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विश्व के साथ संवाद करती संत पापा एवं कलीसिया की आवाज़

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संत पापा फ्राँसिस \ अंजेलुस व संदेश

पीड़ित मानव के लिए येसु के मुक्ति कार्य

देवदूत प्रार्थना के दौरान विश्वासियों को आशीष प्रदान करते संत पापा - AP

05/02/2018 15:01

वाटिकन सिटी, सोमवार, 5 फरवरी 2018 (रेई): वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में संत पापा फ्राँसिस ने रविवार 4 फरवरी को भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया। देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, अति प्रिय भाइयों एवं बहनो, सुप्रभात।

इस रविवार का सुसमाचार पाठ कफरनाहूम में येसु के एक दिन के वर्णन को जारी रखता है, विश्राम दिवस, जो यहूदियों का साप्ताहिक त्योहार था। (मार.1:21-39) इस बार सुसमाचार लेखक मारकुस येसु की चंगाई के कार्य एवं लोगों से मुलाकात कर उनके विश्वास को जगाने की क्रिया के बीच संबंध पर प्रकाश डालते हैं। संत पापा ने कहा, "वास्तव में, चंगाई जिसको वे हर प्रकार के रोगियों के लिए करते हैं, प्रभु चाहते हैं कि वे उसके द्वारा विश्वास में बढ़ें।" 

कफरनाहूम में येसु के दिन की शुरूआत चार उदाहरणों से होती है। पेत्रुस की सास की चंगाई, रोगी के शरीर पर ख्रीस्त की असाधारण शक्ति को केवल प्रकट नहीं करती बल्कि इस छोटे अंश में मारकुस, चमत्कार की एक सामान्य अर्थ को बतलाने की कोशिश करते हैं कि शरीर की चंगाई का उद्देश्य हृदय की चंगाई है। इस तरह, इस घटना में हर विश्वासी के लिए एक आह्वान है जो बुराई के चंगुल से मुक्त हुए हैं तथा येसु के द्वारा अपनी शक्ति को पुनः प्राप्त किया है। हमें पेत्रुस की सास के उदाहरणों का अनुकरण करना चाहिए जो तुरन्त मेहमानों की सेवा सत्कार में लग गयी।

कफरनाहूम में येसु का एक दिन, एक ऐसे दृश्य से समाप्त होता है जिसमें पूरे शहर के लोगों की भीड़ उस घर के सामने जमा हो गयी थी जहाँ येसु ठहरे हुए थे तथा हर प्रकार के रोगियों को उनके पास ला रहे थे। संत पापा ने कहा, "भीड़ शारीरिक पीड़ा एवं आध्यात्मिक अशांति का चिन्ह है, इस व्यापक परिस्थिति में येसु ने अपना मिशन पूरा किया, जिसको पूरा करने के लिए उन्होंने शब्दों एवं भावों का प्रयोग किया जिसके द्वारा उन्हें चंगाई एवं सांत्वना मिली।

संत पापा ने कहा, "येसु प्रयोगशाला को मुक्ति प्रदान करने नहीं आये, वे लोगों से अलग होकर शिक्षा नहीं देते बल्कि लोगों के बीच रहकर उन्हें शिक्षा देते हैं। हम कल्पना कर सकते हैं कि किस तरह येसु के जीवन का अधिकांश समय लोगों के बीच, सुसमाचार का प्रचार करने के लिए सड़क पर बीता, आध्यात्मिक और शारीरिक घावों को चंगा करने के लिए। मानव जो दुःखों से त्रस्त है, यहाँ भीड़ के रूप में हैं जिसका जिक्र सुसमाचार बारम्बार करता है। यह मानव दुःख, थकान एवं समस्याओं से व्यथित है। इसे येसु के मुक्तिदायी एवं नवीनीकरण के कार्य की शक्ति से संचालित होना है। इस तरह येसु विश्राम दिवस को भीड़ के बीच देर रात तक रहते हुए व्यतीत करते हैं। संत पापा न कहा, "और उसके बाद येसु क्या करते हैं?"   

संत पापा ने कहा, "दूसरे दिन वे बहुत सबेरे उठकर घर से निकले और किसी एकान्त स्थान जा कर प्रार्थना करते रहे।" येसु प्रार्थना करते हैं। इस तरह वे अपने आपको तथा अपने मिशन को ईश्वर के साथ जोड़ते हैं। वास्तव में चमत्कार वे चिन्ह हैं जो एक व्यक्ति को निमंत्रण देते हैं कि वह विश्वास का प्रत्युत्तर दें। चिन्ह जो हमेशा शब्दों के साथ चलता, व्यक्ति को ज्ञान प्रदान करता, इस प्रकार चिन्ह एवं शब्द दोनों एक साथ विश्वास का आह्वान करते हैं तथा ख्रीस्त की कृपा द्वारा दिव्य शक्ति से परिवर्तित होते हैं।

संत पापा ने पाठ के अंतिम अंश पर चिंतन करते हुए कहा, "आज के पाठ का अंतिम भाग दर्शाता है कि येसु स्वर्ग राज्य की घोषणा सड़कों पर ही अधिक करते है। शिष्य उनकी खोज कर रहे थे ताकि उन्हें शहर की ओर वापस ला सकें, वे उनके पास गये जहाँ वे प्रार्थना कर रहे थे तब येसु ने उन्हें क्या उत्तर दिया। उन्होंने कहा, "हम निकट के अन्य गाँवों में चलें ताकि मैं वहाँ भी सुसमाचार सुना सकूँ।" (पद. 38) यह था ईश्वर के पुत्र का रास्ता और उनके शिष्यों का रास्ता भी एवं यह सभी ख्रीस्तीयों का भी रास्ता है। रास्ता जो आनन्दमय सुसमाचार प्रचार का स्थान है, कलीसिया के मिशन का स्थान, जो एक यात्रा पर है आगे बढ़ रही है और कभी स्थिर नहीं रहती। 

संत पापा ने माता मरियम से प्रार्थना की कि धन्य कुवाँरी मरियम हमें पवित्र आत्मा की आवाज सुनने हेतु खुला होने में मदद करे जो कलीसिया से आग्रह करती है कि वह लोगों के बीच रहे और सभी लोगों के लिए येसु के चंगाई को लाये, जो शरीर एवं आत्मा के डॉक्टर हैं।

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

देवदूत प्रार्थना के उपरांत संत पापा ने विभिन्न लोगों की याद करते हुए विश्वासियों को सम्बोधित किया। उन्होंने नव धन्य घोषित तेरेसियो ओलिवेल्ली की याद कर कहा, "कल विजेवानो में युवा तेरेसियो ओलिवेल्ली की धन्य घोषणा हुई जो अपने ख्रीस्तीय विश्वास के लिए सन् 1945 में हेरस्कब्रुक के नजरबंद शिविर में शहीद हो गये थे। उन्होंने कमजोर लोगों के प्रति प्रेम द्वारा ख्रीस्त का साक्ष्य दिया तथा पिछली शताब्दी के शहीदों की लम्बी कतार में शामिल हुए। उनका साहसिक बलिदान आशा एवं भाईचारा का बीज है खासकर, युवाओं के लिए।"

संत पापा ने इटली में जीवन दिवस की याद दिलाते हुए कहा कि इसकी विषयवस्तु है "जीवन का सुसमाचार विश्व के लिए आनन्द।" मैं अपने आपको इटली के धर्माध्यक्षों के संदेश के साथ जोड़ते हुए, विभिन्न कलीसियाई संगठनों की सराहना करता एवं उन्हें प्रोत्साहन देता हूँ जो विभिन्न तरह से जीवन को प्रोत्साहित एवं पोषित कर रहे हैं, विशेषकर, जीवन के लिए आंदोलन। संत पापा ने उपस्थिति आंदोलन के सभी सदस्यों का अभिवाद किया। उन्होंने आंदोलन में सदस्यों की कम संख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यही मेरी चिंता है कि विश्व में अधिक लोग नहीं हैं जो जीवन के लिए संघर्ष करें जहाँ हर दिन अधिक हथियारों का उत्पादन किया जा रहा है जहाँ जीवन के विरूद्ध अधिक नियम निर्मित किये जा रहे हैं, नष्ट करने की संस्कृति हर दिन बढ़ रही है, उन चीजों को नष्ट करने की जो व्यर्थ लगती, यह सचमुच चिंता का विषय है। संत पापा ने उन सभी लोगों के लिए प्रार्थना का आग्रह किया जो विनाश के ऐसे समय में जीवन की रक्षा के लिए जागरूक हैं।

संत पापा ने मडागास्कर के लोगों के प्रति अपना सामीप्य प्रकट किया जो हाल ही में चक्रवात से बुरी तरह प्रभावित हुए थे एवं उन्होंने विस्थापित होना पड़ा है। प्रभु उन्हें सांत्वना एवं समर्थन प्रदान करे।

इसके बाद संत पापा ने विश्व के विभिन्न हिस्सों में दुःखद परिस्थितियों की ओर विश्वासियों का ध्यान आकृष्ट करते हुए कोंगो एवं दक्षिणी सूडान के लिए एक दिन के प्रार्थना दिवस की घोषणा की तथा सभी गैरकाथलिक एवं गैर-ख्रीस्तीय भाई बहनों को निमंत्रण दिया कि वे एक जुट होकर दुआ करें। उन्होंने कहा कि हमारे स्वर्गीय पिता सदा अपने बच्चों की सुनते हैं जो दुःख और परेशानी में उनकी दुहाई देते हैं। टूटे हृदयों को चंगाई प्रदान करते तथा उनके घांवों पर पट्टी बांधते हैं। संत पापा ने रोम तथा विश्व के सभी तीर्थयात्रियों का अभिवादन करते हुए कहा, "मैं आप सभी का अभिवादन करता हूँ जो रोम, इटली तथा विभिन्न देशों से तीर्थयात्री के रूप में आये हैं। मैं स्पेन के दलों, पेरिस के विद्यार्थियों, सेसत्री लेवान्ते एमपोली, मिलान एवं पालेर्मो तथा अग्रीजेनतो शहर के प्रतिनिधियों का अभिवादन करता हूँ। उन्होंने आप्रवासियों को स्वागत करने के उनके कार्यों की सराहना की और उन्हें धन्यवाद दिया। संत पापा ने "फ्रतेरना दोमुस" असोशियेशन के स्वयंसेवकों एवं संयोजकों का भी अभिवादन किया जो रोम में 50 सालों से स्वागत एवं सहयोग हेतु कार्यरत हैं।  

अंत में उन्होंने प्रार्थना का आग्रह करते हुए सभी को शुभ रविवार की मंगलकामनाएं अर्पित की।


(Usha Tirkey)

05/02/2018 15:01