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विश्व के साथ संवाद करती संत पापा एवं कलीसिया की आवाज़

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संत पापा फ्राँसिस \ प्रेरितिक यात्रा

संत पापा फ्राँसिस ने चिली के धर्माध्यक्षों से मुलाकात की

चिली के धर्माध्यक्षों के साथ संत पापा फ्राँसिस - REUTERS

17/01/2018 15:27

संत्यागो, बुधवार 17 जनवरी 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने संत्यागो के महागिरजाघर में सभी धर्माध्यक्षों से मुलाकात की। संत पापा ने चिली धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष को स्वागत भाषण के लिए धन्यवाद दिया और विशेष रुप से धर्माध्यक्ष बेरनार्दो पिनेरो कारवालो का अभिवादन किया जो पूरे विश्व में सबसे बुजुर्ग धर्माध्यक्ष हैं और इस वर्ष अपने धर्माध्यक्षीय अभिषेक का 60वां सालगिरह मना रहे हैं।

संत पापा ने कहा कि हमारे कार्यों में से एक प्रमुख कार्य है समर्पित जीवन जीने वालों और हमारे याजकों के करीब रहना और उन्हें मार्गदर्शन देना। यदि चरवाहा ही इधर उधर भटक जाये तो उसकी भेड़े भी भटक जायेंगी। वे भेड़ियों का शिकार बन जायेंगी। अपने पल्लीपुरोहितों के साथ धर्माध्यक्ष का संबंध पिता तुल्य हो न कि अधिकार जमाने वाला। संत जोसेफ के समान आप पुरोहितों के समीप रहें। उनके व्यक्तित्व के विकास और पवित्र आत्मा की प्रेरणा से उनके कारिस्मा को आगे बढ़ाने में उनकी मदद करें।

आज हमारा समाज अनेक समस्याओं से जूझ कहा है उनमें से एक है अनाथ होने का भाव, किसी से भी संबंध नहीं रख पाने की भावना। यह भावना हममें और हमारे पुरोहितों में भी प्रवेश कर सकती है। हम सोचना शुरु कर देते हैं कि हमारा किसी के साथ कोई सरोकार नहीं है। हम भूल जाते हैं हम ईश्वर के पवित्र और विश्वासी लोगों का हिस्सा हैं, सिर्फ धर्माध्यक्ष,पुरोहित,समर्पित जीवन जीने वाले स्त्री पुरुषों से कलीसिया नहीं बनती। लोगों के साथ रहने की इस चेतना के बिना, हम अपने जीवन, अपने प्रेरितिक कार्यों और उत्तरदायित्वों को बनाए रखने में सक्षम नहीं होंगे।

संत पापा ने कहा कि इस बात को ना समझ पाना कि पुरोहित या धर्माध्यक्ष के रुप में हमारा मिशन व्यक्तिगत नहीं परंतु संपूर्ण कलीसिया का है, यह हमारे क्षितिज को सीमित करता है और पवित्र आत्मा के सभी पहलुओं को भी दबा सकता है। यह बात तो बहुत स्पस्ट है कि लोकधर्मी हमारे चपरासी या कर्मचारी नहीं है। हम जो कहते हैं उसे तोते की तरह उन्हें दोहराना नहीं है। “याजकवाद, विभिन्न योगदानों और प्रस्तावों को प्रोत्साहन देने के बजाय,  धीरे-धीरे भविष्यवाणी की ज्वाला को बुझा देता है। याचकवाद भूल जाता है कि कलीसिया की दृश्यता और पवित्रता ईश्वर के सभी लोगों से संबंधित है, न केवल कुछ चुने हुए और प्रबुद्ध लोगों से"। (सीएफ, लुमेन जेन्सियुम, 9-14)

संत पापा ने भावी पुरोहितों के प्रशिक्षण पर ध्यान देते हुए कहा, हमें गुरुकुलों में भावी पुरोहितों की शिक्षा पर बहुत ध्यान देना चाहिए। उन्हें याचकवाद के किसी भी रूप के प्रलोभन का त्याग कर, संस्कृतियों की विविधता को स्वीकार करते हुए ईश्वर और कलीसिया की सेवा में सक्षम बनाना होगा। धर्मनिर्पेक्षता को देखते हुए उन्हें मिशन के लिए तैयार करना होगा। विश्व बंधुत्व   की भावना से समस्त लोगों की सेवा हेतु उन्हें सक्षम बनाना होगा।        

      संत पापा ने कहा आइये हम पवित्र आत्मा से कृपा मांगे कि हम अपने धर्मप्रांत में कलीसिया की आत्मरक्षा के बजाय चिली में धर्मप्रचार के लिए अपने समय, भाषा और धन का सही प्रयोग कर सकें। आइए हम सब उन चीजों से अपने आप को अलग करने से न डरें जो हमें मिशनरी जनादेश से अलग कर देता है।

चिली की माँ मरियम के संरक्षण में हम अपने को सिपुर्द करें। हम अपने पुरोहितों, धर्मसंघियों और सभी लोकधर्मियों के लिए प्रार्थना करें।

      


(Margaret Sumita Minj)

17/01/2018 15:27