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संत पापा फ्राँसिस \ मिस्सा व प्रवचन

चालीसा काल रूकने, देखने एवं ईश्वर की कोमलता की ओर लौटने का अवसर, संत पापा

राखबुध को माथे पर राख लगाते संत पापा - ANSA

15/02/2018 15:51

रोम, बृहस्पतिवार,15 फरवरी 2018 (रेई): संत पापा फ्राँसिस ने 14 फरवरी को रोम के संत सबीना महागिरजाघर में ख्रीस्तयाग अर्पित कर राखबुध मनाया। परम्परा के अनुसार ख्रीस्तयाग के पूर्व, संत अनसेलेम महागिरजाघर में पश्चाताप की धर्मविधि का अनुष्ठान करने के उपरांत, संत पापा शोभायात्रा के साथ संत सबिना महागिरजाघर गये, जहाँ उन्होंने राख की आशीष की तथा उसे विश्वासियों के माथे पर अंकित कर राखबुध की धर्मविधि पूरी की। 

प्रवचन में उन्होंने विश्वासियों को सचेत करते हुए उनका आह्वान किया कि वे अविश्वास, उदासीनता और इस्तीफा के दानव पर विजय पायें तथा उस पिता की ओर बिना भय वापस लौटें जो बाहें फैलाये बड़ी उत्सुकता से हमारा इंतजार करते हैं और जो करुणा के धनी हैं।

संत पापा ने कहा कि चालीसा काल थोड़ी देर रूककर येसु ख्रीस्त के सच्चे चेहरे को देखने एवं उसपर चिंतन करने का समय है जो हम प्रत्येक के प्रेम के खातिर क्रूसित हुए एवं अपने पिता के पास वापस लौटे।

राखबुध जिससे चालीसा काल की शुरूआत होती है संत पापा ने अपने प्रवचन में कहा, "चालीसा काल अपने हर परदे को हटाने, अपने हृदय को येसु के हृदय के साथ धड़कने देने एवं प्रलोभनों पर विजय पाने का एक उपयुक्त समय है।"  

संत पापा ने चालीसा काल हेतु तीन मुख्य बिन्दुओं पर चिंतन किया- रूकना, देखना और लौटना।

उन्होंने कहा, "थोड़ी देर रूकें, अशांत एवं शोर-गुल को पीछे छोड़ें जो हमारी आत्मा को कड़वाहट से भर देते हैं। भाग-दौड़ के लिए मजबूर जीवन को थोड़ा विराम दें जो उसे बिखेरता, विभाजित करता और अंततः ईश्वर प्रदत्त उसके बहुमूल्य समय को नष्ट करता है।"

हम थोड़ी देर रूकें ताकि दिखावे की आवश्यकता महसूस करने और लगातार ‘सूचना पट्ट' में प्रस्तुत होने से बच सकें जो हमें घनिष्ठता और स्मृति के मूल्य को भूलने के लिए मजबूर करता है।

थोड़ी देर रूकें कि अभिमानी दिखावे, क्षणभंगुर और अपमानजनक टिप्पणी से बच सकें जो कोमलता, दया और दूसरों के साथ मुलाकात में सम्मान को भूलने से उत्पन्न होते हैं, खासकर, उनके प्रति जो कमजोर, ठेस, पाप एवं गलती से चिह्नित हैं।

हम थोड़ी देर रूकें, सबकुछ पर नियंत्रित करने की इच्छाशक्ति से बचने, सबकुछ को जानने एवं नष्ट करने की प्रवृति से बचने के लिए, यह जीवन के उपहार एवं हमने जो अच्छी चीजें प्राप्त की हैं उनके लिए कृतज्ञता को नजरअंदाज करने से आता है।  

थोड़ी देर रूकें, उस शोर से बचने के लिए जो हमारे हृदय को कमजोर और भ्रमित करता और जो हमें मौन के फलप्रद एवं रचनात्मक शक्ति को भूलने हेतु मजबूत करता है।

थोड़ी देर रूकें, निष्फल और अनुत्पादक विचारों को बढ़ावा देने वाले मनोभाव से बचने के लिए जो एकाकीपन और आत्मदया से उत्पन्न होता है जिसके द्वारा हम बाहर जाकर दूसरों के दुःख-दर्द को बांटना भूल जाते हैं।

थोड़ी देर रूकें, हर प्रकार के खालीपन से बचने के लिए जो तात्कालिक और क्षणिक है जो हमें अपने मूल से वंचित करता, अपने संबंधों, समुदाय के महत्व तथा हमारी जीवन यात्रा के प्रति चेतना को नष्ट करता है।

हम रूकें ताकि देख सकें और चिंतन कर सकें।

उन चिन्हों को देखें जो उदारता की कमी को दूर करते, जो विश्वास और आशा की लौ को प्रज्वलित रखते। हम उन्हें ईश्वर की कोमलता एवं हमारे बीच लोगों के अच्छे कार्यों में देखें।

हमारे परिवारों के चेहरों को देखें जो जीवन में आगे बढ़ने के लिए कठिन संघर्ष कर रहे हैं और जो अत्यधिक कठिनाइयों के बावजूद अपने घरों में प्रेम की शिक्षा देते हैं।

उन बच्चों एवं युवाओं के चेहरों को देखें जो भविष्य की आशा से भरे हैं जो समर्पण एवं सुरक्षा की मांग करता है।

वयोवृद्धों को देखें जिनके चेहरों पर समय के चिन्ह अंकित हैं जो हमारे पूर्वजों की जीवित स्मृति को प्रकट करते हैं। वे चेहरे ईश्वर की प्रज्ञा को प्रतिबिम्बित करते हैं।

रोगियों एवं उनकी देखभाल करने वालों के चेहरों को देखें जो अपनी नाजुक स्थिति में हमें याद दिलाते हैं कि हर व्यक्ति का मूल्य कभी कम नहीं किया जा सकता।

उन चेहरों को देखें जो पश्चाताप करते हुए अपने गलतियों में सुधार लाना चाहते हैं और जो अपने दुर्भाग्य एवं दुःख से संघर्ष करते हुए आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे हैं। 

क्रूसित प्रेम को देखें एवं उस पर चिंतन करें जो आज भी क्रूस से हमारे लिए आशा प्रदान करते हैं जिन्होंने स्वयं असफलता, निराशा एवं मुसीबत के बोझ का एहसास किया है।

क्रूसित ख्रीस्त के सच्चे चेहरे को देखें और उस पर चिंतन करें जिन्होंने सभी के प्रेम के खातिर दुःख भोगा। उनके चेहरे को देखना चालीसा काल में एक आशा भरा निमंत्रण है ताकि अविश्वास, उदासीनता और इस्तीफा की बुराई पर विजय पाया जा सके। वह चेहरा जो हमें यह घोषित करने के लिए निमंत्रण देता है कि "ईश्वर का राज्य संभव है।"

संत पापा ने कहा कि रूकें, देखें एवं लौटें। बिना भय पिता के घर लौटें जो खुली बाहों से उत्सुकता पूर्वक हमारा इंतजार करते हैं और जो करूणा के धनी हैं। बिना भय हम वापस लौटें ताकि उन लोगों के साथ उत्सव में शरीक हो सकें जिन्हें क्षमा किया गया है। ईश्वर की चंगाई एवं उनके मेल-मिलाप की कोमलता का अनुभव करने के लिए बिना भय लौटें ताकि ईश्वर हमारे पाप के घावों को चंगा कर दें एवं उस प्रतिज्ञा को पूरा करें जिसको उन्होंने हमारे पूर्वजों से किया था, "मैं तुम लोगों को एक नया हृदय दूँगा और तुम में एक नया आत्मा रख दूँगा। मैं तुम्हारे शरीर से पत्थर का हृदय निकालकर तुम लोगों को रक्त और मांस का हृदय प्रदान करूँगा।" (एजे. 36: 26)


(Usha Tirkey)

15/02/2018 15:51