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23 फरवरी की प्रार्थना एवं उपवास के केंद्र में कोंगो एवं दक्षिणी सूडान

कोंगो के शरणार्थी - REUTERS

22/02/2018 15:56

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 22 फरवरी 18 (रेई): संत पापा फ्राँसिस ने 23 फरवरी को प्रार्थना एवं उपवास का दिन घोषित किया है जिसमें मुख्य रूप से कोंगो गणराज्य एवं दक्षिणी सूडान के लिए विशेष प्रार्थना अर्पित की जाएगी।

कोंगो अफ्रीका का दूसरा बड़ा देश है। यह प्राकृतिक साधनों का धनी है फिर भी मानव विकाश की दृष्टिकोण से एक पिछड़ा देश है।

दक्षिणी सूडान में भी यही स्थिति है जो महत्वाकांक्षा के कारण राजनीतिक युद्ध का अखाड़ा बन गया है। यह स्थित जारी है, लेकिन जब से यहाँ विभिन्न जनजातियों के नेता हुए हैं इसे एक मजबूत जातीय विशेषता माना जा रहा है, जिसके साथ अब विभिन्न सैन्य गुटों को नियंत्रण से बाहर रखा गया है। इस तरह एक "मूक नरसंहार" जगह ले जा रहा है और चूँकि वहाँ कोई कानून एवं दण्ड मुक्ति की व्यवस्था नहीं है लोग अपराध को भी न्यायसंगत ठहरा रहे हैं। लोग भूखे हैं तथा उन्हें विभिन्न त्रासदी के अनुभवों से गहरा आघात मिला है। इन सबके कारण मानव जीवन का मूल्य निर्व्यक्तीकरण एवं संबंधों में दुर्बलता की स्थिति की ओर बढ़ रहा है। नरसंहार में बच्चे बूढ़े किसी को नहीं छोड़ा जा रहा है।

कोंगो तथा दक्षिणी सूडान दोनों ही देश मुसीबत, भूख, हिंसा और अस्थायित्व की कुंडली के केंद्र में हैं। जिसके कारण संत पापा ने उनके लिए विशेष प्रार्थना की मांग की है।

23 फरवरी को सभी ख्रीस्तीय विश्वासी संत पापा के इस आह्वान का उत्तर देते हुए आशा उत्पन्न करने हेतु बुलाये गये हैं। सबसे बढ़कर उन लोगों के दारुण रूदन को सुनने के लिए जो हमसे, नहीं भूला दिये जाने का आग्रह कर रहे हैं।

सिस्टर यूजेनिया ब्राक्वेहाइस कोनेसा, कोंगो की वर्तमान स्थिति के बारे बतलाते हुए कहती हैं कि आंतरिक कारण जैसे सत्ता की चाह, भ्रष्टाचार, लालच एवं आदिवासी संघर्ष के कारण कोंगो की स्थिति बदतर हो गयी है किन्तु इसकी बिगड़ी हालत का कारण अंतरराष्ट्रीय लाभ भी है क्योंकि हर कोई "केक का एक टुकड़ा चाहता है।" उन्होंने कहा कि मोबाईल और कंप्यूटर के निर्माण के लिए इस्तेमाल होने वाले कोल्टन - खनिज की बात बहुत हो रही है, जो देश के पूर्वी भाग में संघर्ष का मुख्य मुद्दा है किन्तु इसके साथ कई अन्य कारण भी हैं।

सिस्टर यूजेनिया जो कोंगो गणराज्य के दक्षिण स्थित कानजेनजे गाँव में 2009 से रह रही हैं उनका विश्वास है कि शिक्षा ही लोगों में आशा जागृत कर सकती है। शिक्षा जैसा कि संत पापा कहते हैं एक ऐसा रास्ता है जो उत्पादन प्रक्रिया की ओर प्रेरित करती न कि जगह घेर लेती है।

देश में करीब 8 मिलियन निवासी हैं जिनमें से अधिकतर लोग जवान हैं। अतः सिस्टर का विश्वास है कि पीढियों के बीच मुलाकात एवं इतिहास के अध्ययन के द्वारा तथा ईश्वर की कृपा एवं सहायता से लोग अपने बीच अच्छी चीज उत्पन्न कर सकेंगे। उनका मानना है कि यदि लोग लोकतंत्र का चुनाव करेंगे तो वे भविष्य की समृद्धि एवं शांति की आशा अवश्य प्राप्त करेंगे। 


(Usha Tirkey)

22/02/2018 15:56