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विश्व के साथ संवाद करती संत पापा एवं कलीसिया की आवाज़

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येसु चाहते हैं कि हम उन्हें प्यार करने दें

पाप स्वीकार संस्कार में भाग लेते संत पापा - AP

10/03/2018 13:39

वाटिकन सिटी, शनिवार, 10 मार्च 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने शुक्रवार 9 मार्च को संत पेत्रुस महागिरजाघर में पश्चाताप की धर्मविधि का अनुष्ठान करते हुए ̎ ̎प्रभु के लिए 24 घंटे ̎ प्रार्थना दिवस का उद्घाटन किया।  

प्रार्थना हेतु संत पापा के आह्वान का प्रत्युत्तर देते हुए हज़ारों विश्वासियों ने धर्मविधि में भाग लिया। धर्मविधि में प्रवचन देते हुए संत पापा ने संत मती रचित सुसमाचार एवं संत योहन के पत्र से लिए गये पाठों पर चिंतन किया जिनमें ईश्वर के प्रेम पर प्रकाश डाला गया है।

संत पापा ने कहा, ̎संत योहन के शब्दों में, हमारे लिए कितने महान आनन्द एवं सांत्वना की बात कही गयी है। ̎पिता ने हमें कितना प्यार किया है। हम ईश्वर की संतान कहलाते हैं और हम वास्तव में वही हैं। हम इतना ही जानते हैं कि जब ईश्वर का पुत्र प्रकट होगा तो हम उसके सदृश्य बन जायेंगे। उससे भी बढ़कर हम उनके प्रेम की महानता को पहचान लेंगे। ( 1यो. 3:1-10.19-22).  इतना ही नहीं, ईश्वर का प्रेम हमारी कल्पना के परे है, यह हमारे किसी भी पाप से परे जा सकता है जिसकी कीमत हमारी अंतःकरण को चुकाना पड़ता है। उनका प्रेम असीम है जिसकी कोई सीमा नहीं। यह उन सभी बाधाओं को पार कर सकता है जिसको हम भय के कारण दूसरों के सामने लाते ताकि वे हमारी स्वतंत्रता को समाप्त न कर दें।

संत पापा ने कहा कि हम जानते हैं कि पाप हमें ईश्वर से दूर कर देता है। वास्तव में, पाप एक ऐसा रास्ता है जो हमें ईश्वर से दूर ले जाता किन्तु इसका अर्थ यह नहीं है कि ईश्वर हमसे दूर चले जाते हैं। कमजोरी एवं संदेह की स्थिति जो पाप से उत्पन्न होती है यह भी एक कारण है जिसके द्वारा ईश्वर हमारे नजदीक रहते हैं।

संत पापा ने इस बात को स्पष्ट किया कि प्रेरित हमें आश्वस्त करते हैं कि हमारे अंतःकरण को हमेशा बिना किसी संदेह के पिता के प्रेम पर भरोसा रखना चाहिए क्योंकि ईश्वर हमारे अंतःकरण से बड़े हैं और वे सब कुछ जानते हैं। (पद. 20)

उनकी कृपा हममें लगातार क्रियाशील है, हमारे हृदय को बल प्रदान करने के लिए ताकि उनका प्रेम, हमारे जीवन में उनकी उपस्थिति को अस्वीकार करने के द्वारा किये गये पाप के बावजूद कभी कम न हो।

आशा ही है जो हमें उस समय भी सचेत करती है जब हमारा जीवन अपनी दिशा खो देता है। संत पेत्रुस के साथ यही हुआ, जब मूर्गे ने बांग दी तो उसे येसु का कथन याद आया, मूर्गे के बांग देने के पूर्व तुम मुझे तीन बार अस्वीकार करोगे और वह बाहर जाकर फूटफूट कर रोने लगा। (मती. 26:74-75) मूर्गे की बांग ने उसे प्रेरित किया जो किंकर्तव्यविमूढ़ की स्थिति में था, जिसके द्वारा उसने येसु के शब्दों को याद किया। पेत्रुस ने आँसू बहाते हुए ईश्वर को पहचाना, जिसने ख्रीस्त में अपने को प्रकट किया था। जिन्हें घूंसा मारा गया था और जिसका अपमान किया गया था और जिसको स्वयं उसने अस्वीकार किया था वे अब उन्हीं के लिए अपना  बलिदान करने वाले हैं। पेत्रुस जो येसु के लिए अपनी जान देना चाहता था अब महसूस किया कि येसु की मृत्यु को स्वीकार करना आवश्यक है। पेत्रुस येसु को सिखलाना चाहता था, वह उनके आगे चलना चाहता था जबकि येसु उनके लिए मरने जा रहे हैं। पेत्रुस इसे नहीं समझा था और वह इसे समझना भी नहीं चाह रहा था किन्तु अब प्रभु का प्रेम पेत्रुस के सामने था। अंततः उसे समझ में आ गया कि प्रभु उसे प्यार करते हैं और वे उनसे मांग करते हैं कि वह भी उन्हें प्यार करे। पेत्रुस ने अनुभव किया कि वह उनसे प्रेम किये जाने से हमेशा इंकार किया था जिसके कारण वह उन्हें पूरी तरह प्रेम करना नहीं चाहता था।

संत पापा ने कहा, यह सचमुच कठिन है कि हम अपने आप को प्रेम किये जाने दें। हमारी चाह हमेशा रहती है कि हमारे जीवन का कुछ हिस्सा मुक्त हो जिसमें हम किसी के प्रति कृतज्ञ बनने से बच सकें जबकि हम पूरी तरह ऋणी हैं क्योंकि ईश्वर ने हमें पहले प्रेम किया है और अपने प्रेम के द्वारा उन्होंने हमें पूरी तरह बचाया लिया है।

संत पापा ने विश्वासियों का आह्वान किया कि वे ईश्वर से उनके प्रेम की महानता को समझने की कृपा के लिए प्रार्थना करें जो हमारे हर पाप को मिटा देते हैं। हम सदा उनके प्रेम द्वारा शुद्ध किये जाएँ ताकि उनके सच्चे प्रेम को समझ सकें। 


(Usha Tirkey)

10/03/2018 13:39