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वैशाख उत्सव पर अंतरधार्मिक वार्ता हेतु गठित परमधर्मपीठीय सम्मेलन का संदेश

भगवान बुद्ध की प्रतिमा - RV

11/04/2018 15:53

वाटिकन सिटी, बुधवार 11 अप्रैल 2018 (रेई) : वैशाख उत्सव पर अंतरधार्मिक वार्ता हेतु गठित परमधर्मपीठीय सम्मेलन के अध्यक्ष कार्डिनल जॉन लूईस तौरान ने परमधर्मपीठ की ओर से सभी बौद्ध धर्मावलम्बियों को हार्दिक शुभकामनायें दी। यह उत्सव उनके परिवारों और पूरे विश्व में खुशी और शांति लाये।

कार्डिनल जॉन लूईस तौरान ने कहा हम इस वर्ष वर्तमान की आवश्यकता को देखते हुए भ्रष्टाचार रहित संस्कृति को बढावा देने पर विचार करना चाहते हैं। निजी लाभ के लिए पदों की शक्तियों के दुरुपयोग से जुड़े भ्रष्टाचार सार्वजनिक या निजी दोनों ही क्षेत्रों में इतना व्यापक बन गया है कि संयुक्त राष्ट्र ने 9 दिसंबर को इसके लिए अंतर्राष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस घोषित किया है। जैसा कि भ्रष्टाचार की घटना अधिक व्यापक हो जाती है, दुनिया भर में सरकारें, गैर-सरकारी संगठनें, मीडिया और नागरिक इस घिनौने अपराध से निपटने के लिए एक साथ मिल रहे हैं। धार्मिक नेताओं के रूप में, हमें भी वैधता और पारदर्शिता के साथ भ्रष्टाचार रहित संस्कृति को बढ़ावा देने में योगदान देना चाहिए।

संत पापा फ्राँसिस ने भी अपने फरवरी महीने की प्रार्थना में भ्रष्टाचार को अस्वीकार करने के लिए कहा था। "भ्रष्टाचार के पाप की निंदा करते हुए उन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि दुनिया भर में भ्रष्टाचार राजनीतिज्ञों, व्यापारिक अधिकारियों और याजकों के बीच भी पाया जाता है। अंततः जो भ्रष्टाचार के लिए कीमत का भुगतान करते हैं, वे गरीब हैं।

येसु अपने अपने शिष्यों को स्मरण दिलाते हुए कहते हैं "जो तुम लोगों में बड़ा बनना चाहता है वह तुम्हारा सेवक बने।" (मत्ती 20:26), संत पापा जोर देकर कहते हैं," केवल एक ही मार्ग है जो भ्रष्टाचार से हमें निकाल सकता है .... वह है सेवा। क्योंकि भ्रष्टाचार गर्व और अहंकार से आता है और सेवा नम्रता है। दूसरों की मदद करने वाला नम्र व्यक्ति है।

 बौद्ध के रूप में, आप भ्रष्टाचार को मन की एक हानिकारक स्थिति के रूप में देखते हैं जो दुख का कारण बनता है और समाज को अस्वस्थ बनाने में योगदान देता है। आप तीन प्रमुख विषाक्त पदार्थों की पहचान करते हैं - लालच, घृणा, और भ्रम या अज्ञान - सामाजिक संकट के स्रोतों के रूप में व्यक्ति और समाज की भलाई के लिए इन्हें समाप्त किया जाना चाहिए। बौद्ध शिक्षाएं और अभ्यास भ्रष्टाचार को न केवल अस्वीकार करते हैं, बल्कि उन अस्वस्थ मन, इरादों, आदतों और उन लोगों के कार्यों को बदलने का प्रयास करते हैं जो भ्रष्ट हैं।

हमारा मानना है कि भ्रष्टाचार को मौन रहकर उत्तर नहीं दिया जा सकता है और वे अच्छे इरादे वाले विचार अपर्याप्त साबित होंगे जब तक कि वे लागू नहीं किए जाते हैं और ये भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए कार्यान्वयन आवश्यक है। हम बौद्ध और ख्रीस्तीय, अपने नैतिक शिक्षाओं में निहित हैं, हमें भ्रष्टाचार को रोकने के लिए अपने अंतर्निहित कारणों को समाप्त करके और भ्रष्टाचार को जड़ से निकालने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। इस प्रयास में, हमारा मुख्य योगदान हमारे अनुयायियों को नैतिक सत्यनिष्ठा में बढ़ने, निष्पक्षता और जिम्मेदारी की भावना को प्रोत्साहित करना होगा।

 हम अपने परिवारों तथा सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक संस्थानों में ईमानदारी व सत्यनिष्ठा का जीवन जीकर  भ्रष्टाचार मुक्त वातावरण को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय रूप से प्रतिबद्ध हों।

 इन्हीं भावनाओं के साथ आपको पुनः वैशाख की आनंदमय मंगल कामनायें।

विदित हो कि बुद्ध पूर्णिमा वैशाख मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। इसे 'बुद्ध जयंती' के नाम से भी जाना जाता है। यह बौद्ध धर्म में आस्था रखने वालों का एक प्रमुख त्यौहार है। पूर्णिमा के दिन ही गौतम बुद्ध का स्वर्गारोहण समारोह भी मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान बुद्ध को 'बुद्धत्व' की प्राप्ति हुई थी। आज बौद्ध धर्म को मानने वाले इस दिन को बड़ी धूमधाम से मनाते हैं।


(Margaret Sumita Minj)

11/04/2018 15:53