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कलीसिया \ भारत की कलीसिया

भारतीय युवा ख्रीस्तीयों ने अफवाहों की परवाह नहीं की

खजूर रविवार जुलुस में भाग लेते युवा - EPA

15/03/2018 15:49

नई दिल्ली, बृहस्तपतिवार, 15 मार्च 2018 (ऊकान) : पूना के एक प्रमुख विद्यालय द्वारा किए गए एक अध्ययन में, सेक्स और पैसा से जुड़े घोटालों के बावजूद भारत में ज्यादातर युवा ख्रीस्तीय अपनी कलीसिया  पर गर्व करते हैं। हालांकि, दक्षिणी भारत के लगभग आधे उत्तरदाताओं ने कहा, कि कलीसिया द्वारा किये गये ऐसे घोटालों की से वे "शर्मिंदा" थे।

26 राज्यों के 11 अलग-अलग भाषा बोलने वाले 5,300 युवा लोगों के सर्वेक्षण किए गए। सर्वेक्षण के अनुसार तीन भारतीय ख्रीस्तीय युवकों में से केवल एक ही युवक के जीवन का उद्देश्य ऊँचा है और जीवन का अर्थ पाने में जरुरी नहीं कि शिक्षा मददगार हो।

एक तिहाई से ज्यादा युवाओं के जीवन का उद्देश्य निम्न है जबकि एक तिहाई युवाओं के जीवन उद्देश्य औसत है।

जेसुइट धर्मसंघियों द्वारा संचालित ज्ञान-दीप विद्यापाठ सेमिनरी में दर्शनशास्त्र के छात्रों ने दो शोधकर्ताओं, जेसुइट फादर दिनेश ब्रागांज़ा और होली क्रॉस फादर शिजु जोसेफ की देखरेख में सामाजिक विज्ञान विभाग द्वारा यह अध्ययन किया गया।

फादर ब्रागांजा ने बताया कि आने वाले अक्टूबर में होने वाली धर्माध्यक्षों की महासभा का विषय "युवा लोग, विश्वास और बुलाहट की आत्म-परख" से प्रेरित होकर विद्यार्थियों ने सर्वेक्षण किया।

दर्शनशास्त्र के 94 छात्रों ने पूरे भारत के 2,933 युवाओं का साक्षात्कार किया था और 2,335 युवाओं ने ऑनलाइन सर्वेक्षण में हिस्सा लिया। जिसमें अधिकांश उत्तरदाता (93 प्रतिशत) काथलिक थे।

अध्ययन से पता चला कि युवाओं के बीच उद्देश्य की भावना में सुधार लाने में शिक्षा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।"लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि, उच्च शिक्षा के बावजूद , एक चौथाई उत्तरदाताओं के जीवन का उद्देश्य निम्न था। लगभग 78 प्रतिशत बेरोजगार युवाओं के जीवन का उद्देश्य निम्न या औसत था। अतः कलीसिया को इस पर गंभीरता से विचार करनी चाहिए।"

अध्ययन के निदेशकों ने कहा कि  80% युवाओं का मानना हैं कि कलीसिया के अधिकारी उनपर विश्वास करते हैं और निर्णय भी उनके साथ परामर्श लेकर ही लिया गया। "यह धारणा ... युवा लोगों की सबसे बड़ी भविष्यवाणी थी,  कि वे कलीसिया के सदस्य होने का गर्व करते हैं।"

उन्होंने यह भी पाया कि कलीसिया आज यौन और वित्तीय घोटालों तथा लोकधर्मियों के विश्वास में कमी की बड़ी समस्याओं का सामना कर रही है।

हैदराबाद के काथलिक युवा नेता अभिलाश रेड्डी ने कहा कि केवल कुछ लोग घोटालों के लिए जिम्मेदार हैं और युवा लोग जानते हैं कि पूरी कलीसिया को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है।

"जो भी हो, मैं कलीसिया पर गर्व करता हूँ और करता रहूँगा।" भारतीय काथलिक युवा आंदोलन के उपाध्यक्ष रेड्डी ने कहा।

कोलकाता की युवा नेता मेरी मार्ग्रेट ने कहा, मेरी ही तरह अनेक युवा लोग कलीसिया में हो रहे घोटालों को "काथलिक विश्वास में परीक्षा" के रुप में लेते हैं।


(Margaret Sumita Minj)

15/03/2018 15:49