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संयुक्त राष्ट्र संघ के समक्ष परमधर्मपीठ ने उठाया बच्चों के अधिकारों का मुद्दा

सिरिया के अज़ाज नगर स्थित शरणार्थी शिविर में बच्चे, 26.01.2018 - AFP

06/03/2018 11:48

जिनिवा, मंगलवार, 6 मार्च 2018 (रेई, वाटिकन रेडियो): जिनिवा में परमधर्मपीठ के स्थायी पर्यवेक्षक और वाटिकन के वरिष्ठ महाधर्माध्यक्ष इवान यूरकोविट्स ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र संघीय मानवाधिकार समिति के 37 वें सत्र में बच्चों के अधिकारों का मुद्दा उठाया।

मानवीय परिस्थितियों में बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा पर मानवाधिकार सम्बन्धी संयुक्त राष्ट्र संघीय उच्चायुक्त की रिपोर्ट पर टीका करते हुए महाधर्माध्यक्ष यूरकोविट्स ने इस बात पर गहन चिन्ता व्यक्त की कि विश्व के 25% बच्चे मानवीय आपदाओं से पीड़ित हैं।  

2017 की रिपोर्ट में बताया गया है कि विश्व के 53 करोड़ पचास लाख बच्चे मानवीय आपदाओं से प्रभावित होते हैं।

उन्होंने कहा, “नित्य बढ़ती मानवीय आपदाएँ जैसे युद्ध, स्थानीय संकट एवं प्रकृतिक प्रकोप अनेकानेक लोगों और विशेष रूप से बच्चों को प्रभावित करते हैं जो हमारा भविष्य हैं। परिणामस्वरूप, शरणार्थी, आप्रवासी, आन्तरिक रूप से विस्थापित एवं अनाथ बच्चों की संख्या में नित्य वृद्धि हो रही है। इनमें अधिकांश वे बच्चे हैं जो विश्व के निर्धनतम क्षेत्रों में निवास करते हैं।“

इस बात की ओर भी महाधर्माध्यक्ष यूरकोविट्स ने ध्यान आकर्षित कराया कि इनमें से अनेक बच्चे बेईमान अपराधिक गुटों द्वारा मानव तस्करी के शिकार बनते, अंगों के लिये शोषित किये जाते तथा सेना में भर्ती होने के लिये बाध्य किये जाते हैं।    

महाधर्माध्यक्ष यूरकोविट्स ने कहा कि परमधर्मपीठ और काथलिक कलीसिया इस तथ्य की ओर अन्तरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित कराना चाहती है कि हमारे बच्चों की प्रतिष्ठा ख़तरे में पड़ी हुई है तथा हर मानवीय आपदा के समय यह सुनिश्चित्त किया जाना चाहिये कि हर बच्चे को सुरक्षा मिले। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के भयावह अनुभव बच्चों के अस्तित्व को प्रभावित करते हैं तथा, "उनके मानसिक, सामाजिक और पर्यावरणीय विकास के साथ-साथ उनके शारीरिक विकास में भी बाधा बनते हैं।"

सभी बच्चों के लिये महाधर्माध्यक्ष ने जन्म के समय पंजीकरण, नागरिकता, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा तथा प्रत्येक बच्चे की प्रतिष्ठा के सम्मान का आह्वान किया।


(Juliet Genevive Christopher)

06/03/2018 11:48