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भारत में संगीत एवं नृत्य का प्रशिक्षण देतीं धर्मबहनें

प्रतीकात्मक तस्वीर - AFP

03/04/2018 13:17

मुम्बई, मंगलवार, 3 अप्रैल 2018 (मैटर्स इंडिया)˸ भारत में काथलिक धर्मबहनों द्वारा संचालित एक ललित कला केंद्र ने हाल ही में भारत की संस्कृति और विविधता के धरोहर के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के लिए एक समारोह आयोजित किया था।

दिव्य कला केंद्र दिव्य गुरु की धर्मबहनों द्वारा चलाया जाता है जिसमें संस्थान का दूसरा दीक्षांत समारोह 28 मार्च को, मुंबई में आयोजित किया गया था।

30 से अधिक देशों में सेवारत यह धर्मसमाज, धन्य जेम्स अल्बेरिओन द्वारा स्थापित पौलिन परिवार का सदस्य है, जिन्होंने कलीसिया में संचार हेतु खुद को समर्पित किया है। केंद्र में भारतीय और पश्चिमी दोनों तरह के धार्मिक संगीत सिखाये जाते हैं तथा दीक्षांत समारोह ने विद्यार्थियों और कर्मचारियों को उनकी प्रतिभा को उजागर करने का अवसर प्रदान किया।

भारत में धर्मसमाज की प्रतिनिधि धर्मबहन रोसमेरी मुत्तासेरिल ने दीक्षांत समारोह के अवसर पर एक पत्र प्रेशित कर कहा, "कला की खूबसूरती को चित्रित तब किया जाता है जब यह किसी के दिल से निकलता है क्योंकि यह उनके शरीर और आवाज के माध्यम से स्वाभाविक रूप से प्रकट होता है कि यह जीवन सुंदर और अनमोल है।"

उन्होंने कहा कि यह दिन हमारे मन में एक गर्व के क्षण के रूप में हमेशा याद रहेगा क्योंकि डी.के.के. के विद्यार्थी सफलता के रंगों के साथ परिसर से विदा ले रहे हैं। उनकी सभी उपलब्धियां, उनकी कड़ी मेहनत, धैर्य, और प्रतिबद्धता का फल है।

उन्होंने कहा, "जैसा कि आप सभी जीवन की अगली चुनौतियों के लिए आगे अपना कदम उठा रहे हैं, मैं चाहती हूं कि आप अपने मन में विश्वास की आग को जीवित रखें और अनुशासित जीवन जीयें, क्योंकि यह नृत्य और संगीत के माध्यम से अपने को व्यक्त करने के लिए आपके शरीर और आत्मा को बिलकुल सही लय प्रदान करेगा।

समारोह में धर्मसंघ की परमाधिकारीणी की महासलाहकारिणीयाँ भी उपस्थित थीं जो रोम से भारत आयी हुई थीं। धर्मसमाज की विकर जेनेरल धर्मबहन लिदीया ओवोकी जो समारोह में उपस्थित थीं उन्होंने क्रूस्क से कहा कि धर्मसमाज के प्रतिनिधि "दिव्य कला केंद्र" द्वारा समाज को दिये जा रहे महत्वपूर्ण सहयोग से संतुष्ट हैं। यह भारत के समृद्ध धरोहर को जीवित रखेगा। 


(Usha Tirkey)

03/04/2018 13:17