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ईराक में मारे गये 39 श्रमिकों के शवों को दिल्ली सरकार स्वदेश लौटायेगी

भारतीयों को मोसुल में 2014 में अपहरण कर लिया गया था जिनकी हत्या की खबर सुन शोकित प्रियजन - AP

27/03/2018 15:33

नई दिल्ली, मंगलवार, 27 मार्च 2018 (रेई)˸ ईराक में इस्लामिक स्टेट (आईएस) के आतंकियों द्वारा मारे गए 39 भारतीय श्रमिकों के शवों को जल्द ही वापस लाया जाएगा, शायद अगले सप्ताह के आरम्भ में। इस की घोषणा 26 मार्च को भारत की विदेशमंत्री सुष्मा स्वराज ने मोसुल में 2014 में बंधक बना लिए गये लोगों के रिश्तेदारों से मुलाकात करते हुए की। बंधक बनाये गये इन भारतीयों के शव सामूहिक कब्रों में पाये गये।

पिछले हफ्ते, सुष्मा स्वराज ने मीडिया में शवों की पहचान के बारे में समाचार प्रकाशित किया था। उनके इस पहल को मृतकों के परिवार वालों के प्रति "असंवेदनशीलता" कहकर उनकी आलोचना की गयी थी जिन्होंने टेलीविजन पर अपने लोगों की मौत की खबर सुनी थी।

इराक में काम करने वाले भारतीयों के अपहरण का करीब चार साल हो चुका था इस अवधि में दिल्ली सरकार ने बार बार यह घोषणा की थी कि वह उनके शवों को खोजने का हर संभव प्रयास कर रही है। पिछले साल के जुलाई माह में विदेशमंत्री ने लोक- सभा के सामने दावा किया था कि तीसरे सूत्रों द्वारा प्राप्त ताजा समाचार के अनुसार वे सभी सुरक्षित हैं।   

अपहरण के शिकार लोग इस्लामिक स्टेट के खतरे के बावजूद इराक में काम की तलाश में गये थे। उनके डीएनए जांच से पता चलता है कि 27 पंजाब, 4 हिमाचल प्रदेश, 6 बिहार एवं 2 पश्चिम बंगाल के थे।

प्रितपाल की पत्नी राजरानी शर्मा ने मंत्री द्वारा शव की घोषणा किये जाने पर आँसू बहाते हुए एशियान्यूज़ से कहा, ̎उन्होंने हमें बार-बार आश्वासन दिया कि सब कुछ सही सलामत है, वे जीवित हैं तथा सरकार उनकी तलाश कर रही है। 

विदित हो कि ईराक में काम करने वाले भारतीयों को मोसुल में 2014 में अपहरण कर लिया गया था। उनके शवों को सामूहित कब्रों में पाया गया है। मोदी सरकार की बड़ी  आलोचना इसलिए हो रही है कि शवों की पहचान हो जाने पर उनके परिवार वालों को जानकारी दिए बिना जानकारी प्रकाशित की गयी थी।   


(Usha Tirkey)

27/03/2018 15:33