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चालिसा,स्वार्थ से लड़ने के लिए चालिस दिन, महाधर्माध्यक्ष कोस्टा

प्रतीकातमक तस्वीर - EPA

19/03/2018 16:55

चितागोंग, सोमवार 19 मार्च 2018 ( एशिया न्यूज) : "चालिसा स्वयं पर केंद्रित और स्वार्थ से लड़ने का समय है जो हमारे दिल को भटकाता रहता है। " उक्त बात चितागोंग के महाधर्माध्यक्ष ने कही।

कुरिंथियों के नाम संत पौतुस के दूसरे पत्र का हवाला देते हुए,  महाधर्माध्यक्ष मूसा एम. कोस्टा अपने संदेश में कहते हैं कि चालिसा हमारे विश्वास को नवीनीकृत करने का और "ईश्वर के अनुग्रह प्राप्त करने का सही समय है।" (2 कुरिन्थियों 6: 2) " हमारे प्रति ईश्वर के असीम प्यार और हमारी देखभाल को याद रखने का भी समय है।"

इस संबंध में महाधर्माध्यक्ष कोस्टा ने संत योहन के सुसमाचार को भी उद्धृत किया है: "क्योंकि ईश्वर ने दुनिया को इतनी प्यार किया कि उसने अपने एकमात्र बेटे को दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह न मरे, परन्तु अनन्त जीवन प्राप्त करे" (योहन 3:16) "इससे बड़ा प्रेम किसी का नहीं कि कोई अपने मित्र के मिए अपने प्राण अर्पित कर दे।"(योहन 15:13)

महाधर्माध्यक्ष कोस्टा ने कहा, “हम संत पापा फ्राँसिस के हाल के तीन पाठों को हमारे विश्वास को नवीनीकृत करने की सलाह के रूप में ले सकते हैं।“ यदि एक अंग को पीड़ा होती है, तो उसके साथ सभी अंगों को पीड़ा होती है और यदि एक अंग को सम्मान किया जाता है तो उसके साथ सभी अंग आनंद मनाते हैं।(1 कुरिन्थियों 12:26), महाधर्माध्यक्ष ने कहा कि हम ख्रीस्त के अनुयायी के रुप में हम उसके शरीर के अंग बन गये हैं। इसलिए हम उन लोगों के प्रति उदासीन नहीं हो सकते जो मसीह में विश्वास करते हैं। यदि हमारे शरीर का एक हिस्से में चोट लगती है, तो शरीर के पूरे हिस्से को भी दुःख होगा इसलिए कलीसिया में दूसरों के प्रति उदासीन होने के लिए कोई जगह नहीं है "मनुष्य के रूप में हमारी कमजोरी के कारण, कभी-कभी हम उदासीन हो जाते हैं, उस समय हमारा प्यार भी ईश्वर के लिए कमजोर हो जाता है। परंतु जो सचमुच में ईश्वर में विश्वास करते हैं और दूसरों के प्रति दयालु हैं ईश्वर उन्हें आशीर्वाद देंगे। हम पवित्र गुरुवार उस घटना को याद करेंगे जब येसु ने अपने शिष्यों के पैर धोये थे।"


(Margaret Sumita Minj)

19/03/2018 16:55