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बांग्लादेश की कलीसिया 'धर्मशास्त्री पुरोहित' के लिए शोकित है

ढाका के पवित्र रोजरी गिरजाघरके परिसर में स्थित कब्रिस्तान में प्रार्थना करते हुए संत पापा फ्राँसिस 2 दिसम्बर 2017 - ANSA

28/03/2018 16:42

ढाका, बुधवार 28 मार्च 2018 (उकान) : बांग्लादेश की कलीसिया एक वरिष्ठ पुरोहित फादर बेर्नार्ड पालमा की मृत्यु का शोक कर रही है जिन्होंने दशकों से देश के एकमात्र मेजर सेमिनरी में शिक्षा दी और दूसरी वाटिकन सभा के  महत्वपूर्ण कलीसियाई दस्तावेजों का बंगाली भाषा में अनुवाद और संपादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

 फादर बेर्नार्ड की मृत्यु 23 मार्च को हृदय का दौरा पड़ने की वजह से ढाका में हुई। वे 75 वर्ष के थे।

 24 मार्च को ढाका के पवित्र रोजरी गिरजाघर में कार्डिनल पैट्रिक डी'रोज़ेरिया ने पवित्र मिस्सा और अंतिम संस्कार की अनुष्ठान किया। उन्हें गिरजाघर के परिसर में स्थित कब्रिस्तान में दफनाया गया। हजारों काथलिकों ने फादर बेर्नार्ड के अंतिम संस्कार में भाग लिया।

कार्डिनल डी'रोज़ेरिया ने प्रवचन में कहा,"फादर बर्नार्ड ने कलीसिया को बहुत बड़ा योगदान दिया है। वे द्वितीय वाटिकन सभा की भावना के जीवित अवतार थे। वे बुद्धिमान और संत स्वभाव के व्यक्ति थे।  उनके जीवन और कार्यों ने कलीसिया को बहुत प्रभावित किया है।"

फादर पालमा 196 में ढाका के लिटल फ्लावर माईनर सेमिनरी में प्रवेश किये। वे पाकिस्तान के करांची ‘क्राइस्ट द किंग मेजर सेमिनरी में दर्शनशास्त्र और धर्मशास्त्र की पढ़ाई की। 1971 में उनका पुरोहिताभिष्क हुआ।

उसके बाद उन्होंने रोम के पोंटिफिकल उर्बान विश्वविद्यालय से सिद्धांतवादी धर्मशास्त्र में डॉक्टर की उपाधि हासिल की। रोम से लौटने के बाद उन्होंने 1981 से 2006 तक होली स्पीरिट मेजर सेमिनरी में पढ़ाया। वे विभिन्न धार्मिक प्रकाशनों के संपादक भी थे।

उन्होंने कई किताबें लिखीं और काथलिक कलीसिया की धर्मशिक्षा और दवितीय वाटिकन महासभा के दस्तावेजों को बंगाली भाषा में अनुवाद किया।

2006 से 2013 तक वे संत जोसेफ सेमिनरी के आध्यात्मिक निर्देशक थे और 2014 में सक्रिय पुरोहितिक प्रेरितिक कार्यों से सेवानिवृत्त हुए थे।


(Margaret Sumita Minj)

28/03/2018 16:42