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गोमाँस आरोप में हत्या के लिये जेल की सज़ा का कलीसियाई नेताओं ने किया स्वागत

बीफ खाने के आरोप में मारे गये एक मुसलमान की हत्या का विरोध करती एक छात्रा, तस्वीरः 2015 - AP

23/03/2018 11:18

भारत के कलीसियाई नेताओं ने एक मुसलमान व्यक्ति की हत्या के लिये 11 व्यक्तियों को जेल की सज़ा सुनाई जाने का स्वागत किया है

नई दिल्ली, शुक्रवार, 23 मार्च 2018 (ऊका समाचार): भारत के कलीसियाई नेताओं ने एक मुसलमान व्यक्ति की हत्या के लिये 11 व्यक्तियों को जेल की सज़ा सुनाई जाने का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे कि धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा को रोकने में मदद मिले सकेगी।

विगत वर्ष 29 जून को मुसलमान माँस व्यापारी असगर अंसारी की हिन्दू चरमपंथियों ने पीट-पीट कर हत्या कर दी थी। सिर्फ इसलिये कि उन्हें शक था कि अंसारी के पास गोमाँस था। 21 मार्च को पूर्वी झारखंड राज्य के रामगढ़ जिले में एक फास्ट-ट्रैक अदालत ने अंसारी को मौत के घाट उतारने के दोषी पाए जाने के बाद हिंदू गो-जागरुक नामक चरमपंथी संगठन के 11 व्यक्तियों को सजा सुनाई थी।

उत्पीड़न राहत नामक मानवाधिकार संगठन के निदेशक शिबू थॉमस ने कहा, पहली बार किसी  अदालत ने देश में गाय-संबंधित हिंसा के अपराधियों को दंडित किया है। उन्होंने कहा, यह सजा "गाय जागरूक संगठन और अल्पसंख्यकों पर हमला करनेवालों द्वारा उत्पीड़ित सभी लोगों के लिये एक आश्वासन है कि देश में कानून का शासन विद्यमान है।"

ख्रीस्तीय विरोधी हिंसा के मामलों का जायज़ा लेनेवाले तथा पीड़ितों की रक्षा करनेवाले उत्पीड़न राहत नामक मानवाधिकार संगठन के निदेशक शिबू थॉमस ने कहा, रूढ़िवादी हिंदुओं द्वारा सम्मानित गायों की रक्षा के लिए हिंदू गाय जागरुक नामक चरमपंथी संगठन अनियंत्रित कार्रवाई करता रहा है तथा अल्पसंख्यकों को उत्पीड़ित करता रहा है।

उन्होंने कहा, "अदालत का यह निर्णय युगान्तकारी है, यह केवल एक न्यायिक निर्णय नहीं है। पुलिस विभाग की भी विशेष सराहना की जानी चाहिए जिसने इस मामले में निष्पक्ष और वास्तविक जांच की।"

सिमडेगा के काथलिक धर्माध्यक्ष विन्सेन्ट बरवा ने कहा कि यह निर्णय झारखंड राज्य में धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से, ईसाइयों पर हमला करनेवाले हिंसक समूहों के खिलाफ एक निवारक के रूप में काम करेगा। उन्होंने कहा कि सभी को सन्देह था कि चरमपंथी हिन्दू गाय जागरूक संगठन प्रशासन और पुलिस की चुप्पी से समर्थन प्राप्त कर हिंसक कार्रवाई में लगा था किन्तु अदालत के इस फ़ैसले ने यह स्पष्ट दर्शा दिया है कि यदि जाँचपड़ताल कर्त्ता सच्चाई से काम करें तो अपराधियों को न्यायोचित दण्ड दिया जा सकता है।

। उनका कहना है कि इससे कि धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा को रोकने में मदद मिले सकेगी...


(Juliet Genevive Christopher)

23/03/2018 11:18