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संत पापा फ्राँसिस \ मिस्सा व प्रवचन

ख्रीस्त के क्रूस को देखें, उदासी से बाहर आयें, संत पापा

20/03/2018 17:11

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 20 मार्च 2018 (रेई)˸ वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में, मंगलवार 20 मार्च को ख्रीस्तयाग प्रवचन में संत पापा फ्राँसिस ने विश्वासियों को क्रूस की ओर देखने का निमंत्रण दिया, विशेषकर, कठिनाईयों की घड़ी में, जब व्यक्ति थक जाता है ताकि वह ईश्वर के विरूद्ध न बोले क्योंकि यह आत्मा को विषाक्त कर देता है।

संत पापा ने कहा, ̎कठिन समय में जब हृदय उदास हो जाता तथा जब व्यक्ति जीवन की यात्रा से थक जाता है तब क्रूस को देखें।̎

प्रवचन में संत पापा ने गणना ग्रंथ से लिए गये पाठ पर चिंतन किया जो इस्राएलियों के उस अनुभव को प्रस्तुत करता है जिसको उन्होंने प्रतिज्ञात देश की ओर जाते समय मरूस्थल पार करते हुए अनुभव किया था और उन्हें विषैले सांपों का सामना करना पड़ा था। जब लोग भूखे थे तब ईश्वर ने उनके लिए मन्ना गिराया और जब वे प्यासे थे तब उन्होंने उनके लिए जल प्रदान किया था। प्रतिज्ञात देश पहुँचने के पूर्व कुछ लोगों ने संदेह किया क्योंकि मूसा ने जिन लोगों को प्रतिज्ञात देश को देखने भेजा था उन्होंने लौटकर बतलाया कि धरती फलों और पशुओं के लिए धनी है किन्तु वहाँ के निवासी ऊंचे एवं मजबूत हैं। उनकी बातों को सुनकर लोग मार डाले जाने के भय से भर गये तथा वहाँ जाने के खतरनाक कारणों को सोचने लगे। उन्होंने केवल अपनी शक्ति को देखी तथा प्रभु के सामर्थ्य को भूला दिया जिन्होंने उन्हें मिस्र की दासता से मुक्त किया था।

संत पापा ने कहा कि जब लोग यात्रा करने में असमर्थ थे उन्होंने मिस्र देश की याद की। उसी तरह लोग जब प्रभु का अनुसरण करते और उनके करीब रहने का प्रयास करते हुए हम कभी कभी अपनी स्थिति से ऊबकर, आगे बढ़ने में असमर्थ हो जाते हैं तब हम पीछे लौटना चाहते हैं। ऐसे समय में वे बीते जीवन के लिए खेद प्रकट करते हैं।

संत पापा ने कहा कि ये भ्रम है जिसको शैतान लाता है। वह उन चीजों को आकर्षक रूप में प्रस्तुत करता है जिनको हमने प्रभु की ओर आगे बढ़ते हुए छोड़ दिया है।

संत पापा ने इस बात को रेखांकित किया कि यह अनुभव सभी के लिए होता है जब हम प्रभु का अनुसरण करना चाहते हैं किन्तु थक जाते हैं किन्तु उससे भी बुरा है ईश्वर को नीचा दिखलाना। उसके विरूद्ध भुनभुनाना, हमारी आत्मा को विषाक्त कर देता है। कोई सोच सकता है कि ईश्वर मदद नहीं करते और वे अपने हृदय में उदास हो जाते हैं।

पहला पाठ बतलाता है कि सांप विष का प्रतीक है, प्रभु की राहों पर चलने की निरंतरता का अभाव।

प्रभु के आदेश पर मूसा ने एक कांसे का सांप बनाया तथा उसे एक डण्डे पर रख दिया। इस सांप ने उन सभी को चंगा किया जिन्होंने उनकी ओर देखा। संत पापा ने कहा कि कांसे का सांप ख्रीस्त का प्रतीक था।

उन्होंने कहा कि यही हमारी मुक्ति की कुँजी है जीवन यात्रा में हमारे धैर्य की चाभी, क्रूस की ओर नजर डालना ही मरूस्थल से बाहर निकलने का उपाय है। हम पूछ सकते हैं कि ख्रीस्त के कूस पर नजर डालकर हम क्या करें? संत पापा ने कहा कि उन्हें देखें, उनके घावों को महसूस करें उन्हीं घावों द्वारा हम चंगा किया गये हैं। संत पापा ने प्रश्न किया, ̎क्या आप विषाक्त महसूस करते हैं, क्या आप उदास हैं तथा जीवन में आगे बढ़ नहीं पा रहे हैं। क्या यह कठिनाइयों से घिर गया है हम येसु की ओर देखें।   

संत पापा ने सभी चुनौतियों में कुरूप क्रूस की ओर देखने की सलाह दी क्योंकि वही सच्चा है। क्रूस को कलाकारों ने सुन्दर रूप दिया है कुछ को सोने और कीमती पत्थरों से जड़ा है जो केवल दुनियादारी नहीं किन्तु क्रूस की महिमा को प्रकट करता है। क्रूस का सही अर्थ है महिमा, पुनरूत्थान की महिमा।  


(Usha Tirkey)

20/03/2018 17:11