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संत पापा फ्राँसिस \ मुलाक़ात

वयस्कों की मजबूरी और जवाब हीन सवाल

प्रतीकात्मक तस्वीर - ANSA

20/02/2018 15:54

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 20 फरवरी 2018 (वाटिकन न्यूज़):"कुछ माता-पिता मजबूर हैं" "देखभाल को बढ़ावा उन कठिन परिस्थितियों में उनके सहायक हो सकते हैं।" उक्त बात संत पापा फ्राँसिस ने 4 जनवरी को रोमानिया के 30 बच्चों से वाटिकन में मुलाकात करते हुए कही।  

वाटिकन प्रेस कार्यालय द्वारा 20 फरवरी को प्रकाशित जानकारी में बतलाया गया है कि संत पापा फ्राँसिस ने रोमानिया के 30 बच्चों से मुलाकात की थी जो सामाजिक रूप से बहिष्कार के खतरे में हैं तथा जिनकी मदद एक ग़ैरसरकारी संगठन "पी डी पी शिक्षा में मुख्यपात्र" करती है।  

जानकारी के अनुसार इस मुलाकात में बच्चों ने संत पापा से कई सवाल किये, जो "क्यों" के सवाल  से भरे थे जिनका उत्तर उन्होंने बड़े ही कोमलता से दिया।  

दल में से 21 वर्षीय एक युवक ने संत पापा से प्रश्न किया, "मेरी माँ मुझे क्यों स्वीकार नहीं करती? उसने मुझे क्यों एक अनाथालय में छोड़ दिया है? मेरी माँ मुझसे अच्छा व्यवहार नहीं करती और मैं छोड़ दिया गया हूँ।" इसके उत्तर में संत पापा ने उसे समझाते हुए कहा कि यह उसकी माँ की गलती नहीं है बल्कि वह मजबूर है। यह परेशानी जिसको वह झेल रहा है, सामाजिक अन्याय का परिणाम है जो छोटे, कमजोर एवं आध्यात्मिक रूप से गरीब लोगों को पीसता है। जो हृदय को कठोर बना देता और उसे उस चीज के लिए भड़काता है जो कि असम्भव लगता, यानी एक माँ अपने बच्चे को त्याग देती है। संत पापा ने उस युवक से कहा, "तुम्हारी माँ तुमसे प्यार करती है किन्तु वह नहीं जानता कि उसे किस तरह व्यक्त करे। वह उसे व्यक्त इसलिए नहीं कर पाती है क्योंकि उसका जीवन कठिन है, वह अन्याय के जाल में है। संत पापा ने उसे अपनी प्रार्थना का आश्वासन दिया ताकि वह एक दिन अपनी माँ के प्यार को महसूस कर सके।  

संत पापा ने उस सवाल के उत्तर में कि क्यों माता-पिता केवल स्वस्थ बच्चों को ही प्यार करते और बीमार बच्चों को नहीं, कहा कि शायद उन्हें कोई ऐसा व्यक्ति नहीं मिला जो उस कमजोरी से ऊपर उठने एवं उस पर विजय पाने में उन्हें मदद करे। संत पापा ने कहा कि कमजोर माता-पिता के लिए उन्हें अपने जीवन को नहीं कोसना चाहिए बल्कि ईश्वर को इसलिए धन्यवाद देना चाहिए कि वे अपने माता-पिता की मजबूरी में उनकी मदद कर सकते हैं।   

संत पापा ने रोमानिया के बच्चों को यह भी बतलाया कि कई ऐसे सवाल हैं जिनका कोई उत्तर नहीं है। उदाहरण के लिए, हमारा भाग्य क्यों ऐसा है? हम उन्हें केवल देख सकते, महसूस कर सकते एवं उनके लिए आँसू बहा सकते हैं।

संत पापा ने कहा, "इनका उत्तर केवल ईश्वर दे सकते हैं। येसु ने एक बार, जब उनसे पूछा गया था कि एक जन्म से अंधे बच्चे के लिए किसको दोष दिया जाना चाहिए, अपने शिष्यों को बतलाया था कि वह अंधा इसलिए है ताकि इसके द्वारा ईश्वर की महिमा प्रकट हो।" संत पापा ने कहा कि इस तरह ईश्वर हमारे दुःख, बीमारी और पीड़ा से हमें चंगा करना चाहते हैं।   

जब हम गलती करते और पाप में पड़ जाते हैं तो हमें क्यों गिरजा जाना चाहिए? इस सवाल के उत्तर में संत पापा ने कहा कि गिरजाघर में हम अपने आप को ईश्वर के सम्मुख वैसे ही प्रस्तुत करते हैं जैसे हम हैं। गिरजाघर में प्रवेश करते हुए हमें कहना चाहिए, "प्रभु में प्रस्तुत हूँ। आप मुझे प्यार करते हैं, मैं एक पापी हूँ। मुझ पर दया कीजिए।" येसु कहते हैं कि यदि हम ऐसा करते हैं, हम क्षमा प्राप्त कर घर लौटते हैं। हम पहले जैसा नहीं रह जाते बल्कि ईश्वर हमारे हृदय में कार्य करते और उनका प्रेम हमारे हृदय में हमारे स्वार्थ का स्थान ले लेता है। 


(Usha Tirkey)

20/02/2018 15:54