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अदालत के आदेश की अवहेलना हेतु पुरोहित और धर्मबहन को जेल की सजा सुनाई गई

प्रतीकात्मक तस्वीर - REUTERS

13/01/2018 13:24

भोपाल, शनिवार 13 जनवरी 2018 (उकान) : मध्य भारत के एक अदालत ने दो साल पहले स्कूल से बहिष्कृत दो छात्रों को फिर से स्कूल में बहाल करने के लिए अदालत के आदेश की अवहेलना करने वाले पुरोहित और धर्मबहन को दो महीने जेल की सजा सुनाई।

मध्य प्रदेश के उज्जैन में जिला अदालत ने संत पौल कोनवेंट स्कूल के प्रबंधक फादर सेबास्टियन मुल्लामानगालम और स्कूल की प्रिंसिपल सिस्टर अर्चना को छात्रों को मुआवजे के लिए 10 लाख रुपये (यूएस $ 16,000) का भुगतान करने का आदेश दिया।

अदालत के 6 जनवरी के आदेश को, तीन दिन बाद सार्वजनिक किया गया, उन्हें इसके लिए भी 3,200 अमेरिकी डॉलर की कानूनी मुआवजे का भुगतान करने की आवश्यकता है।

हालांकि, अदालत ने आदेश के खिलाफ अभियुक्तों को उच्च न्यायालय में अपील करने में मदद करने के लिए एक महीने के लिए अपने आदेश को रोक दिया है, अगर वे अपील नहीं करते हैं तो उन्हें सजा स्वीकार करनी पड़ेगी।

चर्च के अधिकारियों ने अभियुक्त पुरोहित और सिस्टर को स्कूल से निकाल दिया और नए अधिकारियों को नियुक्त किया, लेकिन उन्हें बनाए रखने के लिए उन्होंने कोई अपराध नहीं किया।

स्कूल पर शैक्षणिक वर्ष 2015 के अंत में तीन छात्रों को उनके हस्तांतरण प्रमाणपत्र में एक टिप्पणी के साथ कि उनके माता-पिता का "व्यवहार अच्छा नहीं था," अवैध रूप से स्कूल से निकालने का आरोप है।

स्कूल के अधिवक्ता अरुण कन्नान ने उकान्यूज को बताया कि माता-पिता "स्कूल के खिलाफ झूठे आरोप लगाकर लगातार परेशान कर रहे थे" जैसे कि स्कूलों में छात्रों का वित्तीय शोषण होता है।

माता-पिता ने जिला बाल कल्याण समिति के माध्यम से समापन का विरोध किया, जो छात्रों के पक्ष में था। लेकिन स्कूल ने इसके खिलाफ अदालत में अपील की, जिसने स्कूल के पक्ष में फैसला सुनाया। एक अभिभावक देवेंद्र महेशवरी ने जिला अदालत में अपील की।

अप्रैल 2116 में अदालत ने स्कूल से विद्यार्थियों को यह कहते हुए फिर से स्कूल में बहाल करने के लिए कहा, कि उन्हें अपने माता-पिता के व्यवहार के लिए दंडित नहीं किया जा सकता। कन्नान के मुताबिक, स्कूल को यह निर्देश दिया गया कि अगर छात्र उनसे संपर्क करते हैं और वापस लौटना चाहते हैं तो "कानून के मुताबिक उन्हें स्वीकार करना है।

लेकिन उन तीन निकाले गये विद्यार्थियों में से एक लड़का और लड़की की माता महेशेवरी ने स्कूल के अधिकारियों को अदालत के आदेश का अनुपालन नहीं करने दोष लगाया और अधिकतम सजा देने के लिए दबाव डाला।

कन्नान ने कहा कि शिकायतकर्ता ने स्कूल से संपर्क नहीं किया और इसलिए छात्रों को भर्ती नहीं किया जा सका। उन्होंने कहा कि स्कूल के हित में मजबूत केस है और उसे उच्च न्यायालय में सभी आरोपों से मुक्त कर दिया जाएगा।

मध्य प्रदेश, जहां हिंदू हिन्दू भारतीय जनता पार्टी पिछले 15 सालों से सत्ता में रही है, में ख्रीस्तीयों पर हिंसा का इतिहास है और ख्रीस्तीय नेताओं का आरोप है कि ख्रीस्तीयों पर हिंसा प्रशासन के मौन समर्थन के साथ होता है।

स्वैच्छिक समूह स्वतंत्रता रक्षा एलायंस द्वारा प्रकाशित आंकड़ों के मुताबिक जनवरी से नवम्बर 2017 तक में राज्य में ख्रीस्तीयों पर 21 हिंसक हमले और हिंदू समूहों द्वारा उत्पीड़न और धमकियों के सैकड़ों मामले दर्ज किये गये। 


(Margaret Sumita Minj)

13/01/2018 13:24