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संत पापा फ्राँसिस \ मुलाक़ात

परमधर्मपीठीय सर्दिनी प्रांतीय सेमिनरी के छात्रों को संत पापा का संदेश

प्रतीकात्मक तस्वीर - AFP

17/02/2018 14:47

वाटिकन सिटी, शनिवार, 17 फरवरी 2018 (रेई): संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार, 17 फरवरी को वाटिकन स्थित क्लेमेनटीन सभागार में, परमधर्मपीठीय सर्दिनी प्रांतीय सेमिनरी की स्थापना की नब्बेवीँ सालगिरह पर वहाँ के प्रशिक्षकों एवं गुरूकुल छात्रों से मुलाकात की। 

सेमिनरी की स्थापना इताली काथलिक धर्माध्यक्षों द्वारा संत पापा पीयुस ग्यारहवें की मांग पर की गयी है ताकि खासकर, इटली के मध्य-दक्षिण एवं द्वीपों से पुरोहिताई की तैयारी करने वाले गुरूकुल छात्रों को मदद मिल सके।

संत पापा ने उन्हें सम्बोधित कर कहा, "इस अवसर पर ईश्वर की स्तुति करने में मैं आप लोगों के साथ शामिल होना चाहता हूँ जिन्होंने इन वर्षों में अपनी कृपा से कई पुरोहितों के जीवन को येसु के पवित्र हृदय को समर्पित, इस शिक्षण संस्थान द्वारा प्रशिक्षित किया है। इसने स्थानीय कलीसिया एवं विश्व व्यापी कलीसिया की सेवा हेतु कई समर्पित पुरोहितों को प्रदान किया है। उन्होंने ने कामना की कि यह यादगारी बुलाहट के प्रेरितिक देखभाल को नयी प्रेरणा प्रदान करे।"

संत पापा ने गुरूकुल छात्रों को सम्बोधित कर कहा, "प्रिय गुरूकुल छात्रो, आप एक पुरोहित के रूप में, भविष्य में, प्रभु की दाखबारी में काम करने हेतु तैयारी कर रहे हैं। पुरोहित जो मिलकर काम करना जानता है, चाहे वह अलग धर्मप्रांत ही क्यों न हो, खासकर, सर्दीनिया प्रांत के लिए यह महत्वपूर्ण है कि आप विश्वास में सुदृढ़ बने रहें एवं ख्रीस्तीय धार्मिक परम्पराओं का पालन करें। यह इसलिए भी आवश्यक है क्योंकि मानसिक संकीर्णता की स्थिति में विभिन्न धर्मप्रांतीय समुदायों के बीच संबंध पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है।"

संत पापा ने ग़रीबों का विशेष ख्याल करने का आग्रह करते हुए कहा कि भौतिक एवं आध्यात्मिक गरीबी पर ध्यान देना हमेशा आवश्यक है और आज यह अधिक महत्वपूर्ण हो गया है कि पुरोहित, ग़रीबों का विशेष ख्याल रखें, उनका साथ दें तथा सादगी की जीवन शैली अपनाएँ ताकि उसके द्वारा लोग कलीसिया को अपना पहला घर समझ सकें। संत पापा ने उन्हें प्रोत्साहन दिया कि वे प्रशासक नहीं बल्कि लोगों के पुरोहित बनने हेतु एक सेवक के रूप में अपने को तैयार करें। उन्होंने कहा कि उन्हें ईश्वर के व्यक्ति बनना है जो शांत और पारदर्शी जीवन व्यतीत करता, अतीत की पुरानी यादों के लिए उदास नहीं होता, बल्कि कलीसिया के स्वस्थ परम्पराओं के अनुरूप आगे देख पाने के लिए सक्षम होता है।

संत पापा ने प्रशिक्षण के इस काल में गुरूकुल छात्रों को शुभकामनाएं दीं कि वे प्रभु की उस कृपा के प्रति हमेशा सचेत रहें जिसको प्रभु ने सब कुछ त्याग कर उनका अनुसरण करने का आह्वान करते हुए प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि उनपर सर्दीनिया की कलीसिया की आशा है। प्रशिक्षण की इस यात्रा में वे आनन्द, दृढ़ता एवं गंभीरता से आगे बढ़ें ताकि प्रेरितिक जीवन को अपना सकें जो आज सुसमाचार प्रचार की मांग का उत्तर दे सके तथा ख्रीस्त उसकी कलीसिया, अपनी बुलाहट एवं मिशन के प्रति वफादार रह सकें।

संत पापा ने गुरूकुल छात्रों को बतलाया कि इस स्कूल में निष्ठावान बनने हेतु उन्हें सबसे पहले प्रार्थना का सहारा लेना चाहिए, विशेषकर, धर्मविधि के माध्यम से। यूखरिस्त में भाग लेकर एवं पवित्र धर्मग्रंथ के पाठ एवं उस पर चिंतन द्वारा ख्रीस्त के साथ घनिष्ठ संबंध स्थापित करना है। संत पापा ने उन्हें इस बात से अवगत कराया कि ख्रीस्त के साथ संबंध के बिना प्रेरिताई में सफल नहीं हो सकते हैं क्योंकि उनके बिना हम कुछ भी नहीं कर सकते।

संत पापा ने गुरूकुल के शिक्षकों एवं अधिकारियों को सम्बोधित कर कहा कि सेमिनरी की इस यात्रा में उनकी भी बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। पुरोहिताई के मिशन की मांग को पूरी करने के लिए वे सच्चाई एवं विवेक से काम करने हेतु बुलाये जाते हैं। प्रशिक्षण के इस कठिन काम में वे याजकों के प्रशिक्षण की गुणवत्ता बढ़ाने एवं विभिन्न कलीसियाई समुदायों के बीच एकता लाने के लिए प्रेरित किये जाते हैं।

संत पापा ने उन्हें माता मरियम के संरक्षण में समर्पित करते हुए शुभकामनाएं अर्पित की।


(Usha Tirkey)

17/02/2018 14:47