Social:

RSS:

रेडियो वाटिकन

विश्व के साथ संवाद करती संत पापा एवं कलीसिया की आवाज़

अन्य भाषाओं:

संत पापा फ्राँसिस \ मिस्सा व प्रवचन

येसु पर निगाहें रखें और मुफ्त में देने हेतु बाहर निकलने का साहस करें, संत पापा

संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन के संत पेत्रुस महागिरजाघर में प्रवचन देते हुए - AP

06/01/2018 15:43

वाटिकन सिटी, शनिवार, 6 जनवरी 2018 ( रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन के संत पेत्रुस महागिरजाघर में प्रभु प्रकाश महोत्सव पर ख्रीस्तयाग अर्पित किया। अपने प्रवचन में संत पापा ने ज्योतिषियों द्वारा की गई तीन क्रियाओं पर प्रकाश डाला जो ईश्वर की ओर हमारी यात्रा की मार्गदर्शिका है। ईश्वर आज सभी लोगों के लिए प्रकाश और मुक्ति के रूप में प्रकट हुए हैं। ज्योतिषियों ने तारा देखा, वे तारे के पीछे निकल पड़े और उन्होंने उपहार दिया।

तारे को देखना

संत पापा ने कहा कि तारे को देखने से यह घटना शुरु होती है। उस समय बहुत से लोग थे पर क्यों सिर्फ ज्योतिषियों ने ही उस तारे को देखा। बहुत कम लोग आकाश का ओर अपना दृष्टि उठाते हैं वे अपने दैनिक जीवन के कार्यकलापों में अपने स्वस्थ्य की देखभाल में तथा चंद रुपये कमाने में व्यस्त रहते हैं। संत पापा आत्मचिंतन हेतु प्रश्न कि क्या हम वाकई ईश्वर के लिए तरसते है? क्या हम आशा करते हैं कि ईश्वर हमारे जीवन में नवीनता लाये? या क्या हम उस सूखी डाली के समान हैं जो हवा के एक झोके में उड़ा लिये जाते हैं? ज्योतिषी अपने जीवन से संतुष्ट नहीं थे उन्होंने जीवन के सही अर्थ को ढूँढने के लिए स्वर्ग की ओर अपनी नजरें उठाई। ज्योतिषियों ने ″उनका तारा उदित होते देखा″ (मत्ती 2:2)।येसु का प्रकाश हमें चकाचौंध नही करता और न ही डूबता है पर हमें आमंत्रित करता है। कुछ तारे बहुत ही आकर्षक हैं पर वे सही मार्ग निर्देशन नहीं करते हैं।जब सफलता, पैसा, कैरियर, सम्मान और सुख आदि हमारे जीवन बन जाते हैं कुछ समय के लिए हमारे जीवन में खुशियाँ रहती हैं पर वे जल्द ही खोने लगती है। तारे का आकर्षन समाप्त होने लगता है। प्रभु का प्रकाश सभी समय चमकीला नहीं होगा पर वह हमेशा हमारे साथ है। वह तारा हमें आनंद प्रदान करता है जैसा कि ″ज्योतिषी तारे को देखकर बहुत आनंदित हुए।″(मत्ती 2:10)     

यात्रा करना

 ज्योतिषी तारे के पीछे पीछे उनकी खोज में निकल पड़े जिसके लिए तारा उदित हुआ था। संत पापा ने कहा कि येसु की खोज में निकलने के लिए हमें निर्णय लेने की आवश्यकता है। हमें यात्रा करने की आवश्यकता है। इस जीवन यात्रा हमारे अनावश्यक बोझ को छोड़ने की मांग करता है। येसु की वही ढूँढ सकता है जो उसे दिल से खोज करता है। इसके लिए हमें अपना आराम की जिन्दगी को छोड़ना होगा और यात्रा करने के लिए आगे बढ़ना होगा। दूसरे शब्दों में, अगर हम येसु को ढूंढना चाहते हैं, तो हमें अपने जोखिमों को लेने, हमारे आत्म-संतुष्टि को  इनकार करने का साहस अपने में उत्पन्न करनी चाहिए।

येसु को ढूँढना आसान नहीं है। राजा हेरोद जैसे अड़चनें रास्ते में आयेंगे। पंडित और शास्त्री जानते थे कि मुक्तिदाता का जन्म कहाँ और कब होने वाला है पर वे अपने आराम की जिन्दगी से बाहर निकलना नहीं चाहते थे और बेतलहेम की ओर जाना नहीं चाहते थे। जैसे ही ज्योतिषियों को बालक का पता चला वे  तुरंत यात्रा में निकल पड़े। उन्होंने बालक को पाया और उसे साष्टांग प्रणाम किया।

उपहार भेंट की

ज्योतिषियों ने बालक को कीमती उपहार सोना लोबान और गन्धरस की भेंट चढ़ायी। संत पापा ने कहा हमारी जीवन यात्रा तभी सफल होती है जब हम अपने आप को समर्पित करते हैं। यह जीवन हमें ईश्वर से मिला हैं अतः हमें भी बदले में कुछ भी उम्मीद किए बिना दूसरों के लिए देना चाहिए। यह हम तभी कर पायेंगे जब हमने येसु को पा लिया है। वे कहते हैं ″तुम्हें मुफ्त में मिला है मुफ्त में दो।″(मत्ती 10:8)       

जब हम एक बीमार व्यक्ति की देखभाल करते हैं,  किसी व्यक्ति के मुश्किल समय में उसका साथ देते हैं, किसी की मदद करते हैं या किसी को माफ सकर देते हैं जिसने हमें चोट पहुँचाया है, ये सभी ख्रीस्तीयों के उपहार हैं जो मुफ्त में दिये जा सकते हैं और येसु हमें याद दिलाते हैं कि यदि तुम उन्हीं लोगों से प्रेम करते होजो तुम से प्रेम करते हैं, तो पुरस्कार का दावा कैसे कर सकते हो ऐसा तो गैर-ख्रीस्तीय भी करते हैं।″(सीएफ, मत्ती, 5: 46)

प्रवचन के अंत में संत पापा ने समुदाय को येसु के लिए मुफ्त में काम करने हेतु कृपा मांगने की हेतु प्रेरित करते हुए कहा,″आइये हम प्रभु से कृपा मांगे कि वे हमें खुद को देने की खुशी का अनुभव दें।″


(Margaret Sumita Minj)

06/01/2018 15:43