के साथ युद्ध को सौंपने का विचार मानव में विश्वास के अभाव को दिखाता है। "अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा और शांति, वार्ता और सहयोग की संस्कृति के माध्यम से प्राप्त होती है, न कि हथियारों के माध्यम से।"


(Margaret Sumita Minj)

11/04/2018 16:06