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विश्व के साथ संवाद करती संत पापा एवं कलीसिया की आवाज़

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संत पापा फ्राँसिस \ प्रेरितिक यात्रा

आमघर की देखभाल हेतु ईश्वर द्वारा सौंपे गये मिशन के जीवित स्मारक, आदिवासी

पेरू के आदिवासियों के साथ संत पापा - AP

19/01/2018 17:13

पेरू, शुक्रवार, 19 जनवरी 2018 (रेई): संत पापा फ्राँसिस चिली की प्रेरितिक यात्रा समाप्त कर पेरू पहुँचे। जहाँ उन्होंने 19 जनवरी को पेरू के पोवेरतो मालदोनादो स्थित कोलिसेओ माद्रे दी दियोस खेल केंद्र में अमेजन के जनजातियों से मुलाकात की।

संत पापा ने उन्हें सम्बोधित कर कहा, "यहाँ आपके साथ, मैं अपने आप में संत फ्राँसिस के भजन को महसूस करता हूँ, " प्रभु तेरी स्तुति हो, मेरे ईश्वर।" जी हाँ, तेरी स्तुति हो इस अवसर के लिए जिसको तूने इस मुलाकात में दिया है।

संत पापा ने अमेजन एवं आस-पास से आये सभी लोगों का अभिवादन करते हुए खुशी प्रकट की कि वे उन्हें सुनने भारी संख्या में आये हैं। उन्होंने कहा, "मुझे इस मुलाकात का बड़ा इंतजार था। यहाँ आने और मुझे नजदीक से आपके चेहरों को देखने एवं इस भूमि पर चिंतन करने में मदद देने के लिए धन्यवाद। यह विविधता का वह चेहरा है जिसमें असीम विविधता और विशाल जैविक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक समृद्धि है। हम जो इस धरती पर निवास नहीं करते, हमें आपकी प्रज्ञा एवं ज्ञान की आवश्यकता है कि हम बिना नष्ट किये इस प्रांत के खजाने में प्रवेश कर सकें और उस प्रतिध्वनि को सुन सकें जिसे प्रभु ने मूसा से कहा था, "अपने पैरों से जूते निकाल लो क्योंकि यह जमीन जहाँ तुम खड़े हो यह पवित्र है।” (निर्ग. 3:5) मैं पुनः कहता हूँ, "प्रभु तेरी स्तुति हो, अमेजनवासियों में तेरे अनोखे कार्यों के लिए तथा हर तरह की जैव विविधता के लिए जिनको इस धरती ने स्वीकार किया है।"

संत पापा ने उस क्षेत्र की समस्याओं पर प्रकाश डालते हुए कहा, "स्तुति का यह गीत, छोटा हो जाता है जब हम अमेजन और वहाँ के निवासियों में गहरा घाव देखते और सुनते हैं।" उन्होंने कहा कि मैं यहाँ आना एवं आपको सुनना चाहता था ताकि हम कलीसिया के हृदय में एक साथ खड़े हो सकें तथा चुनौतियों का सामना करें एवं जीवन, धरती एवं संस्कृति की रक्षा के विकल्प को सारे हृदय से पुनः पुष्ट करें।

अमेजन के निवासियों को अपनी ही भूमि पर कदाचित ऐसी धमकी नहीं दी गई थी जैसा कि आज दी जा रही है। अमेजन विभिन्न मोर्चों पर विवादित है। एक ओर नव-निष्कर्षवाद तथा व्यवसायी लाभ के लिए दबाव जो इसके पेट्रोलियम गैस, लकड़ी, सोना और कृषि-औद्योगिक पर हाथ डालना चाहता है। दूसरी ओर, वहाँ के लोगों पर ध्यान दिये बिना, प्रकृति की सुरक्षा पर इस भूमि में राजनीतिक उद्देश्यों से नीतियों के विरूपण की धमकी दी जा रही है, विशेषकर, अमेजन के भाई- बहन को जो यहाँ निवास करते हैं। हम आंदोलनों के बारे में जानते हैं, कि यह जंगल के संरक्षण की आड़ में, वुडलैंड का विशाल विस्तार है तथा उनके साथ समझौता का प्रयास है जो स्थानीय लोगों के शोषण की ओर प्रेरित कर रहा है, नतीजन, वे भूमि और प्राकृतिक संसाधनों को खो रहे हैं। ऐसी समस्याएँ लोगों का गला घोंटतीं तथा स्थानीय विकल्पों की कमी के कारण युवाओं को प्रवास हेतु भड़कातीं हैं। हमें उस ऐतिहासिक प्रतिमान को तोड़ना है जो अमेजन को अपने निवासियों की चिंता के बिना अन्य देशों के लिए आपूर्ति का एक अतुलनीय स्रोत के रूप में प्रस्तुत करता है। संत पापा ने कहा कि मैं इसे आदिवासियों की मूल संस्कृतियों, भाषाओं, परंपराओं, अधिकारों और आध्यात्मिकता को स्वीकार और पुनर्प्राप्त करते हुए उनके साथ सम्मान, मान्यता और संवाद की संस्थागत अभिव्यक्ति को आवश्यक मानता हूँ। उन्होंने कहा, "एक अंतर-सांस्कृतिक वार्ता जिसमें खुद आप मुख्य वार्ता के हिस्सेदार बनें, खासकर, बृहद परियोजनाओं में जो आपकी भूमि को प्रभावित करता है। मान्यता और संवाद ही उन रिश्तों को बदलने का सबसे अच्छा तरीका होगा जिनके इतिहास को बहिष्कार और भेदभाव से चिह्नित किया गया है।" साथ ही साथ उन्हें अपने समुदायों और संगठनों से आनेवाली आशाजनक पहल के अस्तित्व को स्वीकार करना सही है जिसमें स्वयं स्थानीय लोग एवं समुदाय ही उस वुडलैंड के संरक्षक बनें। इस तरह संसाधन जो संरक्षण कार्यों द्वारा उत्पन्न होती है वह उनके परिवार के लाभ के लिए हो, उनके जीवन स्तर को ऊँचा उठाये तथा उनके समुदायों के स्वास्थ्य एवं शिक्षा को प्रोत्साहन दे।

संत पापा ने कहा कि इस तरह "अच्छा करने" का यह रूप वहाँ के लोगों के ज्ञान में पाए जाने वाले "अच्छे जीवन" के तरीकों के अनुरूप है।" उन्होंने वहाँ के आदिवासियों से कहा कि वे ईश्वर द्वारा सौंपे गये मिशन के जीवित स्मारक हैं जिसमें उन्होंने आमघर की देखभाल की जिम्मेदारी सौंपी थी।

संत पापा ने जीवन की सुरक्षा को प्रथम स्थान देते हुए कहा कि जीवन की सुरक्षा से बढ़कर भूमि की सुरक्षा का कोई दूसरा उद्देश्य नहीं है। हम उस पीड़ा को जानते हैं जो हाइड्रोकार्बन के उत्सर्जन के द्वारा हुआ था जिसने परिवारों के जीवन पर गंभीर प्रभाव डाला तथा अवैध खनन जिसने पर्यावरण प्रदूषण को बढ़ाया।

संत पापा ने जीवन पर दूसरा विनाशकारी हमला मानव तस्करी को बतलाया। उन्होंने कहा, "मैं मानव तस्करी एवं बंधुवा मजदूर तथा यौन शोषण की बात कर रहा हूँ। किशोरों एवं महिलाओं के विरूद्ध हिंसा की आवाज स्वर्ग तक गूँज रही है।" मैं कितना चाहता हूँ कि हम ईश्वर की उस आवाज को सुन पाते, "तुम्हारा भाई कहाँ है?" (उत्प. 4:9) तुम्हारी बहन कहाँ है जो गुलाम बनायी गयी है? संत पापा ने कहा कि यह मुद्दा सभी पर लागू होता है।

संत पापा ने संत तुरिबीयुस की याद की जिन्होंने लीमा में तीसरे सम्मेलन की शुरूआत की थी तथा कहा था कि न केवल भूत में उन गरीब लोगों के प्रति बड़ी गलतियाँ हुई थीं किन्तु आज भी अनेक लोग उसी को दुहराना चाहते हैं। 

यह मामला सबसे कमजोर लोगों के जीवन के लिए हमारी बुनियादी विकल्प को बढ़ावा देती है। संत पापा ने "स्वैच्छिक एकाकी में आदिवासी लोगों" (आदिवासियों का ऐसा समुदाय जो दुनिया से अलग रहना पसंद करते हैं) की ओर संकेत करते हुए कहा, "हम जानते हैं कि वे सबसे कमजोर लोग हैं। उनकी प्राचीन जीवनशैली ने उन्हें अपने ही जाति के समुदायों से भी अलग कर दिया है। स्वतंत्र रूप से जीवन यापन करने के लिए वे घने जंगलों में रहते हैं। हम इन अत्यन्त कमजोर भाई बहनों की रक्षा करें। उनकी उपस्थिति हमें याद दिलाती है कि इन सार्वजनिक संसाधनों का प्रयोग हम उपभोक्तावादी लालच से न करें। सीमाएं निर्धारित की जानी चाहिए ताकि उनके निवास स्थल को बड़े पैमाने पर विनाश की सभी योजनाओं से बचाने में मदद किया जा सके।

संत पापा ने कहा कि ये हमें याद दिलाते हैं कि हम सृष्टि के सर्वोच्च मालिक नहीं हैं। हमें उनके उस महत्वपूर्ण योगदान के लिए उनकी सराहना करनी चाहिए जो अपनी संस्कृति को एक आदर्श छवि के रूप में प्रस्तुत नहीं करते। उनकी ब्रह्मांडीय दृष्टि एवं प्रज्ञा में हमें सिखलाने के लिए बहुत कुछ है जो उनकी संस्कृति का हिस्सा है।   

लोगों की संस्कृति जीवन का प्रतीक है। अमेजन न केवल जैव विविधता में अलग है किन्तु यहाँ एक अलग संस्कृति है जिसकी रक्षा नये तरह के उपनिवेशवाद से की जानी चाहिए। परिवार हमेशा से एक सामाजिक संस्थान रहा है जिसने हमारी संस्कृतियों को जीवित रखा है। विगत संकट की घड़ियों में विभिन्न तरह के साम्राज्यवाद के दौरान आदिवासियों का परिवार जीवन के रक्षा का उत्तम स्थल बना। संत पापा ने उन आदिवासियों की संस्कृति की रक्षा का आह्वान करते हुए कहा, "आइये हम संस्कृति के लोप को न भूलें जो इस ग्रह की प्रजातियों एवं जीव-जन्तुओं के लुप्त होने के समान अथवा उनसे भी गंभीर है। संस्कृतियों को लुप्त होने से बचाने का एक मात्र रास्ता है उन्हें जीवित रखना एवं उसे गतिशील रखना।

संत पापा ने कहा कि शिक्षा सेतु के निर्माण में मदद देती है और मुलाकात की संस्कृति उत्पन्न करती है अतः राज्य की प्राथमिकता एवं प्रतिबद्धता स्थानीय लोगों के स्कूल एवं उनकी शिक्षा के लिए होनी चाहिए। एक समावेशी एवं संस्कृतिकृत प्रतिबद्धता पुर्वजों की प्रज्ञा को समस्त राष्ट्र के एक खजाने के रूप में पहचान, सम्मान एवं एकीकरण प्रदान करे।

संत पापा ने वहाँ के धर्माध्यक्षों से आग्रह किया कि वे सुदूर क्षेत्रों में अपने मिशन को जारी रखें, स्कूलों, प्रशिक्षण केंद्रों और विश्व विद्यालयों में संस्कृतिकृत एवं द्विभाषिक शिक्षा को बढ़ावा देते रहें।

संत पापा ने पेरू की कलीसिया को इस क्षेत्र में उनके प्रयासों की सराहना की तथा आदिवासियों के हित में उन्हें जारी रखने का प्रोत्साहन दिया। उन्होंने उन लोगों को प्रोत्साहन दिया जो उनकी कला, साहित्य, शिल्प कौशल एवं संगीत तथा सांस्कृतिक समृद्धि का प्रदर्शन दुनिया के लिए करते हैं। यह अच्छी बात है कि आप अब अपनी पहचान को व्यक्त कर सकते हैं, हमें आपको सुनना है।

संत पापा ने आदिवासियों के बीच कार्य करने वाले मिशनरियों की ओर ध्यान आकृष्ट कर कहा कि वे उनकी संस्कृति की रक्षा में उनकी मदद कर रहे हैं। वे सुसमाचार से प्रेरित होकर ऐसा कर रहे हैं। ख्रीस्त ने स्वयं यहूदी संस्कृति में जन्म लिया तथा अपने को सभी लोगों को नवीनता के स्रोत के रूप में प्रदान किया, इस तरह हर कोई अपनी असल पहचान में अपने आप को उनसे दृढ़ता के साथ जुड़ा महसूस कर सके। उन लोगों को बढ़ावा न दें जो अपने लोगों के बीच में से काथलिक विश्वास को उखाड़ फेंकना चाहते हैं। हर संस्कृति एवं वैश्विक दृष्टिकोण जो सुसमाचार को स्वीकार करता है वह ख्रीस्त के चेहरे का नया आयाम दिखलाकर कलीसिया को समृद्ध बनाता है। संत पापा ने जनजातियों से कहा कि कलीसिया आपकी समस्या एवं जीवन से अनभिज्ञ नहीं है वह आपकी जीवन-शैली एवं संगठनों से अलग रहना नहीं चाहती है। हमें देशज लोगों की आवश्यकता है जो अमेजन की स्थानीय कलीसियाओं की संस्कृति को आकार दे सकें। अपने धर्माध्यक्षों की सहायता करें, मिशनरियों को अपने साथ एक होने दें और इस तरह एक समावेशी वार्ता द्वारा कलीसिया का रूप अमेजन के चेहरे पर, आदिवासी चेहरों के साथ कलीसिया का निर्माण किया जा सके। संत पापा ने कहा कि इसी मनोभाव से मैंने 2019 में अमेजन के सिनॉड का आह्वान किया है।

संत पापा ने धर्माध्यक्षों से कहा कि मैं आपके लचीलेपन और जहाँ आप रहते हैं वहाँ की मुश्किलताओं का सामना करने की क्षमता पर भरोसा रखता हूँ। आपने इसे अपने योगदान और मानवीय संबंधों की अपनी विभेदित दृष्टि के साथ, प्राकृतिक वातावरण और विश्वास को जीने के द्वारा अपने इतिहास में विभिन्न महत्वपूर्ण अवसरों में प्रदर्शित किया है।

संत पापा ने उन्हें प्रार्थना का आश्वासन देते हुए कहा, "मैं आपके लिए तथा आपकी धन्य भूमि जिसपर ईश्वर का आशीर्वाद है उसके लिए प्रार्थना करता हूँ एवं आपसे भी मेरे लिए प्रार्थना की अपील करता हूँ।          


(Usha Tirkey)

19/01/2018 17:13