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विश्व के साथ संवाद करती संत पापा एवं कलीसिया की आवाज़

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संत पापा फ्राँसिस का चालीसा संदेश

- AP

06/02/2018 16:48

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 6 फरवरी 2018 (रेई): संत पापा फ्राँसिस ने 2018 के चालीसा काल के लिए अपने संदेश को 6 फरवरी को प्रकाशित किया। चालीसा काल चालीस दिनों का एक ऐसा समय है जब ख्रीस्तीय विश्वासी मानव जाति की मुक्ति हेतु येसु ख्रीस्त के दुखभोग, मृत्यु एवं पुनरुत्थान की याद करते तथा अपने पापों एवं कमजोरियों से ऊपर उठने का प्रयास करते हैं। चालीसा काल के अंत में पास्का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष चालीसा काल का शुभारम्भ 14 फरवरी को होगा।

संत पापा ने संदेश में कहा, "फिर एक बार, प्रभु का पास्का निकट आ गया है। पास्का के लिए हमारी तैयारी में, ईश्वर हरेक साल चालीसे के इस काल में, हमारे मन-परिवर्तन के संस्कारीय चिन्ह के रूप में अपनी कृपा प्रदान करते हैं। चालीसा काल हमारा आह्वान करता एवं हमें प्रोत्साहन देता है कि हम प्रभु के पास पूर्ण हृदय एवं जीवन के हर आयामों से लौट आयें।  

संत पापा के चालीसा काल के संदेश का आधार है, "अधर्म बढ़ने से लोगों में प्रेम भाव घट जाएगा।" (मती.24:12)

संत पापा ने संदेश में कहा, "ये शब्द अंतिम दिनों के संबंध में ख्रीस्त की शिक्षा में प्रकट होते हैं। उन्होंने इन शब्दों को येरूसालेम के जैतून पहाड़ पर उच्चरित किया था जहाँ से येसु का दुःखभोग शुरू हुआ था। यह शिष्यों के एक सवाल का उत्तर था। येसु ने एक बड़ी व्यथा और विकट परिस्थिति जो विश्वासी समुदाय पर आने वाला था उसकी भविष्यवाणी की थी। "बहुत से झूठे नबी प्रकट होंगे और बहुतों को बहकायेंगे। अधर्म बढ़ने से लोगों में प्रेम भाव घट जाएगा।"

झूठे नबी

संत पापा ने कहा कि झूठे नबी "संपेरा" के समान होते हैं जो मानवीय भावनाओं में हेरफेर करते ताकि व्यक्ति को अपने जाल में फंसा लें और उन्हें जहाँ चाहें वहां ले जाएँ। ईश्वर के कितने संतान क्षणिक सुख से मंत्रमुग्ध होकर, उन्हें ही सच्ची खुशी समझ बैठते हैं। कितने पुरुष और महिलाएं धन के ख्वाब में जीते, जो उन्हें केवल क्षुद्र लाभ और हितों के गुलाम बना देता है! कितने लोग सोचते हैं कि वे अपने आप में पूर्ण हैं और अकेलेपन में फंसे रहते हैं!

संत पापा ने झूठे नबी की तुलना "माया" (भ्रांन्ति) से की जो दुःख का आसान एवं तत्काल समाधान प्रस्तुत करता है जो थोड़ी देर में ही व्यर्थ सिद्ध हो जाता। कितने युवा नशीली पदार्थों की लत में पड़ जाते, बेईमानी के प्राप्त करने के लिए मतलबी संबंधों में फंस जाते, कितने लोग उन काल्पनिक संबंधों के गिरफ्त में आ जाते हैं जो कुछ ही समय बाद अर्थहीन साबित होती है। ये झूठ बोलने वाले, उन चीजों द्वारा जिनका कोई वास्तविक मूल्य नहीं, उन्हें प्रस्तुत कर, लोगों से उन सारी चीजों को छीन लेते जो मूल्यवान हैं, अर्थात् उनकी प्रतिष्ठा, स्वतंत्रता एवं प्रेम करने की क्षमता को उनसे छीन लेते हैं। वे व्यक्ति के अभिमान और दिखावे पर भरोसा से खुश होते हैं किन्तु अंत में उन्हें मूर्ख बनाकर छोड़ते। मानव हृदय में उलझन उत्पन्न करने के लिए शैतान जो झूठ का पिता है बुराई को अच्छाई के रूप में तथा झूठ को सच के रूप में प्रस्तुत करता है। यही कारण है कि हम सभी को अपने हृदय को झांककर देखने की आवश्यकता है कि हम झूठे नबियों के झूठ के शिकार न फंसें। हमें अपने अंतःस्थल में प्रवेशकर यह जानने का प्रयास चाहिए कि कौन ऐसी चीज है जो मेरे हृदय में उत्तम एवं स्थायी चिन्ह बनाता है क्योंकि वह चिनह ईश्वर की ओर से आता है और इसमें सचमुच हमारी भलाई है।  

एक शिथिल हृदय

संत पापा ने अपने हृदय पर चिंतन करने हेतु प्रेरित करते हुए कहा, "हम अपने आप से पूछ सकते हैं कि किस तरह मेरी उदारता ठंढी पड़ गयी? वह कौन सा चिन्ह है जिससे पता चले कि हमारा प्रेम शिथिल पड़ रहा है? 

उन्होंने कहा, "उदारता को नष्ट करने वाली सबसे बड़ी वस्तु है, धन का लोभ, "जो हर बुराई की जड़ है।" (1 तिम. 6:10) ईश्वर एवं उनकी शांति का त्याग, हमें शीघ्र अकेला दूर ले जाता और हम ईशवचन एवं संस्कारों में सांत्वना खोजने के बदले अपने आप में ही चैन महसूस करते हैं। यह उसे  हिंसा की ओर ले जाता और उन सबको नष्ट कराता जो उसके आत्मकेंद्रण के लिए भय प्रतीत होते हैं: गर्भ में पल रहा बच्चा, वृद्ध, दुर्बल, परदेशी, विस्थापित अथवा अपना पड़ोसी वह सबको अपना दुश्मन समझने लगता है।    

उदारता के प्रति इस शिथिलता का, खुद सृष्टि भी एक मौन दर्शक बन जाती है। लापरवाही एवं अपनी रूचि पर ध्यान देने के कारण पृथ्वी उपेक्षा के विष से विषाक्त हो जाती है। आप्रवासियों को निगल कर समुद्र दूषित हो जाती है। आकाश जो ईश्वर की योजना है जो उनकी महिमा गाने के लिए निर्मित है मृत्यु बरसा रही है।

संत पापा ने कहा, "हमारे समुदायों में प्रेम भी ठंढा पड़ सकता है।" उन्होंने अपने प्रेरितिक प्रबोधन एवनजेली गौदियुम में प्रेम के अभाव के चिन्ह को प्रकट करने का प्रयास किया है। स्वार्थ और आध्यात्मिक आलस्य, फलहीन निराशावाद, आत्म-अवशोषण के लिए प्रलोभन, मानसिक संघर्ष और सांसारिक मानसिकता जो हमें केवल देखावे पर ध्यान देने हेतु प्रेरित करते, हमारे प्रेरितिक उत्साह को कम कर देते हैं।

हमें क्या करना चाहिए?

संत पापा ने कहा कि इसके लिए जैसा कि मैंने ऊपर कहा है हमें अपने अंतःस्थल पर दृष्टि डालना और अपने आप को हर दृष्टिकोण से देखना चाहिए। कलीसिया जो हमारी माता है हमें शिक्षा देती है कि हम प्रार्थना, दान एवं उपवास की सच्ची अवधि को अपनाएँ।

प्रार्थना में अधिक समय व्यतीत करने के द्वारा हम अपने हृदय की गहराई में निहित झूठ एवं आत्ममोह को उखाड़ फेंकने में समर्थ हो सकते और उसके बाद उस सांत्वना को प्राप्त करते जिसे ईश्वर हमें प्रदान करते हैं। वे हमारे पिता हैं और चाहते हैं कि हम एक अच्छा जीवन जीयें।

दान देना हमें लालच से मुक्त करता एवं हमारे पड़ोसियों की मदद करने हेतु प्रेरित करता है। जो मेरे पास है वह केवल मेरा नहीं है। किस तरह दान देना हम प्रत्येक के लिए एक सच्ची जीवन शैली बन जाए? किस तरह मैं एक ख्रीस्तीय के रूप में, प्रेरितों का अनुसरण कर सकता हूँ जो अपनी सम्पति आपस में बांटते थे? जब हम दान देते हैं तब हम ईश्वर की कृपा को उनके बच्चों के बीच बांटते हैं। यदि ईश्वर आज मेरे द्वारा किसी को मदद करते हैं तो क्या वे कल मेरी आवश्यकताओं को प्रदान क्यों नहीं करेंगे?  क्योंकि ईश्वर से अधिक उदार कोई भी नहीं हैं।

उपवास हिंसा की ओर हमारे झुकाव को कमजोर करता है, हमें निहत्था बनाता तथा बढ़ने का एक महत्वपूर्ण अवसर देता है। एक ओर यह हमें बेसहारा और भूख का अनुभव कराता, दूसरी ओर ईश्वर में जीवन की आध्यात्मिक भूख एवं प्यास को जागृत करता है। उपवास हमें उठाता है। यह हमें ईश्वर एवं पड़ोसियों की ओर अधिक ध्यान देने की प्रेरणा देता है। हम में ईश्वर की आज्ञा मानने की इच्छा जागृत करता क्योंकि केवल वे ही हमारी भूख को तृप्त कर सकते हैं।

संत पापा ने काथलिक कलीसिया के साथ-साथ भली इच्छा रखने वाले सभी लोगों को ईश्वर की आवाज सुनने हेतु निमंत्रण दिया।

पास्का की आग

संत पापा ने कलीसिया के सदस्यों से आग्रह किया कि वे चालीसा काल की यात्रा को उत्साह से शुरू करें और दान, प्रार्थना एवं उपवास द्वारा उसे पोषित करें। यदि हमारे हृदय में उदारता की आग बूझती प्रतीत हो रही हो, तो याद रखें कि ईश्वर के हृदय में यह कभी समाप्त नहीं होती। वे हमें लगातार अवसर देते हैं कि हम प्रेम पूर्वक नयी शुरूआत करें।

संत पापा ने प्रार्थना हेतु इस वर्ष भी "प्रभु के लिए 24 घंटे" पहल के लिए प्रोत्साहन दिया, जब ख्रीस्तीय समुदाय मेल-मिलाप संस्कार में भाग लेते हुए, यूखरिस्त संस्कार की आराधना करता है। यह 9–10 मार्च को रखा जाएगा। हर धर्मप्रांत में कम से कम एक गिरजाघर 24 घंटों के लिए खुला रखा जाए।

पास्का जागरण के समय, ख्रीस्त का प्रकाश सभी के मन एवं हृदय के अंधकार को दूर कर दे तथा शक्ति दे कि हम एम्माउस के शिष्यों के अनुभव को पुनः प्राप्त कर सकें। ईशवचन सुनने तथा यूखरिस्त संस्कार में भाग लेने के द्वारा हमारा हृदय विश्वास, आशा एवं प्रेम में उत्साही बना रहे।

संत पापा ने अपना स्नेह एवं प्रार्थना का आश्वासन देते हुए सभी को अपना आशीर्वाद प्रदान किया तथा अपने लिए भी प्रार्थना की मांग की। 


(Usha Tirkey)

06/02/2018 16:48