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लाहौर की सड़कों पर 45 ख्रीस्तीयों ने प्रवासियों के रुप में पास्का की रात बताई

प्रतीकात्मक तस्वीर - AP

02/04/2018 17:01

लाहौर, सोमवार 2 अप्रैल 2018 (एशियान्यूज) : संखात्रा गाँव के ख्रीस्तीयों ने लाहौर को प्रेस क्लब के सामने पास्का की रात बिताई।

27 बच्चों सहित 45 लोग, 5 मार्च से शरणार्थियों के रूप में लाहौर की सड़कों के किनारे रह रहे हैं, क्योंकि सत्तारूढ़ दल के राजनेता के साथ भूमि विवाद के कारण घर जाने से डरते हैं। उनके अस्थायी शिविर में उनके बैनर में लिखा है: "हम ख्रीस्तीय हैं, हमें शांति से जीने दो।"

अधिकांश ख्रीस्तीय ईंट भट्टों में मजदूरी करते और अपनी जीविका चलाते हैं। पिछले महीने अशीर अफताब और दो गांववालो के हमले के बाद उनके खिलाफ प्रदर्शन में प्रेस क्लब आए थे। वे एक बाड़ से घिरे हुए अपने समुदाय केंद्र पर बिजली मीटर की स्थापना के खिलाफ थे।

पादरी आफताब ने एशियान्यूज को बताया,“हमारा ख्रीस्तीय गाँव भारत विभाजन के पहले ही 1947 में करीब 1745 वर्ग मीटर सरकारी जमान में बसा हुआ है।”

"एक स्थानीय मुस्लिम जमींदार बुद्धान खान ने नीलामी में जमीन खरीदने की कोशिश की, लेकिन बिक्री 1981 में रद्द कर दी गई। अब उसका बेटा, मुस्लिम लीग के कार्यकर्ता नवाज़ पार्टी, जमीन को हड़पने के लिए झूठी कागजात का प्रयोग कर रहा है।

"पिछले साल 500 लोगों की एक भीड़ ने हमारे मिट्टी के घरों को ध्वस्त कर दिया था लेकिन पंजाब की विधानसभा के एक ख्रीस्तीय सदस्य के हस्तक्षेप के कारण हम वापस आ गए।"

पादरी आफताब ने कहा कि अल्पसंख्यक के रूप में, ख्रीस्तीय भेदभावपूर्ण व्यवहार के शिकार हैं।

तीन बच्चों की माँ नोरीन बीबी ने कहा,"विभिन्न टीवी स्टेशनों ने हमारी स्थिति की सूचना दी है, लेकिन हम अभी भी हमारे धार्मिक और राजनीतिक नेताओं के साथ बातचीत के परिणामों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। हम पुलिस की मार सह सकते हैं, लेकिन बुलेट नहीं।"

एक ख्रीस्तीय वकील और विपक्षी दल के सदस्य, शुनीला रूथ, प्रांतीय विधानसभा के अध्यक्ष के साथ स्थिति पर चर्चा करने के लिए तैयार हैं।

उसने कहा, "गरीब परिवारों को अपने अधिकार मिलनी चाहिए," "मैं अपने नेताओं के साथ पुलिस अधिकारियों से मिलूंगी।"


(Margaret Sumita Minj)

02/04/2018 17:01