Social:

RSS:

रेडियो वाटिकन

विश्व के साथ संवाद करती संत पापा एवं कलीसिया की आवाज़

अन्य भाषाओं:

संत पापा फ्राँसिस \ मुलाक़ात

ईश राज्य के विस्तार हेतु युवाओं से संत पापा का आग्रह

ब्रेशिया के युवाओं से मुलाकात करते संत पापा - REUTERS

07/04/2018 14:47

वाटिकन सिटी, शनिवार, 7 अप्रैल 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने युवाओं को चुनौती दी कि वे येसु को सुनें तथा अपने आपमें बदलाव लायें ताकि प्रेम के ईश्वर के राज्य की स्थापना कर सकें।

शनिवार को वाटिकन स्थित पौल षष्ठम सभागार में उतरी इटली के ब्रेशिया धर्मप्रांत के 3000 युवाओं से मुलाकात करते हुए संत पापा फ्राँसिस ने उन्हें अपना संदेश दिया।

उन्होंने कहा, "येसु का स्वप्न, जैसा कि सुसमाचार में कहा गया है ईश्वर का राज्य है। ईश्वर के राज्य का अर्थ है ईश्वर से प्रेम एवं एक-दूसरे से प्रेम, जिसके द्वारा एक वृहद परिवार में हम एक-दूसरे के भाई और बहन बनते तथा ईश्वर को पिता मानते हैं जो अपने सभी बच्चों को प्यार करते तथा उस समय अत्यधिक आनन्दित होते हैं जब एक खोया हुआ पुत्र वापस लौट जाता है।"  

संत पापा ने युवाओं को सम्बोधित कर कहा कि वे उनके उस सवाल से अत्याधिक प्रभावित हुए जिसमें उन्होंने पूछा है कि "क्या धर्माध्यक्ष सचमुच विश्वास करते हैं कि युवा कलीसिया में बदलाव लाने में सहयोग कर सकते हैं?" उन्होंने कहा, "यह मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि आगामी सिनॉड, जिसमें युवा, विश्वास एवं बुलाहटीय आत्मजाँच पर आधारित होगा, यह युवाओं को सुनने के द्वारा तैयार किया गया है।"

संत पापा ने कहा, "जब मैं कहता हूँ "सच्चा श्रवण", इसका अर्थ है बदलाव लाने, एक साथ चलने, अपनी तमन्नाओं को बांटने की तत्परता।"  

उन्होंने युवाओं से एक प्रश्न किया कि क्या वे येसु को सुनने एवं अपने आप में बदलाव लाने के लिए तैयार हैं।

संत पापा ने युवाओं को बदलाव लाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा, येसु स्पष्ट रूप से कहते हैं, "यदि कोई मेरा अनुसरण करना चाहता है तो वह आत्मत्याग करें।" येसु क्यों इन शब्दों का प्रयोग करते हैं जो अच्छा नहीं लगता, इसे किस तरह समझा जा सकता है? "आत्मत्याग करना," का अर्थ यह बिलकुल नहीं है कि उन चीजों से नफरत करना जिनको स्वयं ईश्वर ने हमें प्रदान किया है, जीवन, अभिलाषा, शरीर, संबंध आदि, जी नहीं, बल्कि ईश्वर इन सारी चीजों को हमारी भलाई के लिए हमें देना चाहते हैं। फिर भी वे पूछते हैं कि यदि कोई उनका अनुसरण करने के लिए अपने आप का त्याग करना चाहता है, क्योंकि हम सभी में एक पुराना व्यक्तित्व है, जो ईश्वर के तर्क का अनुसरण नहीं चलता जो प्रेम का तर्क है बल्कि इसके विपरीत अहम की भावना के अनुसार चलता है, जो स्वार्थ, अपनी रूचि, दिखावटी एवं छिपने के तर्क के अनुसार है।

येसु हमें इस दासता से मुक्त करने के लिए क्रूस पर मर गये, जो कि बाह्य नहीं किन्तु आंतरिक है। पाप हमें आंतरिक रूप से मार डालता है। केवल येसु ही हैं जो हमें इस बुराई से बचा सकते हैं किन्तु इसके लिए हमारे सहयोग की आवश्यकता है, हमें यह कहना है, "येसु मुझे क्षमा कर, मुझे आपके समान नम्र एवं प्रेमी हृदय प्रदान कर।

संत पापा ने कहा कि इस प्रकार की प्रार्थना को येसु गंभीरता से लेते एवं जो लोग उन पर विश्वास करते हैं वे चमत्कार देखते हैं। संत पापा ने युवाओं को बाईबिल का पाठ करने एवं यूखरिस्त में भाग लेने की सलाह दी जिसके द्वारा वे आनन्द का अनुभव कर सकते हैं उन्होंने कहा कि ऐसा करने के द्वारा वे पीड़ा, बामारी एवं एकाकी के क्षण में येसु की उपस्थिति का एहसास करेंगे। उन्हें घमंड, उपधारणा एवं दूसरों का न्याय किये बिना धारा के विपरीत जाने हेतु साहस प्राप्त होगा। यह एक वरदान हैं जो हमें अपने आपमें शून्यता एवं उनके द्वारा भरे जाने का अनुभव प्रदान करेगा।

संत पापा ने असीसी के संत फ्राँसिस एवं संत दमियन का उदाहरण दिया जो युवा के रूप में स्वाप्नों से भरे थे किन्तु ये ईश्वर के नहीं बल्कि दुनिया के स्वप्न थे। येसु ने उन्हें प्रेरित किया और वे अपने पुराने व्यक्तित्व को त्यागकर विनम्रता, गरीबी, सरलता, दयालुता, सृष्टि के प्रति स्नेह आदि गुणों को अपनाते हुए येसु को स्वीकार किया।

संत पापा ने युवाओं को उनके मुलाकात के लिए धन्यवाद देते हुए उनके लिए माता मरियम से प्रार्थना की तथा अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।


(Usha Tirkey)

07/04/2018 14:47