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ओखी चक्रवाती तूफान में लापता 650 मछुओं पर उम्मीदें पड़ी फीकी

ओखी चक्रवाती तूफान के बाद अपनी नावों को समेटते मछुए, मुम्बई परिसर, 05.12.2017 - EPA

05/01/2018 11:31

तिरुवनन्तपुरम, शुक्रवार, 5 जनवरी 2018 (ऊका समाचार): दक्षिणी भारतीय तट पर ओखी चक्रवात के एक महीने बाद लगभग 650 मछुआरे अभी भी गायब हैं, सैकड़ों परिवारों ने क्रिसमस और नया साल उनकी वापसी की आशा में बिताया लेकिन मछुओं के वापस लौटने की उम्मीदें दिन ब दिन मन्द होती जा रही हैं। केरल एवं तमिल नाड के समुद्री तटों पर जीवन यापन करनेवाले अपने पिताओं एवं बेटों की वापसी का इन्तज़ार कर रहे हैं। 

संघीय सरकार ने लापता मछुआरों की संख्या 661 बताई है। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने 27 दिसंबर को संसद को बताया था कि केरल से 261 और तमिलनाडु से 400 लोग लापता हैं।

आधिकारिक सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, भारत के दक्षिणी छोर पर केरल और तमिलनाडु राज्यों में आई नवंबर 29 –दिसंबर पाँच की त्रासदी में 76 लोग मारे गए थे।

केरल के तिरुवनन्तपुरम के निकटवर्ती समुद्री तट पर कार्यरत स्वयंसेवी संगठन के नेता रॉबर्ट पानीपिल्लै ने कहा, "हमारे लिये वास्तव में इस वर्ष क्रिसमस और नया साल एक दुखद घटना सिद्ध हुई। बच्चे अपने पिताओं की, पत्नियाँ अपने पतियों की तथा माताएँ अपने बेटों की आतुरता से प्रतीक्षा कर रही हैं। ऐसे में परिवार किस प्रकार पर्व मनाते?" 

उन्होंने बताया कि उनके 59 वर्षीय भाई क्लीटस पानीपिल्लै तथा उनके सहकर्मी भी जलमग्न हो गये। स्वयंसेवी संगठनों के नेताओं का आरोप है कि 29 नवम्बर को जब तूफान आया तब हज़ारों मछुए अपने काम में जुटे हुए थे क्योंकि अधिकारी समय पर तूफान की सूचना देने में असफल रहे थे।

चक्रवात के शिकार लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए 30 दिसंबर को केरल के कोवलम समुद्री तट पर हजारों मिट्टी के दिये जलाये गये। इस श्रद्धान्जलि समारोह में कई विदेशी पर्यटकों ने भी भाग लेकर पीड़ित परिवारों के प्रति एकात्मता का प्रदर्शन किया। 

इसी बीच, कलीसिया के अधिकारियों ने सामयिक बचाव कार्य न करने पर केरल एवं तमिल नाड के प्रशासन अधिकारियों पर जाँचपड़ताल हेतु एक न्यायिक आयोग की मांग की है।


(Juliet Genevive Christopher)

05/01/2018 11:31