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संत पापा फ्राँसिस \ अंजेलुस व संदेश

येसु द्वारा मंदिर से बिक्री करने वालों के निष्कासन की घटना की व्याख्या

- AP

05/03/2018 14:44

वाटिकन सिटी, सोमवार, 5 मार्च 2018 (रेई): वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 4 मार्च को, संत पापा फ्रांसिस ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया, देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, "अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।"

आज का सुसमाचार पाठ, संत योहन रचित सुसमाचार में येरूसालेम मंदिर से बिक्री करने वालों के निष्कासन की घटना को प्रस्तुत करता है। (यो.2,13-25) उन्होंने इसके लिए एक रस्सी के कोड़े का प्रयोग किया एवं मेजों को उलट दी तथा कहा, "मेरे पिता के घर को बाजार मत बनाओ।" (पद.16). संत पापा ने कहा कि पास्का के पूर्व येसु का यह कड़ा व्यवहार भीड़ को बहुत अधिक प्रभावित किया जबकि धर्मगुरूओं एवं आर्थिक लाभ में खतरा महसूस करने वालों में विरोध उत्पन्न किया। किन्तु हम इस कार्रवाई की व्याख्या कैसे करें? उन्होंने कहा, निश्चय ही यह हिंसक कार्रवाई नहीं थी, जो इस बात से स्पष्ट है कि उन्होंने सार्वजनिक सुरक्षा गार्डों के विरूद्ध जनता को नहीं उकसाया बल्कि उनके इस खास कार्य को लोगों ने एक नबी के कार्य के रूप में देखा गया जो ईश्वर के नाम पर दुरुपयोग एवं ज्यादती का विरोध करते हैं। यहाँ जो सवाल खड़ा हुआ वह अधिकारियों का था। वास्तव में, यहूदियों ने येसु से चिन्ह की मांग की थी, आप हमें कौन सा चमत्कार दिखा सकते हैं? (पद.18) अर्थात् तुम किस अधिकार से ये सब कर रहे हो, मानो कि वे यह दिखाने को कह रहे हों कि क्या उन्होंने ऐसा ईश्वर के नाम पर किया है?

ईश्वर के घर के शुद्धिकरण हेतु येसु की कार्रवाई की व्याख्या के लिए उनके शिष्यों ने स्तोत्र ग्रंथ 69 के एक पद का हवाला दिया। स्तोत्र कहता है, "तेरे घर का उत्साह मुझे खा जायेगा।" (पद.10) यह स्तोत्र शत्रु की घृणा के कारण संकट की स्थिति में मदद हेतु एक आह्वान है और ऐसी ही स्थिति में येसु अपने दुःखभोग को पार करने वाले हैं। पिता एवं उनके घर का उत्साह उन्हें क्रूस तक ले जाएगा। यह प्रेम का उत्साह है जो उन्हें आत्म बलिदान के लिए प्रेरित करता है न कि गलत मनसा से ईश्वर की सेवा हेतु हिंसा का सहारा लेने का। वास्तव में, उनके अधिकार के प्रमाण का चिन्ह है उनकी मृत्यु एवं उनका पुनरुत्थान। ईसा ने उन्हें उत्तर दिया, "इस मंदिर को ढाह दो और मैं इसे तीन दिनों के अंदर फिर खड़ा कर दूँगा।" (पद.19) सुसमाचार लेखक यहाँ गौर करते हैं कि येसु तो अपने शरीर रूपी मंदिर के बारे बोल रहे थे। (पद. 21) येसु के पास्का के साथ एक नये मार्ग की शुरूआत हुई, एक नये मंदिर की जो प्रेम का मार्ग है और नये मंदिर वे स्वयं हैं।  

संत पापा ने विश्वासियों से कहा कि आज के सुसमाचार में वर्णित येसु का मनोभाव हमसे आग्रह करता है कि हम अपना जीवन फ़ायदे एवं रूचि के लिए नहीं किन्तु ईश्वर की महिमा के लिए जीयें जो प्रेम हैं। हम येसु के उन कड़े शब्दों को सदा मन में रखने के लिए बुलाये जाते हैं, "मेरे पिता के घर को बाजार मत बनाओ।" (पद. 16).

उन्होंने कहा कि यह अत्यन्त बुरा है जब कलीसिया ईश्वर के घर को बाजार बनाने के मनोभाव में फिसल जाती है। ये वाक्य हमें अपनी आत्मा को खतरे में डालने से भी बचाता है जिसमें ईश्वर का निवास है। बाजार का वह जगह जहाँ से हम उदार प्रेम एवं एकात्मता द्वारा लगातार लौटने का प्रयास करते हैं। येसु की यह शिक्षा हर समय के लिए है न केवल कलीसियाई समुदाय के लिए किन्तु व्यक्तियों, समुदायों एवं समाज के सभी लोगों के लिए है। अच्छाई का लाभ उठाने के प्रलोभन में पड़ना, एक सहज प्रवृति के समान लगता है और व्यक्तिगत लाभ के लिए आवश्यक भी किन्तु इसमें गंभीर खतरा है जब ईश्वर की पूजा मनुष्य के फायदे के लिए की जाती है। यही कारण था कि येसु ने वहाँ कड़े काररवाई का सहारा लिया ताकि उस अनन्त खतरे से हमें अवगत करा सकें।

संत पापा ने माता मरियम से प्रार्थना करते हुए कहा कि धन्य कुँवारी मरियम हमें सहायता दे कि हम चालीसा काल में ईश्वर को हमारे जीवन के प्रभु के रूप में पहचानने के लिए एक उत्तम अवसर के रूप में समर्पित कर सकें, हमारे हृदय से हर प्रकार की मूर्तिपूजा एवं कार्यों को दूर कर सकें।

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

देवदूत प्रार्थना के उपरांत रोम, इटली तथा विश्व के विभिन्न हिस्सों से आये सभी तीर्थयात्रियों एवं पर्यटकों का अभिवादन किया, खासकर, उन्होंने स्पेन के ग्रानादा, मालागा एवं कोरदोबा से आये तीर्थयात्रियों को सम्बोधित किया।

अंत में उन्होंने विभिन्न पल्ली दलों का अभिवादन किया जो मिलान, नेपल्स, विचेंत्सा आदि धर्मप्रांतों से आये थे। उन्होंने उन्हें प्रोत्साहन दिया कि वे सुसमाचार का साक्ष्य आनन्द से दें, विशेषकर, अपने ही दलों के बीच।

तत्पश्चात प्रार्थना का आग्रह करते हुए उन्होंने सभी को शुभ रविवार की मंगलकामनाएं अर्पित की तथा समुदाय से विदा लिया।


(Usha Tirkey)

05/03/2018 14:44